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Ganeshotsav : ये हैं गणेश प्रतिमा स्थापना के शुभ मुहूर्त, राशि के अनुरूप लगाएं भोग

विशेष मुहूर्त में होगा स्थापना पूजन : आज घर-घर विराजेंगे लंबोदर

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ganesha

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छिंदवाड़ा. प्रथम पूज्य, सिद्धि और बुद्धि के दाता भगवान श्रीगणेश सोमवार को घर-घर विराजेंगे। दस दिन तक चलने वाले इस उत्सव को लेकर विशेष तैयारियां पूरी हो चुकीं हैं। घर में भगवान के आह्वान और स्वागत के लिए उनके स्थापना स्थल को सजाने सवांरने का काम लोग रविवार को करते रहे। विशेष मूहूर्त में लोग अपने घरों में दस दिन इनकी भक्तिभाव से पूजा करेंगे।
रविवार को बाजार में खासी चहल-पहल रही। सोमवार को आपाधापी से बचने के लिए लोगों ने रविवार को ही प्रतिमाएं अपने घरों में लाकर रख लीं। विधि-विधान से पूजा के बाद सोमवार को विशेष मुहूर्त में विराजने के बाद इनके दर्शन सभी कर सकेंगे।

ये हैं शुभ मुहूर्त

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी दो दिसम्बर को है। गणेश पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त सोमवार को सुबह 11.05 से 1.36 तक बताया गया है। विशेष मुहूर्त में अमृत चौघडिय़ा घडिय़ा सुबह 6.10 से 7.44 बजे तक, शुभ का चौघडिय़ा सुबह 9.18 से 10.53 बजे तक और लाभ का चौघडिय़ा दोपहर 3.55 से शाम 5.09 बजे तक रहेगा।

राशियों के अनुसार किस तरह भोग लगाएं श्रीगणेश को

दस दिन तक भगवान श्रीगणेश की आराधना पूजा कर लोग सुख समृद्धि की कामना उनसे करते हैं। पूजन के समय राशि के अनुसार भी पूजन विधि और उनके भोग का महत्व बताया गया है। ज्योतिषचार्य और पुरोहित पं दिनेश द्विवेदी ने बताया कि यदि दस दिन तक पूजा और आरती करने वाले की राशि मेष और बृश्चिक हो तो वे अपने राशि स्वामी का ध्यान करते हुए लड्डू का विशेष भोग लगाएं तो उनके सामथ्र्य में विकास होगा। वृष और तुला राशि वाले भगवान गणेश को मोदक का भोग विशेष रूप से लगाएं तो ऐश्वर्य मिलेगा। मिथुन और कन्या राशि वाले भगवान को पान अवश्य अर्पित करें। ऐसा करने पर विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है। धनु एवं सिंह राशि वालों को फ ल का भोग लगाना चाहिए ताकि जीवन में सुख-सुविधा और आनंद की प्राप्ति हो सके। सिंह राशि वाले भगवान को केला अर्पित करें तो जीवन में तीव्र गति से आगे बढ़ सकते हैं। मकर एवं कुंभ राशि वाले सूखे मेवे का भोग लगाएंगे तो उन्हें अपने कर्म क्षेत्र में तरक्की मिलेगी।

11 दिन में ये व्रत पूजन

2 सितम्बर -गणेश चतुर्थी
3 सितम्बर -ऋषि पंचमी
4 सितम्बर -मोरछट या सूर्य षष्ठी
5 सितम्बर -संतान सप्तमी
6 सितम्बर -राधाष्टमी
7 सिम्बर -श्री हरि जयंती
8 सितम्बर -सुगंध धूप दशमी
9 सितम्बर -डोल ग्यारस
10 सितम्बर -वामन जयंती
11 सितम्बर -प्रदोष व्रत
12 सितम्बर -अनंत चतुर्दशी