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यहां किसानों को दो साल बाद भी नहीं मिली अतिवृष्टि क्षतिपूर्ति, 225 करोड़ हैं बाकी

राहत राशि के इंतजार में किसान, 2.8 अन्नदाताओं को ही मिली है मात्र 25 फीसदी राशि।

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यहां किसानों को दो साल बाद भी नहीं मिली अतिवृष्टि क्षतिपूर्ति, 225 करोड़ है बाकी

छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के किसानों को प्राकृतिक आपदा की राशि नहीं मिल पा रही है। साल 2019 में अतिवृष्टि से खराब हुई खरीफ सीजन की सोयाबीन, उड़द की फसल के मुआवजा के लिए जिले के सवा तीन लाख किसानों को 282 करोड़ राहत राशि राज्य सरकार दूवारा स्वीकृति की गई। लेकिन, तंगहाली के चलते सरकार ने डेढ़ साल पहले केवल 25 फीसदी राशि 70 करोड़ ही प्रशासनको बांटन के लिए दिए। उसमें से 13.50 करोड़ रुपए किसानों को अबतक नहीं बंट पाए हैं। जिससे जिले के एक लाख किसानों को राहत की एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है। जबकि, दो साल में 2 लाख 80 हजार किसानों को केवल 25 फीसदी राहत ही मिल पाई है।


पूरी राहत की तो अब बात भी नहीं हो रही है। दो साल पहले अतिवृष्टि के नुकसान का राजस्व व कृषि विभाग द्वारा सर्वे किया गया। सर्वे में छतरपुर जिले के 3 लाख 82 हजार किसानों को चिन्हित किया गया और इन किसानों को राहत देने के लिए शासन द्वारा 282 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे। सरकार के पास आर्थिक तंगी होने की वजह से किसानों को तात्कालिक रूप से सहायता पहुंचाने के लिए 25 फीसदी राशि यानि की लगभग 70 करोड़ रुपए तत्काल किसानों के बैंक खातों में डालने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इन 70 करोड़ रुपए की 81 फीसदी राशि ही बांटी गई है, जो महज 2 लाख 80 हजार किसानों के खातों में पहुंच पाई।


दो साल बीतने के बाद भी शासन द्वारा स्वीकृत साढ़े 13.50 करोड़ रुपए अभी सरकारी खजाने में जमा हैं और जिले का 1 लाख किसान 25 फीसदी राहत राशि की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जिले भर के 8 प्रतिशत किसानों के खातों में अब तक 25 फीसदी राहत राशि पहुंच पाई है। जानकारी के मुताबिक छतरपुर तहसील के 59 हजार किसानों में से 43 हजार 490 किसानों को राशि प्राप्त हुई है जबकि 15 हजार 565 किसान अभी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं।


राजनगर तहसील के 65 हजार 846 किसानों में से 41 हजार 492 किसानों को राशि मिली है, जबकि 24 हजार 354 किसान अभी भी तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। बिजावर तहसील के 27 हजार 30 किसानों में से 4 हजार 907 किसान अभी राहत राशि पाने से वंचित हैं। बड़ामलहरा तहसील के 26 हजार 521 किसानों में से 1787 किसानों को राहत राशि देखने को भी नहीं मिली है। घुवारा तहसील के 22 हजार 17 किसानों में से 5 हजार 3365 किसान राहत राशि पाने का इंतजार कर रहे हैं। लवकुशनगर तहसील के 20 हजार 963 किसानों में से 3 हजार 433 किसानों को राहत राशि नहीं मिली है। गौरिहार तहसील के 58 हजार किसानों में से 27 हजार 499 किसान राहत राशि पाने से वंचित हैं। चंदला तहसील के 24 हजार 201 में से 4214 किसान को राहत राशि नहीं मिल पाई है।

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नौगांव और महाराजपुर में भी यही हाल


हुई है, जबकि जिले के 1 लाख से अधिक किसान ऐसे हैं जिन्हें स्वीकृत राहत राशि का 211 करोड़ रुपए और प्राप्त 25 फीसदी में से साढ़े 13 करोड़ रुपए की राशि मिलना है। यानि कुल मिलाकर जिले के किसानों का सरकार पर लगभग 225 करोड़ रुपए बकाया है।


58 हजार किसान वीडी शर्मा के क्षेत्र में

सरकार द्वारा स्वीकृत की गई राहत राशि में से 25 फीसदी राशि भी जिन किसानों को नहीं मिली है उनकी संख्या वैसे तो 1 लाख 2 हजार 348 है लेकिन इनमें सबसे ज्यादा साढ़े 58 हजार किसान प्रदेश के सबसे ताकतवर सांसद और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा के संसदीय क्षेत्र के हैं। इनमें राजनगर तहसील के 24 हजार 354 किसान, लवकुशनगर तहसील के 3 हजार 433 किसान, गौरिहार तहसील के 26 हजार 499 किसान और चंदला तहसील के 4 हजार 214 किसान ऐसे हैं जिन्हें आज तक इस राहत राशि में से फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई है।

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क्या कहते हैं डिप्टी कलेक्टर?

इस संबंध में डिप्टी कलेक्टर का कहना है कि, पियूष भट्ट किसानों को राहत राशि वितरण की स्थिति की जानकारी नहीं है। इससे संबंधित किसी भी मीटिंग में मैं नहीं रहा हूं। मैं पता करके इस बारे में कुछ कह पाउंगा। इसकी ज्यादा जानकारी एडीएम साहब बता सकते हैं।


क्या कहते हैं अपर कलेक्टर?

वहीं, मामले को लेकर अपर कलेक्टर आरडीएस अग्निवंशी का कहना है कि, खरीफ फसल के लिए अतिवृष्टि राहत राशि का किसानों को वितरण पेंडिंग होने की जानकारी मुझे नहीं है। मैं पता करता हूं, क्या कारण रहा कि राशि का वितरण नहीं हो पाई है।

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