
FMCG कंपनियां अपने उत्पाद महंगे कर सकती हैं। (PC: AI)
FMCG Price Hike: अगर आप आने वाले त्योहारी सीजन में खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं, तो जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। देश की कई बड़ी कंज्यूमर कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई चीजें महंगी हो सकती हैं। टूथपेस्ट, डिटर्जेंट, नमक, पेंट, टायर और घरेलू उपकरणों जैसे उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इस बार दाम बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में जारी तनाव है। ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बाद कच्चे तेल और उससे जुड़े कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ी है। कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत का असर अब ग्राहकों तक पहुंचाना जरूरी हो गया है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने कहा है कि अगले कुछ महीनों में डिटर्जेंट और डिशवॉश बार जैसी होम केयर कैटेगरी में सीमित दायरे में कीमतें बढ़ाई जाएंगी। इसके अलावा डोडला डेयरी, एशियन पेंट्स समेत कम से कम सात कंपनियों ने भी अपने तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों से बातचीत में कीमतें बढ़ाने की योजना का संकेत दिया है।
HUL के मुख्य वित्त अधिकारी निरंजन गुप्ता ने कहा कि कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में लागत को बैलेंस करने के लिए चरणबद्ध तरीके से प्राइस हाइक की जा रही है।
कई कंपनियां पहले ही कीमतें बढ़ा चुकी हैं। हैवेल्स इंडिया ने कुछ उत्पादों के दाम 8% तक बढ़ा दिए हैं। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के नमक की कीमत करीब 7% बढ़ चुकी है। इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो दूसरे उत्पादों में भी कीमतें बढ़ने का सिलसिला जारी रह सकता है।
अगस्त से नवंबर के बीच भारत में त्योहारों का मौसम रहता है। इसी दौरान रक्षाबंधन, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं। इस अवधि में उपभोक्ताओं की खरीदारी सबसे ज्यादा होती है। कई कंपनियों की सालाना बिक्री का करीब एक-तिहाई हिस्सा इसी सीजन में आता है। इसलिए कंपनियों को उम्मीद है कि मजबूत मांग के चलते ग्राहक बढ़ी हुई कीमतें भी स्वीकार कर लेंगे।
जून में खुदरा महंगाई दर करीब डेढ़ साल बाद पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के लक्ष्य से ऊपर पहुंच गई। इसकी बड़ी वजह खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतें रहीं। हालांकि, महंगाई अभी भी RBI के 2% से 6% के तय दायरे के भीतर है। RBI का अनुमान है कि मार्च 2027 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 5.1% रह सकती है।
वित्त मंत्रालय का कहना है कि महंगाई अब सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक सीमित नहीं रही। वैश्विक स्तर पर ईंधन महंगा होने और मौसम की अनिश्चितता का असर दूसरी उपभोक्ता वस्तुओं पर भी दिखने लगा है। आरबीआई ने संकेत दिया है कि अगर महंगाई का दबाव ज्यादा व्यापक हुआ, तो नीतिगत स्तर पर कोई बड़ा कदम उठाया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस साल अब तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। माना जा रहा है कि 3 से 5 अगस्त के बीच होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में भी रेपो रेट को स्थिर रखा जा सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आगे का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि कच्चे तेल की कीमतें कितनी अधिक रहती हैं और मानसून का असर खरीफ फसलों पर कितना पड़ता है।
नोमुरा की एशिया (जापान को छोड़कर) की मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा का कहना है कि कच्चे माल की लागत और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव इतना बढ़ गया है कि कुछ हद तक कीमतें बढ़ाना लगभग तय है। हालांकि, अभी तक शहरों और गांवों दोनों जगह उपभोक्ता मांग स्थिर बनी हुई है। रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार जून में खुदरा बिक्री पिछले साल की तुलना में 6% बढ़ी, जो मई से बेहतर रही। हालांकि, सामान्य से कमजोर मानसून और अल नीनो का खतरा आने वाले महीनों में खपत की रफ्तार को प्रभावित कर सकता है।
Updated on:
01 Aug 2026 02:02 pm
Published on:
01 Aug 2026 02:02 pm
