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एमपी के 86 गांवों में शादियों में न डीजे बजेगा और न जयमाला होगी

Weddings - गांवोें के लोगों ने कुरीतियों का बहिष्कार करते हुए शादियों में जयमाला और डीजे को बंद करने का निर्णय लिया

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No DJs to Play at Weddings in 86 Villages of MP

No DJs to Play at Weddings in 86 Villages of MP-प्रतीकात्मक तस्वीर

Weddings - एमपी के 86 गांवों में अब शादियों में डीजे नहीं बजाया जाएगा। इतना ही नहीं, जयमाला कार्यक्रम भी नहीं होगा। इन गांवोें के लोगों ने कुरीतियों का बहिष्कार करते हुए शादियों में जयमाला और डीजे को बंद करने का निर्णय लिया है। नियम का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। प्रदेश के आदिवासियों ने अपनी संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की। पांढुर्ना जिले के मोहगांव जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम मुंगवानी में हुई इस बैठक में अहम फैसले लिए गए।

आदिवासी रीति-रिवाजों के तीन प्रमुख संस्कार जन्म, विवाह और मरण संस्कार पर चर्चा की

जनपद की 38 पंचायतों के 86 गांवों से सामाजिक बंधु, पंच, सरपंच एवं कोटवार बड़ी संख्या में बैठक में शामिल हुए। बैठक में आदिवासी रीति-रिवाजों के तीन प्रमुख संस्कार जन्म, विवाह और मरण संस्कार पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा, इन संस्कारों के बीच कई सामाजिक कुरीतियों का प्रचलन बढ़ गया है जो आदिवासी परंपरा के लिए घातक है।

जन्म संस्कार के तहत बच्चे के जन्म के 7 दिन में छठी एवं नामकरण संस्कार करने तथा 12वें दिन बारसा आयोजित करने का निर्णय

सामाजिक कार्यकर्ता सोमवती धुर्वे ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से कई निर्णय लिए गए। जन्म संस्कार के तहत बच्चे के जन्म के 7 दिन में छठी एवं नामकरण संस्कार करने तथा 12वें दिन बारसा आयोजित करने का निर्णय लिया। बारसा में सिर्फ बच्चे के लिए कपड़े लाने की अनुमति होगी और डलिया प्रथा को बंद किया जाएगा। नियमों का पालन नहीं करने पर समाज में जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।

गोंड समाज में मृत्यु होने पर अग्नि संस्कार के स्थान पर मिट्टी देने की परंपरा को अपनाने पर जोर

बैठक में विवाह संस्कार में टेंट, जयमाला और डीजे जैसी परंपराओं को पूर्णत: बंद करने का निर्णय लिया गया। दहेज के संबंध में यह तय किया गया कि केवल बेटी को उसके परिवार एवं रिश्तेदारों की ओर से ही सामग्री दी जाएगी। गोंड समाज में मृत्यु होने पर अग्नि संस्कार के स्थान पर मिट्टी देने की परंपरा को अपनाने पर जोर दिया। दशगात्र कार्यक्रम में 3 नारियल देने का नियम बनाया है।

कस्वर से कहा कि आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार जीवनयापन करने से ही संस्कृति का संरक्षण संभव

आदिवासियों ने बैठक में शराबखोरी के दुष्परिणामों पर ​गहरी चिंता जताई। समाज में शराबबंदी को लेकर सख्त नियम भी बनाए हैं। वक्ताओं ने एकस्वर से कहा कि आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार जीवनयापन करने से ही संस्कृति का संरक्षण संभव है।