1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CG News: छोटे कमरों में बिना मान्यता चल रहे स्कूल, दुर्घटना हुई तो कौन जिम्मेदार होगा?

CG News: बिलासपुर जिले में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) मामले में बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। शिक्षा विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र पर हाईकोर्ट ने असंतुष्टि जताई।

2 min read
Google source verification
CG News: छोटे कमरों में बिना मान्यता चल रहे स्कूल, दुर्घटना (photo-patrika)

CG News: छोटे कमरों में बिना मान्यता चल रहे स्कूल, दुर्घटना (photo-patrika)

CG News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) मामले में बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। शिक्षा विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र पर हाईकोर्ट ने असंतुष्टि जताई। नाराज हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को अगली सुनवाई में स्वयं के शपथपत्र में बताने कहा कि प्रदेशभर में बिना मान्यता प्राप्त संचालित नर्सरी स्कूलों पर क्या एक्शन लिया गया है?

CG News: नि:शुल्क शिक्षा देना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि छोटे-छोटे कमरों में बिना मान्यता के स्कूल चल रहे हैं, कोई बड़ी दुर्घटना होगी तो जिमेदार कौन होगा। दरअसल, प्रदेश के कई निजी स्कूल बिना किसी मान्यता के नर्सरी से लेकर कक्षा 8 वीं तक की पढ़ाई करा रहे हैं। इस मामले को लेकर विकास तिवारी ने जनहित याचिका दायर की है।

यह याचिका उन स्कूलों के खिलाफ दायर की गई थी, जिन्होंने आरटीई कानून के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं दिया, जबकि नियमानुसार वे इसके लिए बाध्य थे। आरोप यह है कि ये स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं और सरकारी सब्सिडी लेकर भी नियमों की अनदेखी करते हुए मनमानी फीस वसूल कर रहे हैं। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि करोड़पति लोग पान दुकान की तरह गली-गली में बिना मान्यता प्राप्त स्कूल चला रहे हैं। कोर्ट ने इस मामले में जवाब मांगा था।

करोड़ों की फीस लेते हैं, पर टैक्स नहीं देते

सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि प्राइवेट स्कूल वाले करोड़ों रुपए की फीस लेते हैं लेकिन सरकार को टैक्स तक नहीं देते। सरकार भी इन निजी स्कूल संचालकों को बचाने के लिए पूरा जोर लगाती है। हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षा के अधिकार के तहत जो भी प्रावधान हैं, उनका पूरी तरह पालन कराना अधिकारियों की ही जिमेदारी है।

इसमें भी लापरवाही बरती जा रही है। याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि धारा 18-19 के तहत बिना मान्यता के निजी स्कूल नहीं चल सकते लेकिन प्रदेश भर में इनकी भरमार है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि छोटे छोटे कमरों में स्कूल चल रहे हैं। बच्चे ठूंसे जा रहे हैं कोई बड़ी दुर्घटना होगी तो किसकी जिम्मेदारी होगी। हाईकोर्ट ने इस पर भी सरकार से जवाब मांगा है।

बिना मान्यता के स्कूलों पर क्या कार्रवाई की

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते शिक्षा विभाग से इस गंभीर लापरवाही पर जवाब मांगा और पूछा है कि आखिर ऐसे स्कूल संचालकों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और शिक्षा सचिव को निर्देशित किया कि वे 17 सितंबर तक शपथपत्र के माध्यम से स्पष्ट करें कि इस पूरे मामले में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि शिक्षा के अधिकार के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा देना हर राज्य की संवैधानिक जिमेदारी है।