
आईटी शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। (PC: AI)
IT Stocks Crash: भारतीय शेयर बाजार आज बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुआ है। सबसे अधिक गिरावट आज आईटी शेयरों में दर्ज हुई है। पिछले तीन कारोबारी सत्रों से जिस आईटी सेक्टर में खरीदारी का माहौल बना हुआ था, वहां अचानक बिकवाली हावी हो गई। नतीजा यह हुआ कि निफ्टी आईटी इंडेक्स 5.57 फीसदी टूटकर बंद हुआ है। उधर सेंसेक्स 303 अंक गिरकर 74,346 पर और निफ्टी 77 अंक टूटकर 23,405 पर बंद हुआ है।
सबसे ज्यादा मार बड़े आईटी शेयरों पर पड़ी। TCS करीब 9 फीसदी तक फिसल गया। Infosys, HCL Tech और Tech Mahindra में भी 4 से 6 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली। LTIMindtree 8 फीसदी से ज्यादा टूटा, जबकि Coforge, Persistent Systems, Mphasis और Oracle Financial Services Software जैसे शेयर भी लाल निशान में बंद हुए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह गिरावट ऐसे समय आई है जब आईटी इंडेक्स पिछले तीन कारोबारी दिनों में करीब 7 फीसदी चढ़ चुका था। बाजार के जानकारों का मानना है कि हाल की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को बेहतर विकल्प समझा और यही दबाव शेयरों पर भारी पड़ गया। पिछले कुछ दिनों में आईटी शेयरों में खरीदारी की एक वजह यह भी थी कि कई कंपनियों के वैल्यूएशन लंबे समय के औसत स्तर के आसपास या उससे नीचे पहुंच गए थे। कमजोर रुपये और AI को लेकर सकारात्मक चर्चाओं ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया था। लेकिन बाजार की असली चिंता अब भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वहां की टेक्नोलॉजी खर्च की रफ्तार ही बनी हुई है।
असल कहानी AI के इर्द-गिर्द घूम रही है। दुनियाभर में चिप, सेमीकंडक्टर और AI से जुड़ी कंपनियों के शेयर नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन भारतीय आईटी कंपनियां उस रफ्तार का फायदा उठाती नजर नहीं आ रहीं। उल्टा निवेशकों के मन में यह सवाल बढ़ रहा है कि AI कहीं इस सेक्टर के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को कमजोर तो नहीं कर देगा।
ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि AI नए प्रोजेक्ट्स जरूर लेकर आएगा, लेकिन दूसरी तरफ सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को पहले से कहीं ज्यादा सस्ता और तेज भी बना रहा है। ऐसे में भारतीय आईटी कंपनियों की सबसे बड़ी ताकत माने जाने वाला बड़ी वर्कफोर्स पर आधारित मॉडल दबाव में आ सकता है। आने वाले वर्षों में नए AI प्रोजेक्ट्स से होने वाली कमाई की तुलना में प्राइसिंग में गिरावट का नुकसान ज्यादा हो सकता है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि टेक्नोलॉजी पर बढ़ता खर्च पूरी तरह भारतीय आईटी कंपनियों तक नहीं पहुंच रहा है। उसका बड़ा हिस्सा क्लाउड सर्विसेज, सॉफ्टवेयर लाइसेंस और अन्य टेक्नोलॉजी खर्चों में चला जाता है। इससे भारतीय आईटी कंपनियों को मिलने वाले नए कारोबार की रफ्तार सीमित हो रही है।
INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दसानी का मानना है कि रुपये की कमजोरी ने कंपनियों के नतीजों को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन इससे मांग की समस्या खत्म नहीं हुई है। ग्राहक अब भी खर्च को लेकर सतर्क हैं, discretionary spending कमजोर है और एआई तेजी से उस मॉडल को बदल रहा है जिस पर भारतीय आईटी इंडस्ट्री वर्षों से टिकी हुई थी।
आईटी सेक्टर के लिए एक और चिंता विदेशी निवेशकों की घटती दिलचस्पी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब कोरिया, ताइवान, जापान और अमेरिका जैसे बाजारों में AI से जुड़ी कंपनियों में ज्यादा स्पष्ट ग्रोथ दिखाई दे रही हो, तब विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय आईटी शेयर उतने आकर्षक नहीं रह जाते। मार्च 2026 तिमाही में निफ्टी-500 कंपनियों में टेक्नोलॉजी सेक्टर में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर 7.3 फीसदी पर आ गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल AI को लेकर सकारात्मक बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। निवेशकों को यह देखना है कि AI वास्तव में कंपनियों की कमाई बढ़ा रहा है या नहीं। जब तक इसका ठोस सबूत नहीं मिलता, तब तक आईटी शेयरों में आने वाली हर तेजी पर बिकवाली का दबाव बना रह सकता है।
Published on:
03 Jun 2026 04:13 pm
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