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Nifty-Gold Ratio: सोना या शेयर, कहां करें निवेश? एक्सपर्ट से समझिए क्या मिल रहे हैं संकेत

Investment Strategy: Nifty-Gold Ratio करीब 1.70 पर पहुंच गया है, जो बताता है कि सोने के मुकाबले भारतीय शेयर अभी भी आकर्षक वैल्यूएशन पर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे स्तर लंबे समय में शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहे हैं।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Aug 04, 2026

Nifty Gold Ratio

Nifty Gold Ratio काफी चर्चा में है। (PC: AI)

Gold Vs Stock Market: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पैसा शेयरों में लगाएं या सोने में। ऐसे समय में एक अहम संकेतक Nifty-Gold Ratio निवेशकों के काम आ सकता है। यह अनुपात फिलहाल 1.70 पर पहुंच गया है, जिसे कई मार्केट एक्सपर्ट्स शेयरों के पक्ष में पॉजिटिव सिग्नल मान रहे हैं। उनका कहना है कि इतिहास गवाह है, जब भी यह अनुपात 2 से नीचे गया है, उसके बाद आने वाले वर्षों में शेयर बाजार ने अक्सर बेहतर परफॉर्म किया है।

क्या होता है Nifty-Gold Ratio?

निफ्टी-गोल्ड रेश्यो निकालने के लिए Nifty-50 इंडेक्स में एक ग्राम सोने की कीमत (घरेलू भाव) का भाग दिया जाता है। यह बताता है कि सोने के मुकाबले शेयर बाजार महंगा है या सस्ता। अगर यह अनुपात ज्यादा होता है तो माना जाता है कि शेयरों की कीमतें सोने की तुलना में काफी बढ़ चुकी हैं। वहीं, अनुपात कम होने का मतलब होता है कि सोने के मुकाबले शेयर अपेक्षाकृत सस्ते मिल रहे हैं। एक्सपर्ट इस संकेतक का इस्तेमाल यह समझने के लिए भी करते हैं कि पोर्टफोलियो में सोने और इक्विटी का संतुलन बढ़ाना चाहिए या घटाना।

इतिहास क्या कहता है?

बीते वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि जब यह अनुपात 4 से ऊपर गया, तब शेयरों ने सोने के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया था। इसके उलट, जब यह 2 से नीचे पहुंचा, तब सोना शेयरों से आगे निकल गया। लेकिन ऐसे ही स्तरों के बाद कई बार शेयर बाजार में लंबी तेजी भी देखने को मिली। यही वजह है कि मौजूदा स्तर को कई निवेशक और विश्लेषक खास नजर से देख रहे हैं।

क्या अब शेयरों में खरीदारी करनी चाहिए?

चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी विश्लेषक आमिर मकदा का कहना है कि निफ्टी गोल्ड रेश्यो हाल के निचले स्तर 1.55 से उभरकर करीब 1.70 तक पहुंच गया है। यह बताता है कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे फिर से शेयर बाजार की ओर लौट रहा है। उनके मुताबिक, 1.5 से 2 के बीच का स्तर पहले भी कई बार लंबी अवधि की तेजी से पहले देखा गया है। इसलिए शेयर अभी भी सोने के मुकाबले आकर्षक वैल्यूएशन पर माने जा सकते हैं। हालांकि, उनका कहना है कि नई बुल रन की पुष्टि तभी मानी जानी चाहिए, जब यह अनुपात 2.2 से 2.5 के ऊपर टिके और बाजार में व्यापक खरीदारी के साथ संस्थागत निवेशकों का मजबूत निवेश भी देखने को मिले।

सोने की तुलना में शेयर अब भी आकर्षक

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट अंटू एपेन थॉमस का कहना है कि निफ्टी-50 गोल्ड रेश्यो अभी करीब 1.9 पर है, जबकि इसका लॉन्ग टर्म एवरेज करीब 2.6 रहा है। उनके अनुसार, यह संकेत देता है कि सोने की तुलना में शेयर अब भी आकर्षक हैं। हालांकि, सोना पोर्टफोलियो में जोखिम कम करने का अहम साधन बना रहेगा, लेकिन कंपनियों की कमाई में सुधार और वैश्विक अनिश्चितताओं के कम होने से धीरे-धीरे इक्विटी में निवेश बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

किन स्तरों पर रखनी चाहिए नजर?

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट जिगर एस पटेल के अनुसार, Gold बनाम Nifty Ratio इस समय लॉन्ग टर्म के एक अहम सपोर्ट जोन के आसपास ट्रेड कर रहा है। उनका कहना है कि अगर यह अनुपात 0.15 से 0.20 के बीच रहता है, तो इसका मतलब होगा कि फिलहाल न तो सोने और न ही शेयरों को स्पष्ट बढ़त हासिल है। ऐसे में निवेशकों के लिए दोनों एसेट क्लास में संतुलित निवेश बनाए रखना बेहतर रहेगा। अगर यह अनुपात 0.20 के ऊपर निकलता है तो शेयरों का पलड़ा भारी हो सकता है। वहीं 0.15 से नीचे जाने पर सोना फिर से बेहतर परफॉर्म कर सकता है और बाजार का रुख अधिक डिफेंसिव हो सकता है। निफ्टी गोल्ड रेश्यो यह संकेत जरूर देता है कि भारतीय शेयर बाजार पहले के मुकाबले आकर्षक वैल्यूएशन पर है। लेकिन सिर्फ एक संकेतक के आधार पर पूरा निवेश करना सही रणनीति नहीं होगी।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

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