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तेल, गैस और खाद की कीमतें लंबे समय तक रहेंगी ऊंची, तीन बड़े वैश्विक संस्थानों ने दी चेतावनी

Middle East war economy: मध्य पूर्व युद्ध के चलते IMF, World Bank और IEA ने वाशिंगटन में साझा बैठक कर चेतावनी दी कि तेल, गैस और खाद की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग सामान्य नहीं हुई है और कम आय वाले देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।

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IMF, World Bank, and IEA Issue Joint Warning: Middle East War Poses Risk of Energy and Food Crisis

मध्य पूर्व युद्ध ने दुनिया की सप्लाई चेन को हिला दिया।

Global supply chain disruption: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को लेकर दुनिया के तीन सबसे बड़े और प्रभावशाली संस्थानों ने एक साथ गंभीर चेतावनी दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक (World Bank) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुखों ने वाशिंगटन में मुलाकात की और एक संयुक्त बयान जारी किया। यह कोई साधारण बयान नहीं है। इसमें तीनों संस्थानों ने संयुक्त रूप से मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण ऊर्जा बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का मिलकर आकलन किया।

वाशिंगटन में हुई इस बैठक में तीनों संस्थाओं के प्रमुखों ने अपने-अपने ताजा आकलन साझा किए। यह बैठक खास इसलिए भी थी क्योंकि यह IEA की मासिक ऑयल मार्केट रिपोर्ट और IMF के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक जारी होने से ठीक एक दिन पहले हुई।

तीन सेक्टर एक साथ खतरे में

संस्थानों के मुताबिक सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण एनर्जी, फूड और इनसे जुड़े दूसरे उद्योग प्रभावित होते है। यह एक सप्लाई चेन है, जो बुरी तरह से प्रभावित हुई है। तेल की ऊंची कीमतों से उत्पादन लागत बढ़ती है। दुसरी ओर खाद की कमी से खेती भी प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी से होता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसे अर्थशास्त्री बहु-क्षेत्रीय संकट है। यानी इससे बाजार के हर सेक्टर में युद्ध का गंभीर प्रभाव पड़ता है।

क्या बताया गया बयान में?

संयुक्त बयान में कहा गया कि यह असर बेहद असमान है और सबसे ज्यादा नुकसान उन देशों को हो रहा है जो एनर्जी इंपोर्ट करते हैं, खासतौर पर कम आय वाले देशों को। इसके साथ ही मध्य पूर्व के कुछ तेल और गैस उत्पादक देशों को भी झटका लगा है और उनके एक्सपोर्ट रेवेन्यू में भारी गिरावट आई है। यानी यह युद्ध सिर्फ एनर्जी इंपोर्टर देशों को नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के उत्पादक देशों को भी बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है।

देश स्तर पर मदद की तैयारी

तीनों संस्थाओं ने बताया कि उनकी टीमें देश स्तर पर भी मिलकर काम कर रही हैं। IMF और World Bank उन देशों को पॉलिसी सलाह और जरूरत के मुताबिक वित्तीय मदद देने के लिए तैयार हैं, जो इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। तीनों संस्थाओं के प्रमुखों ने कहा कि वे एनर्जी मार्केट, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अलग-अलग देशों पर युद्ध के असर की बारीकी से निगरानी करते रहेंगे। साथ ही वे अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर एक ऐसी रिकवरी की नींव रखने की कोशिश करेंगे जो स्थिरता, विकास और रोजगार सुनिश्चित कर सके।

इससे पहले कब साथ थी ये संस्थाएं?

संकट कब आए साथकौन‑कौन संस्थान जुड़े? क्या किया
मध्य‑पूर्व संघर्ष से ऊर्जा‑खाद्य‑आर्थिक संकट2026 (अप्रैल) IMF, वर्ल्ड बैंक, IEA – तीनों एक साथ आए। तीनों ने संयुक्त समूह बनाया, तीनों के संयुक्त बयान
यूक्रेन युद्ध के बाद ऊर्जा‑आर्थिक संकट2022–23 मुख्य रूप से IMF‑वर्ल्ड बैंक। IEA ने अलग से विश्लेषण किया।दो संस्थान अधिक सक्रिय
1997–98 का पूर्व‑एशियाई आर्थिक संकट1997–98 IMF‑वर्ल्ड बैंक दोनों एक साथ आए। IEA की भूमिका सीमित रही।दो संस्थान अधिक सक्रिय

मिडिल ईस्ट का यह संकट इतना बड़ा है कि तीनों संस्थानों को एक साथ आना पड़ा क्योंकि इस मामले में संकट तीन स्तरों का था। ऊर्जा आपूर्ति में बाधा, आर्थिक वित्तीय स्थिरता का खतरा और कमजोर देशों में खाद्य असुरक्षा। लेकिन दुनिया में इससे पहले यह तीनों देश कभी साथ नहीं आए। इससे पहले जरुरत और संकट के हिसाब से दो संस्थाओं ने ही मिलकर काम किया था।