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दक्षिणी जिलों में दुकाने अभी तक बैठने के अधिकार संशोधन का नहीं कर रही पालन

-कर्मचारियों की स्थिति अभी भी जस की तस
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चेन्नई

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Vishal Kesharwani

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Updated: 28 Dec 2021, 5:36 PM IST

दक्षिणी जिलों में दुकाने अभी तक बैठने के अधिकार संशोधन का नहीं कर रही पालन

दक्षिणी जिलों में दुकाने अभी तक बैठने के अधिकार संशोधन का नहीं कर रही पालन


तेनकासी. दक्षिणी जिलों के अधिकांश शोरूम, दुकानों और प्रतिष्ठानों ने अब तक बैठने के अधिकारी संशोधन प्रावधान का पालन नहीं किया है। संशोधन के तहत ऐसे सभी प्रतिष्ठानों में सभी कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि काम के दौरान उन्हें भी आराम मिल सके। गत सितंबर महीने में विधानसभा में इस संबंध में एक बिल पास हुआ था। लेकिन तेनकासी और तिरुनेलवेली के अधिकांश प्रतिष्ठानों में अब तक इसका पालन शुरू नहीं किया गया है। एक कर्मचारी ने बताया कि अभी भी उन्हें कार्यस्थल पर पूरे समय खड़ा होना पड़ता है और संशोधन के बावजूद किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है।

टैक्सटाइल्स शोरूम के मालिक सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से कर्मचारियों पर नजर रखते हैं। अब तक कर्मचारियों को ना तो कुर्सी मिली और ना ही कस्टमर के लिए रखी गई कुर्सी पर बैठने की अनुमति है। अगर कोई कर्मचारी कस्टमर की कुर्सी पर बैठा मिलता है तो उसे फ्लोर मैनेजर चेतावनी देकर उठा देते हैं। ऐसी परिस्थिति में हम सिर्फ लंच के समय ही बैठ सकते हैं। अलनगुलम टैक्सटाइल्स शोरूम मे काम करने वाली कामिनी नामक महिला कर्मचारी का कहना है कि लंबे समय तक खड़े होने की वजह से उसे कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी गुजरना पड़ रहा है।

वर्ष 2019 में तिरुनेलवेली के निजी अस्पताल में मुझे भर्ती भी होना पड़ा था। मैंने अपने मालिक से कस्टमर नहीं होने के दौरान बैठने के लिए चेयर की व्यवस्था की मांग की। लेकिन ऐसा करने के बजाय उन्होंने नौकरी छोडऩे को कह दिया। मेरे परिवार की स्थिति ऐसी नहीं है कि मै नौकरी छोड़ सकुं। मैं रेस्टरूम जाकर कुछ समय बैठ जाती हूं।


-लंबे समय तक खड़े होने से वैरिकोज नसों से हो रहे पीडि़त
वैस्कुलर सर्जन डॉ ऐलान चेरालाथन कल्याणरमण ने बताया चाय और किराने की दुकानों सहित अन्य दुकानों व प्रतिष्ठानों में खड़े लगभग 20 प्रतिशत कर्मचारी वैरिकोज नसों से पीडि़त हैं। लंबे समय तक खड़े होने की वजह से ही यह बीमारी उत्पन्न हो रही है। वैरिकोज वेंस के मरीज पैरों में खून के रुकने से पीडि़त होते हैं। रक्त के रुकने के कारण पैर में नसों का व्यास बढ़ता है और वाल्व नसों में परेशानी आती है। ऐसे रोगियों में पैर के टखने के आसपास की त्वचा का रंग हाइपरपिग्मेंटेशन, काले धब्बे, सूजन और खुजली के साथ अल्सर विकसित करते हैं। उसके बाद पैर का अल्सर आसानी से नहीं भरता है।


-चलाया जा रहा अभियान
तेनकासी श्रम विभाग के सहायक इंस्पेक्टर ने बताया कि विभाग द्वारा बैठने के अधिकार को लागू कराने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके अलावा ट्रेड यूनियनों के माध्यम से जिले भर में अधिनियम के नए प्रावधान को व्यक्त करने की योजना बनाई जा रही है। तेनकासी वर्थागर संगम के सचिव पी. परमशिवन ने बताया कि उनके संगम के तहत आने वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों को कर्मचारियों के लिए बैठने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया जाएगा।