
इस हफ्ते सोने की कीमतों में भारी तेजी आई है। (PC: AI)
Gold Price Today: सोने की कीमतों ने इस हफ्ते निवेशकों को चौंका दिया। इस हफ्ते गोल्ड की कीमत करीब 7% बढ़ गई। कच्चे तेल के दाम में गिरावट, अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की आशंका कम होने से सोने की मांग अचानक बढ़ गई। वैश्विक बाजार में शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड 2.3% चढ़कर 4,336.02 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 3% से ज्यादा की तेजी के साथ 17 जून के बाद के सबसे ऊंचे स्तर तक भी पहुंचा था। इस हफ्ते सोने में 7% से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई, जो 19 जनवरी के बाद इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है।
अमेरिका से आए रोजगार के आंकड़ों ने सोने की तेजी को और हवा दी है। अमेरिकी श्रम विभाग के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, पिछले महीने गैर-कृषि क्षेत्र में रोजगार 23 हजार जॉब्स घट गया। कमजोर रोजगार बाजार से अब यह संभावना बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगली बैठक में ब्याज दर बढ़ाने से पीछे हट सकता है। ब्याज दरें नहीं बढ़ने का सीधा फायदा सोने को मिलता है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई का दबाव भी कुछ कम हुआ है।
इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी ने भी सोने को सपोर्ट दिया। तेल सस्ता होने से महंगाई बढ़ने की चिंता कम हुई है। इससे बाजार में यह उम्मीद मजबूत हुई कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ज्यादा समय तक ऊंचा रखने के लिए मजबूर नहीं होंगे।
आमतौर पर ज्यादा ब्याज दरें सोने के लिए मुश्किल पैदा करती हैं, क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशकों के लिए बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले विकल्प ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं। लेकिन जैसे ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना घटती है, सोने की चमक लौटने लगती है।
मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और शांति की उम्मीद से भी बाजार में महंगाई को लेकर चिंता घटी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। अगर तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई पर दबाव घटता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है। इससे महंगाई का दबाव कम होगा और सोने के लिए माहौल बेहतर बन सकता है।
सोने की तेजी की एक बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों की खरीद भी है। कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद केंद्रीय बैंकों की सोने में दिलचस्पी कम नहीं हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने 288.9 टन सोना खरीदा। यह एक साल पहले की तुलना में 62% ज्यादा है। दक्षिण कोरिया का केंद्रीय बैंक भी 13 साल बाद फिर सोने की खरीदारी में लौटा है। इससे यह संकेत मिलता है कि कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक ने इससे पहले 2011 से 2013 के बीच करीब 90 टन सोना खरीदा था। उस समय औसत कीमत करीब 1,629 डॉलर प्रति औंस थी और कुल निवेश लगभग 4.7 अरब डॉलर रहा था। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी आगे भी मजबूत रह सकती है। हालांकि, पूरे साल की मांग 2025 के स्तर से कम रहने का अनुमान है।
सोने में हाल की गिरावट ने कुछ बड़े निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका पैदा किया है। जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस्टोफर वुड और अरबपति हेज फंड मैनेजर जॉन पॉलसन का मानना है कि सोने में लंबी अवधि की तेजी की शुरुआत हो सकती है। पॉलसन के मुताबिक, जैसे-जैसे लोगों का भरोसा कागजी मुद्रा में कम होगा, सोने की मांग बढ़ती जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंकों के साथ अब निजी निवेशकों की ओर से भी सोने की मांग बढ़ रही है।
पॉलसन का मानना है कि सोना धीरे-धीरे दुनिया की सबसे अहम रिजर्व करेंसी के तौर पर अपनी जगह मजबूत कर रहा है। हालांकि, उनका एक दिलचस्प सुझाव यह भी है कि निवेशक सिर्फ सोना खरीदने के बजाय गोल्ड माइनिंग कंपनियों पर भी नजर रख सकते हैं, खासकर उन कंपनियों पर जिनके पास बड़े लेकिन अभी विकसित नहीं किए गए सोने के भंडार हैं।
क्रिस्टोफर वुड ने अपने 'ग्रीड एंड फियर' रिपोर्ट में सोने और गोल्ड माइनिंग शेयरों में दोबारा धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने की सलाह दी है। वुड ने मौजूदा हालात की तुलना डॉट-कॉम दौर से की है। उनका कहना है कि अगर AI कंपनियों पर हो रहा भारी खर्च और निवेश कमजोर पड़ता है और इसके साथ क्रेडिट से जुड़ी परेशानियां सामने आती हैं, तो अमेरिकी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले सोने की ओर रुख कर सकते हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, मौजूदा कीमतों पर सोना वैश्विक अर्थव्यवस्था की मौजूदा तस्वीर के अनुरूप है। दुनिया की आर्थिक ग्रोथ मध्यम बनी हुई है, महंगाई पहले से कम है, लेकिन अभी भी ऊंची है और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लेकर सख्त नीति जारी रहने की उम्मीद है। इस माहौल में सोना कुछ समय तक सीमित दायरे में रह सकता है। इसमें मौजूदा स्तर से करीब 5% ऊपर या नीचे की चाल देखने को मिल सकती है। लेकिन कुछ बड़े संकेत तेजी का रास्ता खोल सकते हैं। अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है, भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ता है, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होती है या निवेशक गिरावट पर तेजी से खरीदारी शुरू करते हैं, तो सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस या उससे ऊपर जा सकता है।
दूसरी तरफ, अगर अमेरिकी और वैश्विक अर्थव्यवस्था उम्मीद से ज्यादा मजबूत रहती है, बॉन्ड यील्ड बढ़ती है और बाजार में तनाव कम होता है, तो सोने पर दबाव आ सकता है। हालांकि, मौजूदा स्तर से सोने में 10% से ज्यादा की गिरावट को रोकने में निचले स्तर पर खरीदारी मददगार साबित हो सकती है। यानी सोने में आगे भी उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन केंद्रीय बैंकों की खरीद और आर्थिक अनिश्चितता इसे मजबूत सपोर्ट दे सकती है।
(यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। निवेश संबंधी फैसले लेने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Updated on:
08 Aug 2026 12:16 pm
Published on:
08 Aug 2026 12:12 pm
