31 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Subhash Chandra की मुश्किलें नहीं हो रहीं कम, 6.5 करोड़ के रिपेमेंट प्लान को बैंकों ने दी चुनौती, NCLAT करेगा सुनवाई

Subhash Chandra Loan Case: सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान के खिलाफ LIC Housing Finance और कई बैंकों ने NCLAT का रुख किया है। NCLT ने 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले 6.25 करोड़ रुपये की भुगतान योजना मंजूर की थी।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Pawan Jayaswal

Aug 31, 2026

Subhash Chandra Insolvency

कर्जदाताओं ने NCLT के फैसले को चुनौती दी है। (फोटो: @e4mtweets / X Post)

Subhash Chandra Insolvency: जी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं। कर्जदाताओं ने उनके रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने वाले NCLT के फैसले को चुनौती देने के लिए NCLAT का दरवाजा खटखटाया है। मामले की तत्काल सुनवाई की मांग को मंजूर करते हुए एनसीएलएटी ने मंगलवार, 1 सितंबर को सुबह 10 बजे सुनवाई तय की है। इस मामले में एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और कुछ बैंकों ने अपील दायर की है। कर्जदाताओं की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को एनसीएलएटी से मामले की जल्द सुनवाई की अपील की थी।

22,006 करोड़ रुपये के क्लेम के बदले 6.25 करोड़ का भुगतान

विवाद की जड़ में एनसीएलटी का 25 अगस्त का फैसला है। एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा की ओर से पेश किए गए रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी थी। इसके तहत कर्जदाताओं को 6.25 करोड़ रुपये और इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के खर्च के लिए 25 लाख रुपये दिए जाने हैं। दिलचस्प बात यह है कि चंद्रा के खिलाफ स्वीकार किए गए दावों की कुल रकम करीब 22,006.57 करोड़ रुपये है। यही वजह है कि कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। यह मामला उन व्यक्तिगत गारंटियों से जुड़ा है, जो सुभाष चंद्रा ने Essel Group से जुड़ी कंपनियों की ओर से लिए गए कर्ज के लिए दी थीं।

कर्जदाताओं ने किस आधार पर NCLT के फैसले को चुनौती दी?

आपत्ति करने वाले बैंकों का कहना है कि पांच संस्थाएं सुभाष चंद्रा से जुड़ी हुई थीं और उन्हें रिपेमेंट प्लान पर वोट करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। एनसीएलटी के 144 पन्नों के आदेश के मुताबिक, इन पांच संस्थाओं के वोटों की वजह से रिपेमेंट प्लान को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स यानी CoC में कुल 80.814 फीसदी मंजूरी मिली। जिन पांच संस्थाओं पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें Veena Investments Pvt Ltd, Direct Media Distribution Ventures Pvt Ltd, World Crest Advisors LLP, Lemonade Capital Advisors LLP और Corpcall Capital Advisors LLP शामिल हैं।

एचडीएफसी बैंक और आईडीबीआई ट्रस्टशिप सर्विसेज की अगुवाई में फैसले से असहमति जताने वाले कर्जदाताओं का तर्क है कि ये पांचों संस्थाएं Insolvency and Bankruptcy Code यानी IBC के तहत 'एसोसिएट्स' की कैटेगरी में आती हैं। इसलिए इनके वोटों को नहीं गिना जाना चाहिए था।

केनरा बैंक से लेकर LIC हाउसिंग तक, कई कर्जदाता नाराज

एचडीएफसी बैंक के पास कुल दावों का करीब 3.2 फीसदी हिस्सा है। बैंक ने पहले ही रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था और एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ अपील पर विचार कर रहा था। केनरा बैंक भी एनसीएलटी जाने की बात कह चुका है। बैंक के पास करीब 1.60 फीसदी वोटिंग शेयर था और उसने रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था। केनरा बैंक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि उसने फॉरेंसिक ऑडिट की मांग भी की थी। हालांकि, कम वोटिंग शेयर होने के कारण उसकी यह मांग स्वीकार नहीं की गई। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UK) ने भी कहा है कि उसने इस प्लान को खारिज किया था और कहा था कि एनसीएलटी के फैसले को तुरंत NCLAT में चुनौती देगा। वहीं, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कहा था कि वह दूसरे सरकारी वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर अपील दाखिल करेगी।

सुभाष चंद्रा का क्या कहना है?

सुभाष चंद्रा ने भी इस पूरे विवाद पर अपनी बात रखी है। गुरुवार को जारी एक सार्वजनिक बयान में उन्होंने 22,000 करोड़ रुपये की रकम को उनका व्यक्तिगत कर्ज बताए जाने पर आपत्ति जताई। चंद्रा के मुताबिक, यह रकम वह पैसा नहीं है जो उन्होंने खुद उधार लिया था। यह उन कॉरपोरेट कर्जों से जुड़े दावे हैं, जिनके लिए उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि रिपेमेंट प्लान का विरोध करने वाले कर्जदाताओं के दावे करीब 3,992 करोड़ रुपये के हैं, न कि 22,000 करोड़ रुपये के। चंद्रा ने कहा कि ग्रुप अपनी बकाया देनदारियों को निपटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

99.97 फीसदी 'हेयरकट' पर भी उठे सवाल

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा 22,000 करोड़ से ज्यादा के दावों और सिर्फ 6.25 करोड़ की वसूली को लेकर हो रही है। कुछ रिपोर्टों में इसे करीब 99.97 फीसदी का हेयरकट बताया गया है। लाइव मिंट की एक रिपोर्ट में सरकारी नोट के हवाले से बताया गया कि 22,006 करोड़ की रकम सुभाष चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज की रकम नहीं है। यह उन कर्जों के संबंध में उनके खिलाफ स्वीकार किए गए दावे हैं, जिनमें उन्होंने Essel और Zee से जुड़ी कंपनियों के लिए व्यक्तिगत गारंटर की भूमिका निभाई थी।

अब NCLAT पर टिकी नजर

अब इस मामले में अगला बड़ा पड़ाव NCLAT की मंगलवार सुबह होने वाली सुनवाई है। कर्जदाताओं ने रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देने की प्रक्रिया और कुछ संस्थाओं के वोटों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किये हैं। ऐसे में एनसीएलएटी का रुख यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि एनसीएलटी से मंजूर हुआ रिपेमेंट प्लान आगे किस तरह बढ़ेगा।