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‘द केरल स्टोरी 2’ विवादों पर बोले सुमित गहलावत, ‘इसे गंभीर मुद्दा न बनाएं, हम एक धर्मनिरपेक्ष…

Sumit Gahlawat on The Kerala Story 2: 'द केरल स्टोरी 2' में सलीम का किरदार निभाने वाले अभिनेता सुमित गहलावत ने कहा कि फिल्में समाज को उतना आकार नहीं देतीं जितना कि परवरिश देती है।

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मुंबई

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Rashi Sharma

Feb 28, 2026

Sumit Gahlawat on The Kerala Story 2

'द केरल स्टोरी 2' विवादों पर बोले एक्टर सुमित गहलावत। (फोटो सोर्स: IMDb)

Sumit Gahlawat on The Kerala Story 2: कई सारे विवादों के बाद बहुचर्चित फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' आखिरकार बीते दिन (शुक्रवार) को रिलीज हो गई है। फिल्म ने अपने पहले दिन ही बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि, कोई फिल्म की तारीफ कर रहा है तो कोई इसको प्रोपेगेंडा बता रहा है। फिल्म में सलीम की भूमिका निभाने वाले एक्टर सुमित गहलावत ने इस पर हो रहे विवादों पर खुलकर बात की है। फ्री प्रेस जर्नल के साथ एक खास बातचीत में, सुमित ने भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने पर फिल्मों के असर पर बात करते हुए, पर्दे से हटकर परवरिश की ताकत पर जोर दिया।

'द केरल स्टोरी 2' विवादों पर बोले एक्टर सुमित गहलावत (Sumit Gahlawat on The Kerala Story 2)

'द केरल स्टोरी 2' पर उन्होंने तर्क दिया कि नैतिकता और अच्छी शिक्षा पर सिनेमा का नकारात्मक असर नहीं पड़ सकता है। इसके साथ ही उन्होंने दर्शकों से फिल्मों को बांटने का नहीं बल्कि सोच-विचार का साधन मानने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि समाज में आपसी समझ और मेल-जोल फिल्मों या पर्दे पर दिखाई जाने वाली कहानियों से ज्यादा लोगों के अपने व्यवहार पर निर्भर करता है।

इसके आगे उन्होंने कहा कि आजकल लोग ट्रेंड को बहुत आसानी से फॉलो करने लग जाते हैं, ठीक उसी तरह जैसे सुपरहिट फिल्म 'तेरे नाम' में सलमान खान के हेयरस्टाइल का क्रेज था। वहीं, सुमित ने सवाल उठाया कि सिर्फ दो घंटे के एक्सपीरियंस से वेल्यूज का इतना कमजोर हो जाना कितना नाजुक है। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि अगर किसी बच्चे को घर या स्कूल में मिलने वाले संस्कारों पर दो घंटे की फिल्म का असर पड़ राह है, तो समस्या कहीं और है; शायद वो सिर्फ अपनी मनमानी करने का बहाना ढूंढ रहे थे।" एक्टर ने सलाह देते हुए ये भी कहा कि 'संस्कार' और शिक्षा की नींव इतनी मजबूत होनी चाहिए कि वह किसी भी काल्पनिक कहानी का उसको हिला ना पाए, चाहे वो कितनी भी सशक्त क्यों न हो।

सिनेमा को आप किस तरह से लेते हैं वो आपकी...

उन्होंने आगे कहा, "मैंने ऐसे घर देखे हैं जहां चाचा या बड़े-बुजुर्ग खूब शराब पीते हैं, फिर भी बच्चा ये सीख सकता है कि उसे अपने जीवन में ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।" सुमित ने आगे कहा कि सिनेमा को आप किस तरह से लेते हैं वो आपकी पर्सनल चॉइस और नजरिए पर निर्भर करता है, न कि फिल्में देखने का परिणाम।

बढ़ती क्रिटिसिज्म के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "लोग अब चीजों को बहुत गंभीरता से लेने लगे हैं, पहले लोग शांति से फिल्में देखते और उन पर चर्चा करते थे, लेकिन अब लोग कुछ ज्यादा ही 'नाजुक' या संवेदनशील हो गए हैं।"

फिल्म में कुछ अच्छा लगे तो उसे अपनाएं

इसके अलावा उन्होंने कहा, "अगर आपको फिल्म में कुछ अच्छा लगे तो उसे अपनाएं; अगर कुछ बुरा लगे तो उसे सकारात्मक रूप से एक सबक के रूप में लें कि क्या नहीं करना चाहिए, लेकिन उसे अपने ऊपर इतना हावी न होने दें।"

उन्होंने आगे कहा, "मैं विभाजन पैदा करने वालों से भी यही कहूंगा: इसे इतनी गंभीरता से न लें क्योंकि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं और अगर हम अच्छा जीवन जिएंगे, तो दूसरे भी हमारे साथ अच्छा जीवन जिएंगे। सौ लोगों में से शायद कोई एक ही ऐसा हो जो अशांति फैलाने की कोशिश करे, लेकिन हमें बस उसे नजरअंदाज करना चाहिए और जीवन को आसान बनाना चाहिए।"