28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जनता कोरोना की गंभीरता को समझे, लॉकडाउन का लगातार विस्तार संभव नहीं: मुख्यमंत्री

कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार द्वारा जारी लॉकडाउन से आम लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। रोज कमाओं
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

चेन्नई

•

image

Vishal Kesharwani

•

Updated: 1 Jun 2021, 1:43 PM IST

जनता कोरोना की गंभीरता को समझे, लॉकडाउन का लगातार विस्तार संभव नहीं: मुख्यमंत्री

जनता कोरोना की गंभीरता को समझे, लॉकडाउन का लगातार विस्तार संभव नहीं: मुख्यमंत्री


-प्रोटोकॉल का सख्ती से पालत होता तो सादय दूसरी लहर आती ही नहीं
चेन्नई. कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार द्वारा जारी लॉकडाउन से आम लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। रोज कमाओं और रोज खाओं वालों पर इसका काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। वहीं अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। जनता की भलाई को देखते हुए सरकार ने लॉकडाउन तो किया है, लेकिन इसको लगातार विकल्प बना कर चलना संभव नहीं होगा। राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को कहा कि वर्तमान में जारी लॉकडाउन का लगातार विस्तार करना संभव नहीं हो सकता है, इसलिए कोरोना पर नियंत्रण करने के लिए राज्य की जनता को अपना सहयोग प्रदान करना चाहिए।

सरकार लगातार लॉकडाउन का विस्तार नहीं कर सकती है और जल्द ही इसे पूरी तरह से खत्म किया जाएगा। एक वीडियो संदेश में स्टालिन ने कहा लॉकडाउन के बावजूद जनता के बिना सहयोग से कोरोना पर नियंत्रण करना संभव नहीं होगा। कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने के बाद ही इसके प्रसार को रोक जा पाएगा। पूर्ण लॉकडाउन के परिणाम स्वरूप चेन्नई समेत राज्य के कुछ अन्य जिलों में कोरोना के नए मामलों में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। लॉकडाउन से पहले चेन्नई में दैनिक आधार पर 7 हजार के आसपास नए मामले दर्ज हो रहे थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से 2 हजार के आसपास मामले आ रहे हैं। अगले कुछ दिनों में यह संख्या और कम हो जाएगी। कोयम्बत्तूर समेत पश्चिमी क्षेत्रों में मामले बढ़ रहे थे, लेकिन पिछले दो दिनों से वहां के मामलों में भी कमी आ रही है।


-बेड पर्याप्त रूप से हैं उपलब्धत
स्टालिन ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए अथक प्रयासों से अब मरीजों को बेड के लिए इधर उधर भटकना नहीं पड़ रहा है। इसके अलावा ऑक्सीजन की समस्या भी अब नहीं है। सच तो यह है कि कई अस्पतालों में कोरोना के बेड खाली पड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा भी अगर लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन किया गया तो इसका पूरा परिणाम नहीं मिल पाएगा। पहली लहर में अगर लोग सख्ती से प्रोटोकॉल का पालन करते तो सायद दूसरी लहर का सामना ही ना करना पड़ता। जनता को यह महसूस होना चाहिए कि कोरोना के प्रसार पर नियंत्रण करने का एक मात्र उपाय लॉकडाउन ही है। उन्होंने जनता से लॉकडाउन के दौरान संचालित हो रहे मोबाइल सब्जी दुकान और राशन दुकान का पूरी तरह से लाभ उठाने का आग्रह किया।


-लॉकडाउन से विभिन्न वर्गो की आजीविका हुई प्रभावित
स्टालिन ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से विभिन्न वर्ग के लोगों की आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हुई है। यही कारण है कि सरकार कोरोना वित्तीय मदद के तहत 4 हजार का वितरण कर लोगों की समस्या खत्म करने की कोशिश कर रही है। पहली किश्त के तहत 2 हजार का वितरण पूरा हो चुका है और जल्द ही दूसरी किश्त का वितरण शुरू होगा। राज्य सरकार के इस कदम की अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने सराहना भी की है। स्टालिन ने कहा कि पिछले तीन सप्ताह से राज्य सरकार राज्य के मेडिकल बुनियादी ढांचों में सुधार करने में लगी है।


-दैनिक आधार पर 3 लाख लोगों को दिया जा रहा वैक्सीन
स्टालिन ने कहा कि राज्य भर में दैनिक आधार पर 3 लाख लोगों को वैक्सीन दिया जा रहा है और 1.७ लाख लोगों का आरटीपीसीआर टेस्ट हो रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने कोयम्बत्तूर के इएसआई अस्पताल का दौरा कर पीपीई किट पहन कर मरीजों से मुलाकात की थी। इस प्रक्रिया को देखते हुए लोगों को और सतर्क होकर प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। प्रोटोकॉल का पालन करने पर मामले खत्म हो सकते हैं।