23 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Metal Stocks Crash: हिंदुस्तान कॉपर से टाटा स्टील तक… मेटल सेक्टर के हर शेयर में बिकवाली, जानिए वजह

Nifty Metal index: सोमवार को शेयर बाजार में गिरावट के साथ ही मेटल इंडेक्स में भी भारी तबाही देखने को मिली। मेटल का कोई भी शेयर हरे निशान में नहीं है।

2 min read
Google source verification
nifty metal crash 4 percent hindustan copper tata steel fall march 23

तीन महीने की बढ़त एक झटके में साफ। फोटो: एआइ

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में हर सेक्टर दबाव में है, लेकिन सबसे बुरा हाल मेटल सेक्टर का बना हुआ है। निफ्टी मेटल इंडेक्स 4.25 फीसदी गिरकर 10,927 पर आ गया और यह आज का सबसे बुरा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बना। ट्रंप का होर्मुज अल्टीमेटम, बढ़ता क्रूड, मजबूत डॉलर और जियोपॉलिटिकल रिस्क इन सभी के प्रभाव से मेटल शेयरों में गिरावट जारी है। मार्च में अब तक निफ्टी मेटल 10.8 फीसदी गिर चुका है और तीन महीने की अपनी बढ़ते को तोड़ने की राह पर है।

कौन से शेयर सबसे ज्यादा पिटे?

आज की गिरावट में हिंदुस्तान कॉपर सबसे ज्यादा 6.4 फीसदी टूटकर सबसे बड़ा लूजर बना। इसके बाद हिंदुस्तान जिंक, वेदांता, SAIL और NMDC इन सभी में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। वेदांता के शेयर आज इसलिए भी खास नजर में हैं क्योंकि आज बोर्ड मीटिंग में डिविडेंड पेआउट पर फैसला होना है। स्टील कंपनियों में टाटा स्टील, JSW स्टील और जिंदल स्टील भी 4.3 से 4.9 फीसदी के बीच गिरे। निफ्टी मेटल इंडेक्स के सभी शेयर आज लाल निशान में रहे, एक भी शेयर हरे में नहीं बचा।

मेटल शेयर गिरने के दो बड़े कारण

रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजित मिश्रा के मुताबिक दो बड़े कारण हैं। पहला सेक्टोरल रोटेशन यानी जो सेक्टर पहले से काफी चढ़ चुके थे उनसे पैसा निकलना शुरू हो गया है। एनर्जी, फार्मा और मेटल ये तीनों सेक्टर पहले आउटपरफॉर्म कर रहे थे और अब इनमें प्रॉफिट बुकिंग का दबाव है। दूसरा जियोपॉलिटिकल तनाव की वजह से डिमांड डिस्ट्रक्शन का डर यानी जंग लंबी खिंची तो ग्लोबल इकोनॉमी सुस्त पड़ेगी और मेटल की मांग घटेगी।

बोनान्जा के रिसर्च एनालिस्ट नितांत दारेकर ने साफ कहा कि आज की 4 फीसदी गिरावट पूरी तरह मैक्रोइकोनॉमिक और जियोपॉलिटिकल कहानी है। ट्रंप के वीकेंड अल्टीमेटम ने एशियाई बाजारों में रिस्क-ऑफ का माहौल बना दिया। बढ़ता क्रूड, मजबूत डॉलर और रिस्क अवर्जन इन तीनों ने फेरस और नॉन-फेरस दोनों तरह के मेटल शेयरों को एक साथ पीटा।

स्टील और एल्युमिनियम पर खास असर

ICICI Securities के मुताबिक स्टील कंपनियों के लिए यह संकट लंबा खिंच सकता है। स्टेनलेस स्टील मैन्युफैक्चरिंग प्रोपेन, LPG और नेचुरल गैस पर भारी निर्भर है। अगर गैस सप्लाई में 30-40 फीसदी की कटौती हुई तो क्रूड स्टील प्रोडक्शन में 2-3 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। हालांकि राहत की बात यह है कि भारत की एनर्जी मिक्स में कोयले का हिस्सा करीब 60 प्रतिशत है और गैस सिर्फ 6-7 प्रतिशत इसलिए डिमांड डिस्ट्रक्शन उतना नहीं होगा।

एल्युमिनियम की बात करें तो जेएम फाइनेंशियल के मुताबिक एल्युमिनियम की कीमतें फरवरी के 3,065 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अब 3,470 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई हैं। यह नियर-टर्म मार्जिन के लिए अच्छा है लेकिन अगर कीमतें इसी तरह ऊंची रहीं तो डिमांड पर असर पड़ सकता है।