27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

यह राह नहीं आसां बस इतना समझ लीजै!

- लोकसभा चुनाव को लेकर हो रहे गठबंधनशहर के चाय की दुकानों पर शुरू हुई चुनावी चर्चा
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

चेन्नई

•

image

Ashok Rajpurohit

•

Updated: 26 Feb 2019, 1:58 PM IST

चेन्नई. तमिलनाडु में लोकसभा चुनाव का आगाज हो चुका है। राज्य के दोनों द्रमुक दल डीएमके और एआईएडीएमके ने आगामी लोकसभा में जीत हासिल करने के लिए राष्ट्रीय दलों समेत अन्य छोटे दलों से गंठबंधन कर लिया है इनमें कई पार्टियां गठबंधन में शामिल हो चुकी हैं तो कई पार्टियां ऐसी भी हैं जो अभी भी गठबंधन से अलग तमिलनाडु की सभी ३९ सीटों पर चुनाव लडऩे की बातें करती हैं। आलम यह है कि लोकसभा चुनाव की चर्चा अब राजनेताओं तक ही सीमित न रहकर चौक चौराहे की चाय-पान के दुकानों तक जा पहुंची है।
बहरहाल चेन्नई के सार्वजनिक स्थलों पर लगी चाय की दुकानों के अलावा अब मयखाने में भी चुनाव की चर्चा होने लगी है। रायपुरम एमएस स्ट्रीट में एक चाय की दुकान पर कुछ लोग अपने अन्य साथियों के साथ चाय की चुस्की के साथ आपस में बतियाते नजर आते हैं कि इस बार अम्मा नहीं है इसलिए ओपीएस-ईपीएस ने भाजपा से गठबंधन कर लिया, लेकिन ऐसा लगता है इस बार तो खाता ही नहीं खुलने वाला। इस पर दूसरे साथी कहते हैं नहीं रे, मौजूदा सरकार काम तो बेहतर ही कर रही है। इसका गठबंधन भी मजबूत है। एआईएडीएमके और पीएमके के साथ डीएमडीके भी आ जाए तो इस गठबंधन को हराना आसान नहीं होगा।
एनएससी बोस रोड पर एक रेस्टोरेंट में एडवोकेट्स का समूह चाय पी रहा था। वहां भी लोकसभा चुनाव में दोनों गठबंधनों की जीत हार पर ही चर्चा की जा रही थी। अधिवक्ता लोकेश के नाम से संबोधित करते हुए अन्य वकील कह रहे थे एआईएडीएमके का तमिलनाडु की छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करना तो ठीक है लेकिन एक सांप्रदायिक पार्टी भाजपा से गठबंधन करने से एआईएडीएमके को नुकसान होगा। उनका कहना था भाजपा के गठबंधन में शामिल होने के कारण अल्पसंख्यक समुदाय के वोट नहीं मिलेंगे जिससे इस गठबंधन को भारी नुकसान होगा।
इसी प्रकार रेटेरी के एक मयखाने के बाहर तीन व्यक्ति सफेद शर्ट और धोती पहने खड़े ओपीएस और ईपीएस की जमकर तारीफ करते नजर आए। कह रहे थे यह गठबंधन राज्य की सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगा। इस सरकार ने पिछले दो सालों में बेहतर काम किया है। वहीं विनायकपुरम के एक मंदिर के बाहर खड़े कुछ हिंदीभाषी युवक बतिया रहे हैं इस बार फिर मोदी की जीत का दावा कर किया जा रहा है जबकि अन्य साथी उनसे सहमत नहीं होते हुए कह रहे थे तमिलनाडु में न मोदी की लहर है न असर, यहां तो बस स्थानीय पार्टियों का ही बोलबाला रहेगा। इस बार डीएमके गठबंधन ही यहां पर ज्यादा सीटें जीतेगा।
बहरहाल महानगर में चुनाव को लेकर लोगों की कानाफूसी का बाजार गर्म है और उम्मीद है ज्यों ज्यों चुनाव नजदीक आएगा यह सरगर्मी और तेज होगी। दोनों द्रमुक दलों की गठबंधन करने की मजबूरी यह समझने के लिए पर्याप्त है कि आगामी लोकसभा चुनाव किसी भी गठबंधन के लिए आसान नहीं होगा।