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Health: चश्मे की दुकान वाले कर रहे आंख से खिलवाड़, बिना विशेषज्ञ जांच

चश्मे का नंबर देने के लिए दो साल का ऑप्टोमैट्रिक्स डिप्लोमा कोर्स जरूरी है। इसके बाद भी क्वालीफाई ऑप्टोमैट्रिक्स किसी डॉक्टर की इजाजत के बिना मरीज को आंखों के चश्मे का नंबर नहीं दे सकता। जिले की अधिकांश चश्मा दुकानों पर ऑप्टोमैट्रिक्स डिप्लोमाधारी स्टाफ नहीं है।
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छिंदवाड़ा

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Ashish Kumar Mishra

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Updated: 2 Sep 2026, 2:12 PM IST

health

विभाग भी नहीं दे रहा ध्यान, बड़ी लापरवाही उजागर


छिंदवाड़ा. शहर में अधिकतर चश्मे की दुकानों पर अनट्रेंड स्टाफ बिना किसी डिग्री, डिप्लोमा के आंखों की जांचकर लोगों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। इनके पास अनुभव तक नहीं है पर इसके बाद भी ये आंखें चेक कर न केवल लोगों को नंबर दे रहे हैं बल्कि चश्मा भी बना रहे हैं। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग इस मुद्दे पर आंखें बंद करके बैठा है। ऐसे में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चश्मा दुकान वाले ही आंख के डॉक्टर बन गए हैं। वे कंप्यूटराइज्ड आंखों की जांच कर चश्मे का सही नंबर देने का दावा करते हैं। जबकि आंखों की जांच से लेकर इलाज का काम ऑप्थेलमोलॉजिस्ट यानी आंखों के डॉक्टर ही कर सकते हैं। जिले में 150 से ज्यादा चश्मा बनाने वालों की दुकानें हैं। इनमें से कुछ में ही रजिस्टर्ड डॉक्टर हैं। बाकी दुकानों पर आंखें चेक करने और चश्मे का नंबर देने का काम अत्याधुनिक मशीनों के जरिए अनट्रेंड स्टाफ कर रहा है। ऐसे में अगर किसी की आंखों के साथ कोई खिलवाड़ होता हो तो हो, इसकी परवाह किसी को नहीं है। खुद नेत्र रोग विशेषज्ञों की राय में बिना योग्य चिकित्सक के परीक्षण के चश्मे का नंबर देना खतरे से खाली नहीं है। सामान्य तौर पर चश्मे की दुकान चलाने वालों को केवल चश्मा बनाने का अधिकार है। वे नेत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा बताए गए नंबर का चश्मा बनाकर दे सकते हैं।

दवा तक लिख देते हैं दुकानदार
कई दुकानदार तो दवा तक दे रहे हैं। कई बार मोतियाबिंद, शुगर के कारण आंख के पर्दे में खराबी आने या काला पानी होने पर भी नजर कमजोर हो जाती है। ऐसे में अनट्रेंड दुकानदार सिर्फ चश्मे का नंबर निकालकर दे देते हैं। धीरे-धीरे मरीज की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली जाती है।

चश्मे के गलत नंबर से हो सकती हैं कई परेशानी
डॉक्टरों का कहना है कि चश्मे के गलत नंबर से मरीज को कई तरह की परेशानी हो सकती है। इससे सिर दर्द होता रहता है। कभी-कभी तो आंखों में भेंगा पन तक आ सकता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह लिए चश्मे का नंबर नहीं निकलवाना चाहिए और न ही ऐसे चश्मे का उपयोग करना चाहिए।

विशेषज्ञ बता रहे खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार इन दुकानदारों की गतिविधियों से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। आंख की जांच व इलाज के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर आंखों की सेहत से खिलवाड़ हो सकता है। नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि आंख की जांच के लिए विशेषज्ञता व अनुभव की आवश्यकता होती है। चश्मे बनाने वाले दुकानदारों के पास यह विशेषज्ञता व अनुभव नहीं होता है, इसलिए वे आंख की जांच और इलाज के लिए योग्य नहीं हैं।

इनका कहना है…
चश्मे की दुकान की आड़ में आंखों की जांच करने वाले लोगों की जांच कराई जाएगी। चश्मे की दुकान वाले केवल डॉक्टर द्वारा दिए गए नंबर से चश्मा बना सकते हैं। यह आंखों की जांच नहीं कर सकते। अगर दुकानदारों ने आंखों की जांच करना बंद नहीं किया तो दुकानें सील करवा दी जाएंगी।
डॉ. अर्चना कैथवास, सीएमएचओ, छिंदवाड़ा