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‘जवानी के जोश में सब एक जैसे होते हैं’, Gen Z पर कंगना रनौत का बेबाक बयान, बोलीं- मैं 15 साल में ओशो को पढ़ती थी

Kangana Ranaut On Gen Z: बॉलीवुड अभिनेत्री और सासंद कंगना रनौत ने हाल ही में Gen Z के विचारों को लेकर बात की है। उन्होंने बताया कि उस उम्र में वो कैसे सोचती थीं।
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Kangana Ranaut On Gen Z

कंगना रनौत ने Gen Z पर की बात (फोटो सोर्स- DD National)

Kangana Ranaut On Gen Z: बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत अक्सर अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चा में रहती हैं। इस बार उन्होंने Gen Z की सोच, युवावस्था में विद्रोही रवैये और उम्र बढ़ने के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को लेकर अपनी राय रखी है। कंगना ने कहा कि जवानी के दौर में लगभग हर व्यक्ति के भीतर व्यवस्था और दुनिया को अलग नजरिए से देखने की इच्छा होती है। उन्होंने अपने किशोरावस्था के दिनों का उदाहरण देते हुए बताया कि वो 15 साल की उम्र में ओशो को पढ़ा करती थीं।

15 साल की उम्र में ओशो को पढ़ती थीं कंगना

सुधीर चौधरी के साथ इंटरव्यू में कंगना ने युवाओं की सोच पर बात करते हुए अपने बचपन का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में वह भी सवाल करने और अलग नजरिया रखने वाली थीं। उनके मुताबिक उस उम्र में व्यक्ति को लगता है कि उसने दुनिया को समझ लिया है और बाकी लोग चीजों को सही तरीके से नहीं देख रहे।

कंगना ने कहा कि उन्होंने भी 15 साल की उम्र में ओशो को पढ़ना शुरू कर दिया था। उनके मुताबिक जवानी के जोश में व्यक्ति का नजरिया काफी आदर्शवादी हो सकता है। उस समय उसे लगता है कि समाज और दुनिया को अपने हिसाब से बदलना चाहिए।

जिम्मेदारियां आने पर बदलता है नजरिया

कंगना का मानना है कि जैसे-जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है और उसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियां आती हैं, वैसे-वैसे उसकी सोच में भी बदलाव आता है। उन्होंने समझाया कि जब कोई व्यक्ति खुद अपने परिवार के लिए कमाने लगता है और रोजमर्रा की जरूरतों की जिम्मेदारी उसके कंधों पर आती है, तब उसे जिंदगी की वास्तविक चुनौतियों का अंदाजा होने लगता है।

उनके अनुसार उस वक्त सिर्फ आदर्शों की बात करना पर्याप्त नहीं रह जाता, बल्कि सुरक्षा, रोजगार, परिवार और भविष्य जैसे मुद्दे भी उतने ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

सुरक्षा और सरकार के कामकाज पर भी बोलीं

बातचीत के दौरान कंगना ने देश में सुरक्षा से जुड़े सवालों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने आतंकी घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई बड़ा हमला होता है तो आम नागरिक के मन में सबसे पहले अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है।

उन्होंने मुंबई के ताज होटल पर हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि आखिर ऐसी घटनाएं कैसे हो सकती हैं और क्या सरकार लोगों को पर्याप्त सुरक्षा दे पा रही है। कंगना ने यह भी बताया कि एक मां के तौर पर वह अपनी बेटी के भविष्य और सुरक्षा को लेकर किस तरह सोचती हैं।

बेटी को देती हैं खुलकर जीने की सीख

कंगना ने लैंगिक समानता को लेकर भी अपनी सोच साझा की। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि उनकी बेटी बिना किसी भेदभाव और डर के अपनी जिंदगी जिए। उनका मानना है कि लड़कियों को भी लड़कों की तरह स्वतंत्र होकर आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए।

हालांकि, इसी संदर्भ में उन्होंने समाज में अलग-अलग समुदायों की लड़कियों के पालन-पोषण और उनके पहनावे को लेकर मौजूद अंतर पर भी टिप्पणी की। उनके बयान का यह हिस्सा अब चर्चा का विषय बन गया है।

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