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Wholesale Inflation: पेट्रोल की रिटेल कीमतें नहीं बढ़ीं, फिर भी थोक महंगाई ने तोड़ दिया साढ़े 3 साल का रिकॉर्ड, 8.3% पर पहुंची

Wholesale Inflation: मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत में थोक महंगाई को 8.3 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। ईंधन और मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ने से उद्योगों पर दबाव पड़ रहा है।

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India Wholesale Inflation

भारत की थोक मंहगाई में तेजी दर्ज की गई है। (PC: AI)

India Wholesale Inflation: भारत की थोक महंगाई (WPI Inflation) अप्रैल में दोगुने से ज्यादा बढ़कर 8.3 फीसदी पर पहुंच गई है। यह पिछले साढ़े तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब सरकार ने पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की खुदरा कीमतों को काफी हद तक स्थिर रखा है, ताकि आम लोगों पर फ्यूल की महंगाई का सीधा असर न पड़े। हालांकि, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगा हुआ, जो कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दबाव को दर्शाता है।

उम्मीद से ज्यादा हुई महंगाई

मार्च 2026 में WPI आधारित महंगाई दर 3.88 फीसदी थी, जो अप्रैल में बढ़कर 8.3 फीसदी पर पहुंच गई है। रॉयटर्स के अनुमान के मुताबिक, थोक महंगाई 4.4 फीसदी रहने की उम्मीद थी, लेकिन यह उससे काफी ऊपर निकल गई। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, अप्रैल 2026 में महंगाई दर के बढ़ने का मुख्य कारण मिनरल ऑयल, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बेसिक मेटल्स, मैन्युफैक्चरिंग और गैर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी है। सबसे ज्यादा महंगाई फ्यूल और पावर सेगमेंट में 24.71 फीसदी रही है।

एलपीजी महंगाई 10.92% पर पहुंची

फ्यूल और पावर सेगमेंट में महंगाई का काफी ज्यादा दबाव रहा है। एलपीजी महंगाई दर मार्च में जहां -1.54 फीसदी पर थी, वह अप्रैल में बढ़कर 10.92 फीसदी पर पहुंच गई। वहीं, पेट्रोल की महंगाई दर 2.50 फीसदी से उछलकर 32.40 फीसदी हो गई। हाई स्पीड डीजल की महंगाई भी मार्च के 3.26 फीसदी से बढ़कर अप्रैल में 25.19 फीसदी पर पहुंच गई।

67.18% पर पहुंची नेचुरल गैस की महंगाई

वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव के चलते अप्रैल में फ्यूल और पावर महंगाई दर 1.05 फीसदी से बढ़कर 24.71 फीसदी हो गई। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई 67.18 फीसदी तक पहुंच गई। हाई स्पीड डीजल की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। महीने-दर-महीने आधार पर देखें तो अप्रैल में फ्यूल और पावर की कीमतों में 18.22 फीसदी का उछाल आया। थोक महंगाई में आई कुल बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान इसी सेक्टर का रहा।

प्याज की कीमतों में आई गिरावट

WPI फूड इंडेक्स अप्रैल में 2.31 प्रतिशत रही, जबकि मार्च में यह 1.85 प्रतिशत पर थी। फल, अंडे, मांस और मछली की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही। वहीं, प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर 26.45 फीसदी की गिरावट आई है। इसके साथ ही दालों की महंगाई दर -4.03 फीसदी रही।