
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी साइबर ठगी (Cyber Crime CG) के मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब बिलासपुर में 65 लाख की ठगी के शिकार के व्यक्ति के पास फिर से ठगों के फोन आने लगे। ठगों ने बिलासपुर के जनकराम पटेल को फोन करके कहा, वह 55 हजार रुपए जमा करवाएं तो उससे ठगे गए 65 लाख रुपए वापस आ जाएंगे।
बिलासपुर पुलिस ने जनकराम पटेल से 65 लाख की ठगी का मामला सामने के आने के बाद ही मिशन-65 लांच किया था। इसके तहत मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा से 5 आरोपियों को पकड़ा गया है। चैनल के दूसरे ठग अब भी साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। बताया जाता है कि साल 2017 में टेरर फंडिंग के खुलासे के दौरान जो आरोपी पकड़ से बाहर था वह विराट सिंह ही है, जिसे बिलासपुर पुलिस ने हाल ही में रीवा के एक गांव से पकड़ा है।
बिटक्वाइन कैसे करता है काम
जिस बिटक्वाइन (क्रिप्टो करेंसी) से 65 लाख समेत 5 करोड़ रुपए पाकिस्तान भेजे जाने की बात कही जा रही है, वह कई देशों में मान्य नहीं है। भारत में भी आरबीआई ने 2018 में इसे प्रतिबंधित किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2020 में इसे फिर से मान्यता दे दी है। क्रिप्टो करेंसी के रूप में बिटक्वाइन ही नहीं बल्कि बाजार में रेडक्वाइन, सियाक्वाइन, सिस्कोइन, वाइसक्वाइन आदि भी प्रचलित हैं।
2013 में इसमें रातोंरात आए सबसे डाउनफॉल के बाद यह चर्चाओं में आई। बिटक्वाइन धारक के लिए रिस्क होती है, चूंकि इसके नियमन और नियंत्रण के लिए कोई सरकारी एजेंसी जवाबदेह नहीं होती। बिलासपुर पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल के मुताबिक बिटक्वाइन को एक प्रकार का डिजिटल हवाला ही कहा जा सकता है। एक बिटक्वाइन की कीमत 8 लाख रुपए होती है।
आरोपियों से पूछताछ जारी
ठगी के आरोप में पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है। 5 करोड़ रुपए की रकम बिटक्वाइन के जरिए पाकिस्तान भेजे जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस टेरर फंडिंग के एंगल से भी जांच कर रही है। पुलिस रिमांड पर लिए गए विराट सिंह और राजेश जायसवाल ने कुछ राज उगले हैं। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि इस पैसे को और किन देशों में भेजा जाता था।
Published on:
21 Oct 2020 10:06 am
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