
भारत अमेरिका से प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले रियायत चाहता है। (PC: AI)
India US Tariff News: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अब एक अहम शर्त पर टिकी है। जैसे ही यह शर्त पूरी होगी, भारत ट्रेड डील की घोषणा कर देगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि जैसे ही अमेरिका भारत को दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में टैरिफ में रियायत देगा, भारत ट्रेड डील को अंतिम रूप देकर इसकी घोषणा कर देगा। गोयल ने कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत में अपने संवेदनशील सेक्टर्स के हितों की अच्छी तरह रक्षा की है। उन्होंने यह भी बताया कि अगस्त में देश का गुड्स एक्सपोर्ट बढ़ा है। ऐसे में उन्होंने उद्योग संगठनों से भी निर्यात के लिए बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने को कहा।
गोयल ने साफ संकेत दिया कि भारत जल्दबाजी में किसी समझौते को लागू करने के पक्ष में नहीं है। भारत चाहता है कि अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में उसे वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस, चीन, मलेशिया, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे दूसरे मैन्युफैक्चरिंग देशों के मुकाबले साफ बढ़त मिले। यानी बात सिर्फ टैरिफ घटने की नहीं है। भारत यह भी देख रहा है कि डील लागू होने के बाद भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कितनी मजबूत स्थिति में रहेंगी। गोयल ने कहा कि भारत ने संवेदनशील सेक्टर्स में अपने हितों से समझौता नहीं किया है। कृषि और डेयरी जैसे सेक्टर अब भी सुरक्षित रखे गए हैं।
भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर फरवरी 2026 में संयुक्त बयान जारी किया गया था। अमेरिकी मिशन की फैक्टशीट के मुताबिक, यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत के बाद तैयार हुए फ्रेमवर्क का हिस्सा है। समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय आयात पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ हटाने पर सहमति जताई थी। यह टैरिफ रूसी तेल की खरीद के चलते लगाया गया था।
इसके अलावा अमेरिका ने भारत पर लगाए गए बेस रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने पर भी सहमति दी थी। इस तरह भारत पर प्रभावी टैरिफ जो एक समय 50 फीसदी तक पहुंच गया था, वह घटकर 18 फीसदी रहने की बात कही गई है।
ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, डील के तहत भारत अमेरिका से आने वाले कई औद्योगिक सामानों पर टैरिफ खत्म या कम करेगा। इसके अलावा कई अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों के लिए भी शुल्क में कटौती की जाएगी। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन, लाल ज्वार, ड्राई फ्रूट्स और नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल जैसे उत्पाद शामिल हैं। अमेरिकी वाइन और स्पिरिट्स को भी इसमें शामिल किया गया है। भारत ने अमेरिका से अगले कुछ वर्षों में 500 अरब डॉलर से ज्यादा के ऊर्जा, सूचना एवं संचार तकनीक, कोयला और दूसरे उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
इसके साथ ही कुछ प्रमुख सेक्टर्स में गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर भी दोनों देश काम करेंगे। नियमों के तहत किस उत्पाद को किस देश का माना जाएगा, यानी Rules of Origin और डिजिटल ट्रेड से जुड़े नियमों पर भी आगे बातचीत होनी है।
सबसे बड़ा पेंच अभी भी टैरिफ का ही है। गोयल पहले भी कई बार कह चुके हैं कि समझौता तभी लागू होगा जब अमेरिका ऐसा फ्रेमवर्क तैयार करे, जिसमें भारतीय सामान को दूसरे प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग देशों की तुलना में स्पष्ट फायदा मिले। भारत के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ चीन, वियतनाम या बांग्लादेश जैसे देशों से ज्यादा रहा, तो ट्रेड डील का फायदा सीमित हो सकता है।
दूसरी तरफ भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर्स को फिलहाल सुरक्षा दी है। वहीं MSME, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और समुद्री उत्पाद जैसे सेक्टर्स को अमेरिकी टैरिफ घटने से बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
Updated on:
03 Sept 2026 04:41 pm
Published on:
03 Sept 2026 04:41 pm
