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Real Estate News: प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में जमकर हो रहा कैश का इस्तेमाल, रिश्वत का भी है बोलबाला, सर्वे में सामने आया सच

Real Estate News: रियल एस्टेट सेक्टर में अभी भी कैश का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। एक सर्वे के अनुसार, करीब 66% प्रॉपर्टी खरीदारी कैश में कीमत चुका रहे हैं।
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भारत

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Pawan Jayaswal

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Mohammad Hamid

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Updated: 8 Nov 2025, 4:46 PM IST

Real Estate News

प्रॉपर्टी की खरीद बिक्री में कैश का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। (PC: Freepik)

Real Estate News: जब नोटबंदी लागू हुई थी, तो ये दावा किया गया था कि रियल एस्टेट में कैश का इस्तेमाल काफी कम हो जाएगा, लेकिन हकीकत यह है कि भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में आज भी कैश का इस्तेमाल काफी अधिक होता है। लोकलसर्किल्स (LocalCircles) का एक सर्वे बताता है कि पिछले तीन वर्षों में संपत्ति खरीदने वाले तीन में से दो नागरिकों या लगभग 66% ने लेनदेन मूल्य का एक हिस्सा कैश में चुकाने की बात मानी है।

LocalCircles का ये सर्वे 301 जिलों के 39,000 से अधिक नागरिकों के साथ किया गया, जिसमें प्रॉपर्टी खरीदने की प्रक्रिया में काले धन के इस्तेमाल और कथित भ्रष्टाचार की परतें खोली गईं हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि इसमें शामिल नकदी की मात्रा एक तय सीमा से काफी ज्यादा है।

कितना पैसा कैश में दिया?

अब सवाल यह है कि लोगों ने प्रॉपर्टी की कीमत का कितना पैसा कैश में दिया। सर्वे में इस पर भी चौंकाने वाली बात सामने आई है। इस सर्वे में भाग लेने वाले लोगों में से एक-चौथाई से ज्यादा ने या 26% ने प्रॉपर्टी की आधी से ज्यादा रकम कैश में चुकाने की बात मानी है। यानी लोगों ने टैक्स और रजिस्ट्रेशन से बचने के लिए व्यापक रूप से प्रॉपर्टी की कीमत को कम दिखाया। यानी प्रॉपर्टी जितने में खरीदी गई, उतने में दिखाई नहीं गई, क्योंकि एक बड़ा हिस्सा कैश के रूप में दिया गया।

सर्वे के मुताबिक बाकी 19% ने कुल वैल्यू का 30% से 50% कैश में भुगतान किया है। काले धन के अलावा, सर्वे रेगुलेटरी सिस्टम में कथित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है। लोकलसर्किल्स के अनुसार, चौंकाने वाली बात यह है कि 44% संपत्ति खरीदारों ने खरीद प्रक्रिया के दौरान तीन या अधिक एजेंसियों या व्यक्तियों को "रिश्वत" देने की पुष्टि की है। इस सर्वे से पता चलता है कि इस समस्या की जड़ें रेगुलेटरी टकराव और टैक्स चोरी के मकसद में काफी गहरे तक गई हैं, जिसके कारण गुप्त लेनदेन में काफी इजाफा हुआ है।

रियल एस्टेट में कैश अब भी किंग

संसद में शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 465 सर्वेक्षण अभियानों के जरिए 30,444 करोड़ रुपये की अघोषित आय या काले धन का पता लगाया है। लोकलसर्किल्स का कहना है कि महानगरों में बिल्डर से फ्लैट खरीदने में भले ही नकदी का इस्तेमाल कम हुआ हो, लेकिन जमीन और प्लॉट के लेन-देन या पुरानी पारिवारिक संपत्तियों के लेन-देन में यह अभी भी पूरी तरह से बरकरार है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि काले धन को खत्म करने के उद्देश्य से की गई नोटबंदी के नौ साल बाद भी रियल एस्टेट सौदों में नकद लेन-देन जारी है।

रियल एस्टेट में सरकारी भ्रष्टाचार और रिश्वत

नए प्रोजेक्ट्स में डिजिटल सुधारों के कारण मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में कैश लेनदेन में कुछ गिरावट देखी जा सकती है, लेकिन छोटे शहर गैर-पारदर्शी लेनदेन के केंद्र बने हुए हैं। अगर इसको एक लाइन में कहा जाए तो नोटबंदी के नौ साल बाद भी काला धन भारत के रियल एस्टेट सेक्टर को चलाने वाली अघोषित मुद्रा बनी हुई है। डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखने, डिजिटल भुगतान के माध्यम से पारदर्शिता को बढ़ावा देने और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए आधार को संपत्ति से जोड़ने की सरकारी पहल के बावजूद, काला धन अभी भी इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रहा है।

कई जगह देनी पड़ती है रिश्वत

सर्वे में भाग लेने वाले 44% लोगों ने संपत्ति की बिक्री में तेजी लाने के लिए तीन या उससे ज़्यादा एजेंसियों और व्यक्तियों को रिश्वत देने का दावा किया है। स्थानीय राजस्व या तहसील कार्यालय में पटवारी से लेकर रेवेन्यू इंस्पेक्टर तक, उप-पंजीयक कार्यालय से लेकर स्थानीय नगरपालिका और भूमि सर्वेक्षण कार्यालयों में क्लर्क, टाइपिस्ट और डीड राइटर तक, जमीन बेचने वाले किसी भी व्यक्ति को कई लोगों को रिश्वत देनी पड़ती है।