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NSE IPO में क्या है प्राइस बैंड, GMP और लॉन्च की तारीख? इन 10 पॉइंट्स में जानिए सारी जरूरी डिटेल

National Stock Exchange IPO: एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये तय किया है। IPO का आकार घटकर करीब 22,662 करोड़ रुपये रह गया है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Sep 11, 2026

NSE IPO

एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा। (PC: AI)

NSE IPO Price Band: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई आखिरकार शेयर बाजार में लिस्ट होने जा रहा है। एनएसई का बहुप्रतीक्षित आईपीओ 17 सितंबर से निवेशकों के लिए खुल जाएगा। कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया है। आईपीओ से करीब 22,662 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। हालांकि, इश्यू का आकार पहले के अनुमानों से कम हो गया है। यही वजह है कि एनएसई अब भारत के सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड अपने नाम नहीं कर पाएगा।

ग्रे मार्केट में भी एनएसई के शेयरों को लेकर माहौल गर्म है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आईपीओ से पहले अनलिस्टेड शेयर करीब 190 से 222 रुपये के प्रीमियम पर कारोबार करते दिख रहे हैं। यानी मौजूदा आईपीओ कीमत के मुकाबले करीब 11 से 12% का जीएमपी बनता दिख रहा है।

निवेशकों के लिए NSE IPO से जुड़ी 10 जरूरी बातें जानना जरूरी हैं:

  1. कब खुलेगा NSE IPO?

एनएसई का IPO 17 सितंबर 2026, गुरुवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। निवेशक इसमें 21 सितंबर, सोमवार तक बोली लगा सकेंगे। इससे एक दिन पहले यानी 16 सितंबर को आईपीओ एंकर निवेशकों के लिए खुलेगा। एनएसई के शेयर की लिस्टिंग 24 सितंबर को होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि एनएसई की लिस्टिंग उसके पुराने प्रतिद्वंद्वी BSE पर होगी।

  1. IPO में क्या बिकेगा?

एनएसई के आईपीओ में कोई नया शेयर जारी नहीं किया जा रहा है। पूरा इश्यू Offer for Sale यानी OFS होगा। कंपनी के मौजूदा शेयरधारक करीब 12.64 करोड़ शेयर बेचेंगे। इनमें SBI, Canada Pension Plan Investment Board, Aranda Investments, MS Strategic Mauritius, New India Assurance, SBI Capital Markets, Bank of Baroda सहित कई संस्थाएं शामिल हैं। इसका सीधा मतलब है कि आईपीओ से मिलने वाला पैसा एनएसई के पास नहीं जाएगा। पूरी रकम उन मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी जो अपने शेयर बेच रहे हैं।

  1. कितना है NSE IPO का प्राइस बैंड?

एनएसई ने एक शेयर की कीमत 1,700 से 1,785 रुपये के बीच तय की है। प्रत्येक शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। ऊपरी प्राइस बैंड यानी 1,785 रुपये के हिसाब से IPO का मूल्य करीब 22,562 करोड़ रुपये बैठता है। इस कीमत पर एनएसई का संभावित मार्केट कैप करीब 4.41 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। आईपीओ में हिस्सा लेने वाले पात्र कर्मचारियों को प्रति शेयर 170 रुपये की छूट मिलेगी।

  1. ग्रे मार्केट में NSE का GMP कितना है?

एनएसई आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में भी हलचल तेज है। आईपीओ की कीमत तय होने के बाद अनलिस्टेड एनएसई शेयर करीब 190 से 222 रुपये ऊपर कारोबार करते नजर आए। इस हिसाब से ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP करीब 11-12% है। हालांकि, यहां निवेशकों को एक बात समझनी चाहिए। जीएमपी अनौपचारिक बाजार का संकेत है। इसे एनएसई शेयर की लिस्टिंग का पक्का अनुमान नहीं माना जा सकता।

  1. एक लॉट में कितने शेयर?

रिटेल निवेशकों के लिए एनएसई आईपीओ का लॉट साइज 8 शेयर रखा गया है। ऊपरी प्राइस बैंड 1,785 रुपये के हिसाब से एक लॉट के लिए निवेशक को कम से कम 14,280 रुपये लगाने होंगे। इसके बाद भी निवेश करना है तो 8 शेयर के गुणक में बोली लगानी होगी।

  1. रिटेल निवेशकों के लिए कितना हिस्सा?

एनएसई आईपीओ में रिटेल निवेशकों के लिए 35% हिस्सा रखा गया है। वहीं, योग्य संस्थागत खरीदारों यानी QIB के लिए 50% हिस्सा आरक्षित है। बचा हुआ हिस्सा गैर-संस्थागत निवेशकों यानी NII के लिए उपलब्ध रहेगा।

  1. NSE का कारोबार कितना बड़ा है?

एनएसई भारत के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा कारोबार वाले स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल है। खासकर कैश मार्केट और इक्विटी डेरिवेटिव्स में इसका दबदबा काफी मजबूत है। तकनीक के इस्तेमाल और तेज ट्रेडिंग सिस्टम द्वारा भारतीय शेयर बाजार को आम निवेशकों तक पहुंचाने में NSE ने बड़ी भूमिका निभाई है।

  1. NSE की कमाई कैसी है?

एनएसई ने जून तिमाही में अच्छा परफॉर्म किया है। कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 7% बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कंपनी की कुल आय भी करीब 9% बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। हालांकि, एनएसई के कारोबार में एक जोखिम भी है। कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से जुड़ा है। फ्यूचर्स और ऑप्शंस यानी F&O में कारोबार की मात्रा में बदलाव का सीधा असर एनएसई की कमाई पर पड़ सकता है। इसके अलावा बाजार के नियमों में बदलाव होने पर भी डेरिवेटिव्स कारोबार प्रभावित हो सकता है।

  1. NSE IPO में इतनी देर क्यों हुई?

एनएसई की लिस्टिंग की कहानी नई नहीं है। इसकी शुरुआत करीब एक दशक पहले हुई थी। दिसंबर 2016 में एनएसई ने पहली बार करीब 10,000 करोड़ रुपये के IPO के लिए DRHP दाखिल किया था। लेकिन इसके बाद को-लोकेशन मामले के चलते आईपीओ की योजना अटक गई। कानूनी और नियामकीय मामलों के कारण लिस्टिंग की राह लंबी होती चली गई। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने को-लोकेशन मामले में एनएसई के खिलाफ सेबी की अपील खारिज कर दी। इससे एक्सचेंज की लिस्टिंग से जुड़ी बड़ी नियामकीय अड़चन दूर हुई। इसी महीने बाजार नियामक SEBI ने NSE के ड्राफ्ट ऑफर प्लान को भी मंजूरी दे दी।

  1. निवेशकों को कितना डिविडेंड देती है NSE?

एनएसई की मजबूत कमाई का फायदा उसके शेयरधारकों को भी मिला है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026, दोनों में 35 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया। वहीं, वित्त वर्ष 2024 में बोनस एडजस्टमेंट के आधार पर डिविडेंड 18 रुपये प्रति शेयर रहा था। एनएसई कैश मार्केट टर्नओवर और इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर के मामले में भारत का प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज है। इसकी मजबूत कमाई और लगातार डिविडेंड भुगतान निवेशकों के लिए IPO की एक अहम खासियत मानी जा रही है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

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