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Gold Price Outlook: जुलाई महीने में सोने में आई तेजी, आगे कैसा रहेगा गोल्ड मार्केट? एक्सपर्ट्स से समझिए

Gold Price Prediction: मार्केट एक्सपर्ट्स अभी भी लॉन्ग टर्म में सोने को लेकर पॉजिटिव हैं। उनका मानना है कि फेड की ब्याज दर नीति, मिडिल ईस्ट तनाव और RBI के फैसले आने वाले महीनों में सोने की दिशा तय करेंगे।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Aug 01, 2026

Gold Price Outlook

जुलाई महीने में गोल्ड में तेजी आई है। (PC: AI)

Gold Price Today: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सोने की कीमतों में गिरावट जरूर आई, लेकिन बाजार के जानकार इसे बड़ी कमजोरी नहीं मान रहे। उनका कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली और अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती की वजह से हुई। लॉन्ग टर्म आउटलुक अभी भी तेजी के पक्ष में नजर आ रहा है। शुक्रवार की गिरावट के बावजूद जुलाई महीने में सोने ने करीब 1% की बढ़त दर्ज की। यह फरवरी के बाद इसकी पहली मासिक तेजी है। यह बताता है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी सोने पर बना हुआ है।

डॉलर मजबूत हुआ तो सोने पर बढ़ा दबाव

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर में जनवरी 2023 के बाद सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट आई थी। इसके अगले ही दिन डॉलर में सुधार देखने को मिला। डॉलर मजबूत होने पर सोना दूसरी करेंसी वाले खरीदारों के लिए महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर असर पड़ता है और कीमतों पर दबाव बनता है। यही वजह रही कि सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सोने में बिकवाली बढ़ गई।

क्या कह रहे एक्सपर्ट्स

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद सोने में फंडामेंटल्स मजबूत बने हुए हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि मौजूदा कीमतों में धीमी आर्थिक वृद्धि, ऊंची लेकिन नरम पड़ती महंगाई और केंद्रीय बैंकों द्वारा सीमित सख्ती जैसे फैक्टर्स पहले से शामिल हैं। ऐसे में फिलहाल सोना मौजूदा स्तरों के आसपास सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। हालांकि, अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था कमजोर होती है, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होती है या हालिया गिरावट के बाद फिर खरीदारी लौटती है, तो सोने में नई तेजी देखने को मिल सकती है।

मिडिल ईस्ट का तनाव बना सपोर्ट

अमेरिका, ईरान और ईरान समर्थित हूती समूह के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्प तलाशते हैं और सोना उनकी पहली पसंद बन जाता है। दूसरी तरफ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को फिर हवा दे सकती हैं। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों पर फैसला लेना और मुश्किल हो सकता है। ऐसे माहौल में भी सोने की सुरक्षित निवेश वाली छवि मजबूत बनी रहती है।

AI बूम पर भी जताई चिंता

जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस्टोफर वुड का मानना है कि अब निवेशकों को दोबारा सोने और गोल्ड माइनिंग कंपनियों के शेयरों में निवेश बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी से बढ़ता निवेश कहीं डॉट-कॉम बबल जैसी स्थिति पैदा न कर दे। अगर भविष्य में एआई सेक्टर में बड़ी गिरावट आती है, तो इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे समय में सोना निवेशकों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।

आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक आने वाले दिनों में सोने की चाल कई अहम घटनाओं पर निर्भर करेगी। ये घटनाएं निम्न हैं:

  • RBI की अगली मौद्रिक नीति
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सितंबर में होने वाली बैठक
  • मिडिल ईस्ट के हालात
  • अमेरिका के आर्थिक आंकड़े
  • कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

इन सभी घटनाओं का सीधा असर सोने की कीमतों और त्योहारी सीजन में ज्वेलरी की मांग पर पड़ सकता है।

क्या कहते हैं बाजार के जानकार?

कामा ज्वेलरी के प्रबंध निदेशक कॉलिन शाह का कहना है कि सोना फिलहाल दो बड़ी ताकतों के बीच संतुलन बना रहा है। एक तरफ फेड की सख्त मौद्रिक नीति है, वहीं दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है। ऐसे में सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी रह सकती है। उधर LKP सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी का मानना है कि फिलहाल बाजार को कोई बड़ा ट्रिगर नहीं मिला है। इसलिए निकट भविष्य में MCX गोल्ड 1,40,000 रुपये से 1,44,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड कर सकता है। उनका कहना है कि अगली बड़ी चाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेड की नीति से तय होगी।