
चीनी कंपनियों के शेयरों में तेजी आई है। (PC: File Photo)
Sugar Stocks Rise: चीनी कंपनियों के शेयरों में सोमवार को जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के भाव बढ़ने, त्योहारी सीजन में मांग मजबूत रहने की उम्मीद और सप्लाई को लेकर बने नए समीकरणों से निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर में बढ़ा है। यही वजह है कि कारोबार के दौरान चीनी कंपनियों के कई शेयरों में 12 फीसदी तक की तेजी आई।
सोमवार यानी 31 अगस्त को बलरामपुर चीनी मिल्स (Balrampur Chini Mills) सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयरों में रहा। कंपनी का शेयर एनएसई पर 12 बजकर 28 मिनट पर 12.50 फीसदी उछलकर 736.70 रुपये पर जा पहुंचा। इसके अलावा Shree Renuka Sugars का शेयर 6.67 फीसदी और Dalmia Bharat Sugar and Industries का शेयर 6.63 फीसदी मजबूत हुआ। Triveni Engineering & Industries और Mawana Sugars के शेयर भी करीब 5 फीसदी तक ऊपर गए।
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह चीनी की कीमतों में आया उछाल है। घरेलू बाजार के साथ वैश्विक स्तर पर भी चीनी के भाव मजबूत हुए हैं। इससे चीनी मिलों को अपनी बिक्री पर बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। दूसरी तरफ आने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। उत्पादन कम रहने और बाजार में उपलब्ध स्टॉक घटने की आशंका ने भी इस सेक्टर को सपोर्ट दिया है। यानी बाजार में फिलहाल मांग और सप्लाई का समीकरण चीनी कंपनियों के पक्ष में जाता दिख रहा है।
सरकार ने शुक्रवार को कहा था कि खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में नरमी के संकेत दिखने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में मिल स्तर यानी एक्स-मिल कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, सरकार सप्लाई को लेकर किसी तरह की गड़बड़ी नहीं चाहती। इसलिए चीनी मिलों को हर पखवाड़े यानी 15 दिन में बिक्री का कोटा दिया जाएगा। यह व्यवस्था सितंबर से शुरू होगी।
अभी खाद्य मंत्रालय चीनी मिलों के लिए हर महीने बिक्री का कोटा तय करता है। सरकार का कहना है कि वह देशभर में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रख रही है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है।
एसएमसी ग्लोबल सिक्यूरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव के मुताबिक, स्टॉक होल्डिंग पर सख्ती के बावजूद चीनी शेयरों में तेजी यह संकेत देती है कि निवेशक इस सेक्टर को अब सिर्फ पारंपरिक चीनी कारोबार के नजरिए से नहीं देख रहे हैं। पहले चीनी कंपनियों को काफी हद तक एक ऐसे कारोबार के रूप में देखा जाता था, जिसमें कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव रहता है। कभी चीनी के भाव गिर जाते हैं, कभी किसानों के भुगतान में देरी होती है और कभी मिलों के पास जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा हो जाता है। इन वजहों से कंपनियों की कमाई पर दबाव आता रहा है। लेकिन अब तस्वीर कुछ बदल रही है।
चीनी मिलें अब गन्ने के इस्तेमाल को सिर्फ चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रख रही हैं। सरकार की नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी के तहत एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। गन्ने से बनने वाले अतिरिक्त उत्पाद को एथेनॉल में बदलने से चीनी मिलों को कमाई का एक और जरिया मिला है। तेल कंपनियां भी एथेनॉल की खरीद करती हैं, जिससे मिलों को एक तय बाजार मिलता है। यही बदलाव इस सेक्टर की कमाई को पहले के मुकाबले ज्यादा डायवर्सिफाई बना रहा है। श्रीवास्तव के अनुसार, लॉन्ग टर्म में ऐसी कंपनियों को ज्यादा फायदा हो सकता है जिनके पास चीनी के साथ-साथ मजबूत डिस्टिलरी कैपेसिटी भी है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, चीनी शेयरों में तेजी के बावजूद जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। मौसम का असर गन्ने की पैदावार पर पड़ सकता है। इसके अलावा सरकार समय-समय पर एक्सपोर्ट कोटा, न्यूनतम बिक्री कीमत और दूसरे नियमों में बदलाव करती रहती है। इससे शेयरों में अचानक उतार-चढ़ाव आ सकता है। फिर भी बाजार की नजर अब चीनी कंपनियों के बदलते बिजनेस मॉडल पर है। अगर एथेनॉल और ग्रीन एनर्जी से कमाई लगातार बढ़ती है, तो चीनी कंपनियों को सिर्फ एक कमोडिटी बिजनेस के तौर पर देखने का नजरिया बदल सकता है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Updated on:
31 Aug 2026 03:21 pm
Published on:
31 Aug 2026 03:15 pm
