
अमरीश पुरी की दमदार एक्टिंग का जादू। (फोटो सोर्स: IMDb)
Amrish Puri Birth Anniversary: एक अभिनेता, एक सच्चा कलाकार वो होता है, जो गिरगिट की तरह रंग बदल सकता है, माने कि जैसा देस हो, वैसा भेस धारण कर लेता हो। यहां पर देस का मतलब किरदार से है। एक अभिनेता जो खुद को उस किरदार में सोख लेता है, उस किरदार में भूल जाता है, ऐसे कलाकार विरले ही पैदा होते हैं, सदियों में आते हैं। ऐसे ही कलाकार थे बॉलीवुड के दिग्गज खलनायक अमरीश पुरी, जो पल में मन में नफरत भर देने वाला विलेन बन जाते थे और दूसरे पल एक पिता के रूप में दिल छू जाते थे, ऐसा कर पाना हर एक्टर के बस की बात नहीं।
अगर दुनिया अमरीश पुरी को 'Mr. India' के जालिम मोगैम्बो के रूप में याद करती है तो वहीं उनको दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के सिमरन के एक आदर्श और परम्परावादी पिता के रूप में भी नहीं भूलती और ये एक बेहतरीन एक्टर की सबसे बड़ी जीत है। चलिए, आज मोगैम्बो उर्फ़ अमरीश पूरी की बर्थ एनिवर्सरी पर चलिए नजर डालते हैं उनके कुछ बेहतरीन किरदारों की पर...
1993 की इस फिल्म में अमरीश पुरी ने एक ईमानदार पुलिस हवलदार का किरदार निभाया था। ये हवलदार अपने बेटे को पुलिस इंस्पेक्टर बनते हुए देखना चाहता है, लेकिन क़िस्मत ने उसके लिए कुछ और ही लिखा हुआ था।
ये फिल्म 1997 में आई थी और इसके लिए अनिल कपूर-तबु को भी बखूबी याद किया जाता है। अमरीश पुरी इस फिल्म में एक ऐसे पिता के रोल में थे, जो अपने बेटे के विदेश सेटेल होने के फ़ैसले के खिलाफ़ था, वो चाहता था कि उसका बेटा गांव में रह कर गांव के लिए काम करे। इस फिल्म के लिए अमरीश पुरी को नेशनल अवॉर्ड भी मिला था।
घातक को कौन भूल सकता है? फिल्म में फ़्रीडम फ़ाइटर शम्भुनाथ अपने बेटे सनी देओल के साथ दुश्मनों की ऐसी-तैसी कर देता है।
‘जा सिमरन, जी ले अपनी ज़िन्दगी’ का डायलॉग यूं ही नहीं हिट हुआ, इसे बोलने वाला एक्टर था अमरीश पुरी। इस फिल्म में सिमरन का पिता वो इंसान है, जो लंदन में रहते हुए भी अपनी जड़ें नहीं भूला है। वो अपनी बेटियों से भी उसी सोच को अपनाने की आशा रखता है। लेकिन परदेस में उसे अपने देश की महक खलती है, इसलिए वो अपनी बेटी की शादी भी जबरन अपने पिंड में करवाना चाहता है। 1995 में आई इस फिल्म ने बॉलीवुड में फिल्मों की दिशा बदल दी थी और बाप का रोल भी।
गुंडई के राजा बने अमरीश अपने बेटे को अपनी ही राह में चलने देना चाहता है लेकिन उसके कुछ दोस्त उससे दुश्मनी निकालने के चक्कर में उसके पोते को किडनैप कर लेते हैं।
किस को याद नहीं है Mogambo? उसका एक ही मकसद है, भारत पर अपना कब्ज़ा करना और उसके इस मिशन को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं उसके गुंडे। लेकिन उन्हें रोकने वाला एक ही आदमी है Mr. India।
घायल का बलवंत राय, जो शहर का नामी-गिरामी वकील होने के बाद भी अपने गोरखधंधे बंद नहीं करता। उसके इस कपट का शिकार बनती है सनी देओल की फ़ैमिली, फिर वो बलवंत राय के साथ वो करता है, जो उसने उसके कुत्तों के साथ किया था। इस फिल्म का बलवंत राय आज भी सभी को याद है।
इस फिल्म में भी पुरी साहब ने एक ऐसे वकील का किरदार निभाया था, जो एक बेगुनाह को सूली पर चढ़ा देता है। सालों बाद उसी आदमी का बेटा, अनिल कपूर उस वकील से बदल लेता है और उसे भी सूली पर चढ़ा दिया जाता है।
इस फिल्म को जितना मीनाक्षी शेषाद्री के रोल के लिए याद किया जाता है, उतना ही लॉयर बने अमरीश पुरी के रोल को भी। बॉलीवुड की कुछ-एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्मों में से एक थी दामिनी।
इस फिल्म में सपेरा भैंरो सिंह नागों को प्यारी, उनकी मणि पर कब्ज़ा करने के लिए षड्यंत्र रचता है। अमरीश पुरी के साधु की एक्टिंग इतनी ज़बरदस्त थी कि इसकी छवि पर्दे पर बाबा बने सभी कलाकारों में देखने को मिलती है।
करन-अर्जुन का दुर्जन सिंह प्रॉपर्टी के लिए राखी के दोनों लड़कों को मार देता है। बाद में वो ही लड़के दूसरे जनम में उससे बदला लेने आते हैं।
ये फिल्म तब आई थी, जब भारत में आतंकी गतिविधियां अपने चरम पर थीं। दारा एक ऐसी आतंकवादी संगठन का सरगना था, जिसका मकसद सिर्फ़ आतंक फैलाना था। लेकिन उसके Right हैंड, अजय देवगन के अच्छाई के रास्ते पर चलने का फैसला उसे पसंद नहीं आता। वो डायलॉग तो याद ही होगा, ‘दिल जले, दिल जले’।
राम और लखन का वो चाचा, बिशम्बर, जो पहले उनके बाप-दादा की हत्या करवाता है, फिर उनकी प्रॉपर्टी हड़प लेता है। ये फिल्म अमरीश पुरी की एक्टिंग के बिना कभी हिट नहीं होती।
सकीना का पिता बना अशरफ अली, जिसने सनी देओल को हैंडपंप उखाड़ने पर मजबूर कर दिया था। 2001 की इस हिट फिल्म में अमरीश पुरी ने एक पाकिस्तानी नेता की भूमिका बहुत अच्छे से निभायी थी।
अमरीश पुरी की एक्टिंग इतनी जबरदस्त और पावरफुल थी कि अमरीश पुरी फिल्मों में काम करने के लिए कई बार उन्हें फिल्म के हीरो से ज्यादा फीस मिलती थी। फिल्म में उनका किरदार छोटा हो या बड़ा उनकी एक्टिंग कि स्क्रीन पर आते ही उनका असर दिखने लगता था। डायरेक्टर उन्हें अपनी फिल्म में लेने के लिए ज्यादा फीस ऑफर करते थे क्योंकि फिल्म में अमरीश पुरी की मौजूदगी उसको खास बना देती थी।
हम भारतीयों के लिए अगर अमरीश पुरी Mogambo थे, तो वेस्ट के लिए स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म 'Indiana Jones and Temple of Doom' के मोला राम। एक दफा स्पीलबर्ग ने उनके बारे में कहा था कि वो दुनिया के बेस्ट विलेन हैं और उनके जैसा दुनिया में कोई नहीं हो सकता। 2005 में भारतीय सिनेमा से उसका सबसे अच्छा विलेन छिन गया लेकिन उसकी अदायगी को हम कभी नहीं भूल पाएंगे।
Updated on:
22 Jun 2026 11:08 am
Published on:
22 Jun 2026 10:30 am
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