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1145 सहायक शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता हुआ साफ, हाईकोर्ट ने स्टे हटाकर दिए काउंसिलिंग के निर्देश

Assistant Teacher Promotion Case: हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में माना है कि शिक्षक पदोन्नति मामले में कोरबा कलेक्टर द्वारा विधि अनुरूप प्रक्रिया अपनाई जा रही थी। कोर्ट ने इसके साथ ही प्रक्रिया में जारी स्टे को हटा दिया है।
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 हाईकोर्ट ने स्टे हटाकर दिए काउंसिलिंग के निर्देश

बिलासपुर हाईकोर्ट

Assistant Teacher Promotion Case: हाईकोर्ट (Bilaspur Highcourt) ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में माना है कि शिक्षक पदोन्नति मामले में कोरबा कलेक्टर द्वारा विधि अनुरूप प्रक्रिया अपनाई जा रही थी। कोर्ट ने इसके साथ ही प्रक्रिया में जारी स्टे को हटा दिया है। कोर्ट ने विधि सम्मत काउंसिलिंग के जरिए प्रमोशन (Assistant Teacher Promotion Case) की प्रक्रिया को पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद कोरबा जिले मेें 1145 सहायक शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है।

ज्ञात हो कि राज्य शासन ने सहायक शिक्षकों को प्रधान पाठक के पद पर प्रमोशन (Assistant Teacher Promotion Case) देने का निर्देश जारी किया था। शासन के निर्देशानुसार प्रदेशभर में जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय के माध्यम से शासन द्वारा तय मापदंड के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की जानी थी। इसी कड़ी में कोरबा जिले के 1145 सहायक शिक्षकों को प्रधान पाठक बनाने के लिए प्रमोशन सूची बनाई गई थी।

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जानिए क्या है पूरा मामला
जिला शिक्षाधिकारी ने इन शिक्षकों को प्रमोशन (Assistant Teacher Promotion Case) देते हुए जिले के विभिन्न स्कूलों में पदस्थापना दी थी। जिला शिक्षाधिकारी के आदेश में विसंगति का हवाला देते हुए कुछ शिक्षकों ने कलेक्टर कोरबा संजीव झा के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जांच कराई थी। जांच में शिकायत को सही पाते हुए विसंगति का उल्लेख किया गया था। शिकायत की पुष्टि के बाद कलेक्टर ने पदोन्नति सूची को निरस्त कर दिया था।

कोर्ट ने कलेक्टर की कार्रवाई को पाया सही
याचिकाकर्ता शिक्षकों ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से कोर्ट (Bilaspur Highcourt) के समक्ष जानकारी दी थी कि पदोन्नति व पदस्थापना (Assistant Teacher Promotion Case) प्रक्रिया को निरस्त करने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कलेक्टर के आदेश पर रोक लगाते हुए काउंसिलिंग की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी थी। इस बीच शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के बाद कोर्ट (Bilaspur Highcourt) ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुरक्षित फैसले पर कोर्ट ने आदेश प्रसारित कर दिया है। कोर्ट ने माना है कि कलेक्टर कोरबा का आदेश उचित था।