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Anti-AI Trade का क्यों मचा है शोर, क्या चमकने वाली है भारतीय शेयर बाजार की किस्मत?

Share Market News: AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशकों का पैसा दोबारा भारतीय बाजार की ओर लौट सकता है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Jun 24, 2026

Indian Stock Market

भारतीय बाजार में FPI की बिकवाली थम गई है। (PC: AI)

Stock Market Outlook: पिछले दो साल से दुनियाभर के शेयर बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का जादू सिर चढ़कर बोल रहा था। सेमीकंडक्टर और एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में ऐसी तेजी आई कि कई बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदलती दिख रही है। एआई शेयरों में हालिया मुनाफावसूली ने निवेशकों के बीच एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। क्या एआई सेक्टर में बनी तेजी अब थकने लगी है? और अगर ऐसा होता है तो क्या भारत को इसका फायदा मिल सकता है?

भारत से निकलकर ताइवान और साउथ कोरिया गया FPI का पैसा

दरअसल, पिछले एक साल में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारतीय बाजार में कम रुचि देखने को मिली। उन्होंने भारतीय बाजार से खूब बिकवाली की। इसकी एक बड़ी वजह यह रही कि वैश्विक निवेशकों का पैसा भारत से निकलकर दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे उन बाजारों की तरफ गया, जहां एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों का दबदबा है। अब जब इन बाजारों में बिकवाली का दौर चल पड़ा है, तो ऐसी उम्मीद की जा रही कि जो पैसा विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से निकाला था, वो वापस भारत आ सकता है।

1 साल में काफी घट गई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी

जुलाई 2024 में MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी थी। लेकिन अप्रैल 2026 तक यह घटकर 11.9 फीसदी रह गई। यानी करीब 40 फीसदी की गिरावट। इसके उलट दक्षिण कोरिया की हिस्सेदारी 12.1 फीसदी से बढ़कर 18.7 फीसदी तक पहुंच गई। वहीं, ताइवान ने भी मजबूत बढ़त दर्ज की और उसका वेटेज 18.4 फीसदी से बढ़कर 24.8 फीसदी हो गया। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों का तेज उछाल रहा, जिसने इन बाजारों को निवेशकों का पसंदीदा ठिकाना बना दिया।

अब Anti-AI Trade की हो रही बात

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई थीम पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन इसमें कुछ समय के लिए ठहराव आ सकता है। कई कंपनियों के वैल्यूएशन काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुके हैं और निवेशक अब कमाई के वास्तविक आंकड़ों पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। निवेशक अब एआई से इतर दूसरे बाजारों में मौके तलाश रहे हैं। यही एंटी एआई ट्रेड है। अगर AI से जुड़े शेयरों में बड़ी गिरावट आती है, तो दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों का MSCI में वेटेज घट सकता है। ऐसे में भारत का हिस्सा अपने आप बढ़ेगा। इसका सीधा असर उन पैसिव फंड्स और ETF निवेशकों पर पड़ेगा, जिन्हें MSCI इंडेक्स के हिसाब से निवेश करना पड़ता है। ऐसे फंड्स को भारत में अधिक निवेश करना पड़ सकता है।

भारत की ताकत AI नहीं, घरेलू अर्थव्यवस्था

मास्टरट्रस्ट के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ रवि ने बताया कि भारत की ग्रोथ स्टोरी एआई इन्वेस्टमेंट सायकल पर डिपेंड नहीं है। यहां की अर्थव्यवस्था घरेलू खपत, बैंकिंग विस्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ जैसे मजबूत आधारों पर टिकी हुई है। यही वजह है कि जब दुनिया के कई बाजार तकनीकी शेयरों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर दिखाई देते हैं, तब भारत अपेक्षाकृत संतुलित निवेश विकल्प बनकर उभरता है।

निवेशकों के लिए भारत बन सकता है बड़ा मौका

भारत की कमाई का आधार डायवर्सिफाइड है और देश के आर्थिक संकेतक लगातार बेहतर हो रहे हैं। रुपये की स्थिरता, रिजर्व बैंक की विश्वसनीय नीति और मजबूत पूंजी बाजार व्यवस्था भारत को अन्य उभरते बाजारों से अलग बनाती है। एआई शेयरों में समय-समय पर झटके आते रहेंगे, क्योंकि मौजूदा वैल्यूएशन को सही साबित करने वाली कमाई आने में अभी काफी समय लग सकता है। दूसरी तरफ भारत में कई ऐसे सेक्टर हैं, जिनकी ग्रोथ घरेलू मांग पर आधारित है और जिनका आउटलुक स्टेबल नजर आता है।

कच्चे तेल की कीमतें बन सकती हैं गेम चेंजर

बुधवार को क्रूड ऑयल की कीमत में काफी गिरावट आई है। WTI क्रूड 2.84 फीसदी गिरकर 71.13 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वहीं, ब्रेंट क्रूड 2.98 फीसदी गिरकर 74.78 डॉलर प्रति बैरल रह गया है। अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। अगर कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है, तो भारत की इकोनॉमी और मजबूत होगी। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ सकता है।

भारत के पक्ष में जा सकती है AI की अस्थिरता

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार का मानना है कि सेमीकंडक्टर कंपनियों और उनसे जुड़े बाजारों में आगे भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। तेजी आने पर निवेशक मुनाफावसूली करेंगे। इससे अस्थिरता बनी रहेगी। दूसरी तरफ भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर गति से आगे बढ़ रही है। ऐसे में विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए भारत जैसे बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं। यानी अगर AI ट्रेड की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो भारतीय शेयर बाजार के लिए यह एक नया मौका साबित हो सकता है।