
Defense Expo 2018: 46 countries, 670 companies taking part
चेन्नई।केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया योजना के तहत हथियारों के ग्राहक से उत्पादक व निर्यातक बनने का लक्ष्य निर्धारित किए कांचीपुरम जिले के तिरुविडंदै में बुधवार को डिफेंस एक्सपो २०१८ की शुरुआत हुई। देश में रक्षा उत्पादन गलियारे के विकास पर फोकस कर रहे इस एक्सपो में कई रक्षा सौदों पर दस्तखत होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को इस १०वीं प्रदर्शनी को औपचारिक तौर पर खुली घोषित करेंगे। एक्सपो में बड़ी और छोटी हथियार व शस्त्र निर्माता कंपनियां हिस्सा ले रही हैं।
यहां आयोजित 10वीं डिफेंस एक्सपो के मीडिया सेंटर में बुधवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी मिसाइलों में कई देशों ने दिलचस्पी दिखाई है लेकिन वे उन देशों का यहां नाम सार्वजनिक नहीं कर सकतीं।
उन्होंने कहा कि भारत में निर्मित रक्षा उपकरणों के लिए विदेश में बाजार तलाशने की दिशा में यह एक्सपो एक प्रयास है। रक्षा उपकरणों की दृष्टि से अब तक भारत की भूमिका सबसे बड़े आयातक के रूप में थी लेकिन अब भारत रक्षा उपकरणों के निर्माण और निर्यात करने में सक्षम है इसीलिए यहां कई देशों को बुलाया गया है और वे इस प्रदर्शनी में हिस्सा लेकर अपनी-अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहे है।
४७ देश ले रहे भाग
भारत सरकार के संस्थान डीआरडीओ और उससे जुड़े लगभग 50 संस्थान इस प्रदर्शनी में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिफेंस एक्सपो के आठ संस्करण दिल्ली और 9वां संस्करण पिछले रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने गोवा में कराया था। अब 10वां संस्करण तमिलनाडु में आयोजित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा उद्योग की सबसे बड़ी धुरी तमिलनाडु को इस आयोजन के लिए चुना है।एक अनुमान के अनुसार भारत की आगामी ५ वर्षों में रक्षा उपकरणों की खरीदी पर 300 अरब डॉलर खर्च करने की योजना में है। दुनिया की लगभग सभी कंपनियों की नजरें इन सौदों पर हैं। एक्सपो में ४७ देशों की भागीदारी है और इस लिहाज से 154 विदेशी रक्षा उत्पादकों सहित 6 70 से ज्यादा रक्षा कंपनियां प्रदर्शनी में हिस्सा ले रही हैं।
Published on:
12 Apr 2018, 5:23 AM IST
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