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यह है गूगलः चंद सेकंड में भांप लेता है खतरा, हजारों लोगों की करता है सिक्योरिटी

google dog-रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा में तैनात है गूगल, चंद पलों में भाप लेता है खतरा- पुणे में मिली आठ माह की ट्रेनिंग, छिंदवाड़ा में आने वाली हर ट्रेन में कर रहा सर्चिंग

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आशीष मिश्र

रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक और कदम बढ़ाते हुए छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन पर गूगल (लेब्रा डॉग) की तैनानी की है। यहां गूगल एक जांबाज सिपाही की तरह सेवा दे रहा है। गूगल के हैंडलर आरपीएफ के प्रधान आरक्षक लखन सिंह मोहने ने बताया कि गूगल बम खोजी डॉग है।


प्रतिदिन रेलवे स्टेशन पर वह सर्चिंग करता है। इसके अलावा पातालकोट एक्सप्रेस, पेंचवैली एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों में भी हर एक यात्री का बैग सूंघकर गूगल यह सुनिश्चित करता है कि उसमें कोई विस्फोटक सामग्री है या नहीं। सर्चिंग के बाद ही ट्रेन रवाना की जाती है। बैग में रखी माचिस तक को सूंघने की क्षमता इसमें है। उसकी देखरेख के लिए असिस्टेंट हैंडलर महेश वगेन्द्र की भी तैनाती की गई है।

गूगल नवंबर 2021 में तीन माह की उम्र में चंडीगढ़ से लाया गया था। इसके बाद वह तीन माह छिंदवाड़ा में ही आरपीएफ थाना में रहा। नियम के अनुसार छह माह आयु पूरी करने के बाद उसे आरपीएफ के पुणे स्थित डॉग ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। उसके साथ हैंडलर को भी प्रशिक्षित किया गया। आठ माह की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद कुछ माह पहले ही उसकी नियुक्ति छिंदवाड़ा में की गई है।

पांच नामों में से गूगल पर लगाई मुहर

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत स्थित छिंदवाड़ा आरपीएफ थाना ने डॉग के नामकरण के लिए पांच नामों का प्रस्ताव आरपीएफ नागपुर के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त पंकज चुग को भेजा था। हैंडलर लखन सिंह मोहने ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारी ने गूगल नाम पर स्वीकृति दी। इसके बाद से ही लेब्रा डॉग का नाम गूगल पड़ गया। उन्होंने बताया कि सर्च इंंजन गूगल जिस तरह सभी जानकारी देता है, वही काम हमारा गूगल (डॉग) भी कर रहा है।

अगल से रूम, मिलता है वीआईपी ट्रीटमेंटरेलवे बोर्ड के बनाए नियम के अनुसार गूगल को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। उसके खाने एवं सोने का समय निर्धारित है। सुबह 10 और शाम को छह बजे खाना दिया जाता है। रहने के लिए अलग से रूम बनाया गया है। पास में ही हैंडलर का भी कमरा है। गूगल जब 10 साल का होगा, तब उसे सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा।

छुट्टी पर घर जाते हैं, तो भी नहीं लगता मन

हैंडलर मोहने ने बताया कि गूगल से उनका गहरा लगाव हो गया है। अब वे छुट्टी पर जाते हैं, तो मन नहीं लगता। जब वह ज्वाइन करते हैं तो गूगल लिपट जाता है। अब वह मेरे बच्चे की तरह हो गया है।