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लाइसेंस रद्द, फिर भी Shree Mahalaxmi Urban Co-operative Credit Bank के 97.9% ग्राहकों को मिलेगा पूरा पैसा, जानिए क्या है DICGC स्कीम

Bank Licence Cancelled: कर्नाटक बेस्ड श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक का लाइसेंस RBI ने रद्द कर दिया है। बैंक की वित्तीय स्थिति कमजोर होने और नियामकीय नियमों का पालन नहीं करने के कारण यह कार्रवाई हुई।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Jun 19, 2026

Shree Mahalaxmi Urban Co-operative Credit Bank

RBI ने कर्नाटक बेस्ड श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। (PC: AI)

Shree Mahalaxmi Urban Co-operative Credit Bank: कर्नाटक बेस्ड श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक के खाताधाकरक इस समय काफी चिंता में हैं। आरबीआई ने इस बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। ऐसे में लोगों को लग रहा है कि उनका पैसा डूब गया। लेकिन ऐसा नहीं है। आरबीआई के अनुसार, बैंक के 97.9 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनका पूरा पैसा वापस मिल जाएगा। ऐसा DICGC योजना के चलते होगा। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि यह योजना क्या है और कैसे काम करती है।

RBI ने क्यों रद्द किया बैंक का लाइसेंस?

बैंक की वित्तीय हालत लगातार खराब होती जा रही थी, जिसके बाद केंद्रीय बैंक को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। आरबीआई ने बयान जारी कर कहा कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं बची है और भविष्य में कमाई की संभावनाएं भी बेहद कमजोर हैं। साथ ही बैंक कुछ जरूरी नियामकीय नियमों का पालन भी नहीं कर पा रहा था। ऐसे में बैंक का संचालन जारी रखना जमाकर्ताओं के हित में नहीं माना गया। RBI ने कहा कि मौजूदा वित्तीय स्थिति में बैंक अपने सभी जमाकर्ताओं का पैसा पूरी तरह लौटाने की स्थिति में नहीं है।

अब बैंक नहीं कर सकेगा कोई बैंकिंग काम

लाइसेंस रद्द होने के बाद श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक पर तत्काल प्रभाव से बैंकिंग गतिविधियों पर रोक लग गई है। इसका मतलब है कि बैंक अब नई जमा राशि स्वीकार नहीं कर सकेगा और न ही सामान्य बैंकिंग सेवाएं दे पाएगा। यानी खाताधारक बैंक से अपना पैसा अभी नहीं निकाल पाएंगे।

बैंक को बंद करने की प्रक्रिया हुई शुरू

रिजर्व बैंक ने कर्नाटक के रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज से बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। इसके तहत बैंक के लिए एक लिक्विडेटर नियुक्त किया जाएगा, जो परिसंपत्तियों और देनदारियों का निपटारा करेगा।

जमाकर्ताओं के पैसे का क्या होगा?

राहत की बात यह है कि अधिकांश ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रहने की उम्मीद है। RBI के अनुसार, बैंक के करीब 97.9 प्रतिशत जमाकर्ताओं को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के माध्यम से उनकी पूरी जमा राशि वापस मिल जाएगी। DICGC बैंक जमा पर तय सीमा तक बीमा सुरक्षा प्रदान करता है। बैंक की लिक्विडिशन प्रक्रिया के दौरान पात्र जमाकर्ताओं को इसी व्यवस्था के तहत भुगतान किया जाएगा। आइए इस DICGC स्कीम के बारे में विस्तार से जानते हैं।

DICGC के तहत किन बैंकों का बीमा होता है?

आरबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत में काम कर रहे सभी वाणिज्यिक बैंक, विदेशी बैंकों की भारतीय शाखाएं, लोकल एरिया बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) DICGC बीमा के दायरे में आते हैं। इसके अलावा, सभी राज्य सहकारी बैंक, केंद्रीय सहकारी बैंक और प्राथमिक सहकारी बैंक (जिन्हें अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक भी कहा जाता है) DICGC के तहत कवर होते हैं। यानी देश के सभी सहकारी बैंक इस बीमा योजना के अंतर्गत आते हैं। हालांकि, प्राथमिक सहकारी समितियां (Primary Co-operative Societies) इस बीमा के तहत कवर नहीं होतीं।

DICGC किन जमा राशियों का बीमा करता है?

DICGC बचत खाता, फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी , चालू खाता, आरडी समेत लगभग सभी प्रकार की जमा राशियों का बीमा करता है।

कौन-सी जमा राशियां इस बीमा के दायरे में नहीं आती हैं?

  • विदेशी सरकारों की जमा राशि
  • केंद्र या राज्य सरकारों की जमा राशि
  • इंटर बैंक डिपॉजिट
  • राज्य भूमि विकास बैंकों की राज्य सहकारी बैंक में जमा राशि
  • भारत के बाहर प्राप्त या देय जमा राशि
  • RBI की पूर्व मंजूरी से DICGC द्वारा विशेष रूप से छूट दी गई राशि

अधिकतम कितनी राशि का इंश्योरेंस होता है?

एक बैंक में किसी जमाकर्ता की मूल राशि (Principal) और उस पर मिलने वाले ब्याज (Interest) को मिलाकर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा मिलता है। यानी किसी भी बैंक का लाइसेंस रद्द होता है, लिक्विडिशन होता है या विलय/पुनर्गठन होता है, तो ग्राहकों की उस बैंक में जमा 5 लाख रुपये तक की रकम सुरक्षित होती है और इस बीमा कवर से वापस मिल जाती है।

एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में जमा राशि पर बीमा लिमिट क्या होगी?

यदि किसी व्यक्ति की जमा राशि एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में है, तो सभी खातों की राशि को जोड़कर बीमा कवर तय किया जाता है। ऐसी स्थिति में अधिकतम 5 लाख रुपये तक का ही बीमा मिलेगा।

क्या अलग-अलग बैंकों में जमा राशि पर अलग-अलग बीमा मिलता है?

हां। यदि किसी व्यक्ति के कई बैंकों में खाते हैं, तो प्रत्येक बैंक में जमा राशि पर 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर उपलब्ध होगा। यानी हर अलग बैंक में 5 लाख रुपये तक की जमा पर बीमा कवर रहेगा।