
D.El.Ed फीस निर्धारण पर ठप असर, 2019 से लंबित... हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को दिए निर्देश(photo-patrika)
CG News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में हाईकोर्ट ने कर्मचारी से त्रुटिपूर्ण वेतन निर्धारण पर जारी वसूली आदेश के खिलाफ दायर याचिका में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी से अतिरिक्त भुगतान अगर गलत बयानी, धोखाधड़ी या कर्मचारी की गलती के कारण नहीं, बल्कि नियोक्ता की गलती के कारण हुआ हो तो कर्मचारी को नियोक्ता द्वारा की गई गलती के लिए दंडित नहीं किया जा सकता। इसके साथ कोर्ट ने याचिकाकर्ता से जारी वसूली आदेश को रद्द कर वसूली गई राशि वापस करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता गोपाल प्रसाद नायक को 1996 में व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, जांजगीर-चांपा में प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया गया, जहां वह निर्धारित कार्यों को कर रहे थे। निदेशक तकनीकी शिक्षा नया रायपुर ने 21 दिसंबर 2022 को एक विवादित आदेश पारित किया, जिसमें याचिकाकर्ता को वर्ष 2006 से किए गए अतिरिक्त भुगतान की वसूली का निर्देश दिया गया। शेष ञ्चपेज ५
निदेशक तकनीकी शिक्षा द्वारा जारी वसूली आदेश के खिलाफ नायक ने अधिवक्ता दीक्षा गौरहा के माध्यम से याचिका दायर की। याचिका पर जस्टिस एके प्रसाद की बेंच में सुनवाई हुई। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि वेतन निर्धारण में कोई भी त्रुटि पूरी तरह से प्रतिवादियों की ओर से है। और 16 वर्षों के बाद वेतन से वसूली मनमाना, दुर्भावनापूर्ण, और कानूनन गलत है। याचिकाकर्ता की अपने वेतन निर्धारण में कोई भूमिका नहीं थी।
रेकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे तक यह पता चले कि याचिकाकर्ता ने अधिकारियों को गुमराह करने में कोई भूमिका निभाई थी, या वह धोखाधड़ी, गलत बयानी, या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का दोषी था। किसी भी स्तर पर उसे यह नहीं बताया गया कि ऐसा निर्धारण त्रुटिपूर्ण था या वह अतिरिक्त भुगतान वापस करने उत्तरदायी हो सकता है।
Updated on:
02 Sept 2025 01:15 pm
Published on:
02 Sept 2025 01:15 pm
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