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Modi-Putin Meet: डिफेंस और तेल से आगे बढ़े दोस्त रूस के साथ हमारे रिश्ते, परमाणु ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स और नौकरियों पर फोकस

Russia India Trade News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली में हुई बैठक में 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर जोर रहा। दोनों देशों ने उद्योग, परमाणु ऊर्जा, खाद, क्रिटिकल मिनरल्स और कुशल कामगारों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Sep 11, 2026

PM Modi Putin Meeting

नरेंद्र मोदी-व्लादिमीर पुतिन(फोटो-ANI)

PM Modi-Putin Meeting: भारत और रूस के रिश्ते अब सिर्फ रक्षा और तेल तक सीमित नहीं रह गए हैं। दोनों देश व्यापार, उद्योग, परमाणु ऊर्जा, खनिज और कुशल कामगारों जैसे नए सेक्टर्स में सहयोग बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में द्विपक्षीय वार्ता की है। यह मुलाकात BRICS शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले हुई। खास बात यह है कि फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब पुतिन रूस के बाहर किसी ब्रिक्स सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल हो रहे हैं।

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, दोनों नेताओं की बातचीत का सबसे बड़ा एजेंडा 2030 तक भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना रहा। मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार करीब 60 अरब डॉलर का है।

2030 तक 100 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य

भारत और रूस अब अगले चार वर्षों में व्यापार को करीब 40 अरब डॉलर और बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसके लिए दोनों देशों के बीच नए बाजार खोलने, कारोबार के नए मौके तलाशने और भारतीय उत्पादों की रूस के बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी एक दिन पहले इस लक्ष्य का जिक्र किया था। 10 सितंबर को नई दिल्ली में रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलिखानोव के साथ एक कार्यक्रम में गोयल ने कहा था कि करीब 60 अरब डॉलर के मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार को अगले चार वर्षों में 100 अरब डॉलर तक ले जाने के लिए लगातार दोहरे अंकों की सालाना ग्रोथ जरूरी होगी। गोयल के मुताबिक दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की ओर से तय किए गए लक्ष्य भारत और रूस की सरकारों के साथ-साथ कारोबार जगत के प्रदर्शन का भी पैमाना होंगे।

बढ़ेगा औद्योगिक सहयोग

भारत और रूस के बीच औद्योगिक सहयोग भी बातचीत का अहम हिस्सा रहा। नई दिल्ली में शुरू हुआ INNOPROM ट्रेड फेयर दोनों देशों की कंपनियों को साथ लाने और नए कारोबारी समझौते के लिए बड़ा मंच बन रहा है। दोनों पक्ष रेलवे और सुरंग निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार कर रहे हैं। इसके अलावा स्टील वैल्यू चेन को मजबूत करने, दोनों देशों की कंपनियों के बीच ज्यादा कारोबारी साझेदारी बनाने और रूस के बाजार में भारतीय सामान की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर है। यानी आने वाले समय में भारत-रूस कारोबार का दायरा कुछ पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ सकता है।

परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने की तैयारी

परमाणु ऊर्जा भी दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी का एक बड़ा हिस्सा बन सकती है। एएनआई के अनुसार, बातचीत में नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। इसमें परमाणु ईंधन चक्र से जुड़े अलग-अलग चरणों में सहयोग और परमाणु परियोजनाओं को लंबे समय तक तकनीकी व अन्य सहायता देने जैसे मुद्दे शामिल हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है। ऐसे में रूस के साथ यह सहयोग आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण हो सकता है।

रूस में भारतीय कुशल कामगारों के लिए बढ़ेंगे मौके

भारत और रूस के बीच कुशल कामगारों की आवाजाही बढ़ाने पर भी बात हुई। रूस में अलग-अलग क्षेत्रों में कर्मचारियों की जरूरत को देखते हुए भारत से ज्यादा संख्या में प्रशिक्षित और कुशल कामगारों को वहां भेजने के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। अगर यह व्यवस्था आगे बढ़ती है, तो भारतीय इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और दूसरे पेशेवरों के लिए रूस में रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।

क्रिटिकल मिनरल्स पर भी नजर

आज की अर्थव्यवस्था में लिथियम, निकेल, कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर और कई रणनीतिक उद्योगों के लिए इन खनिजों की जरूरत होती है। इसी वजह से भारत और रूस के बीच क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग भी चर्चा का हिस्सा रहा। दोनों देश रणनीतिक उद्योगों के लिए सप्लाई चेन को मजबूत करने में इस क्षेत्र को अहम मान रहे हैं।

खाद की सप्लाई भी अहम मुद्दा

भारत और रूस के आर्थिक रिश्तों में उर्वरक यानी खाद का कारोबार भी काफी महत्वपूर्ण है। किसानों के लिए खाद की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिहाज से रूस के साथ सहयोग भारत के लिए अहम है। दोनों देशों के बीच खाद की सप्लाई को बनाए रखने और इसे आगे बढ़ाने पर जोर है। इसके लिए रणनीतिक जॉइंट वेंचर प्रोजेक्ट पर भी काम किया जा सकता है।

तीन दिन के भारत दौरे पर आए पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को तीन दिन के भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया। अपने दौरे के दौरान पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही भारत और रूस के बीच व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है। पुतिन के साथ रूस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।

रक्षा और तेल से आगे बढ़ रहे भारत-रूस के रिश्ते

मोदी-पुतिन की ताजा बातचीत से एक बात साफ है कि भारत और रूस अब अपने पुराने रिश्तों को नए सेक्टर्स तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। तेल और डिफेंस जैसे पारंपरिक सेक्टर्स के साथ अब व्यापार, उद्योग, परमाणु ऊर्जा, खाद, क्रिटिकल मिनरल्स और कुशल कामगारों पर भी फोकस बढ़ रहा है।