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कम तनख्वाह में नहीं होता गुजारा इसलिए युवा छोड़ देते है नौकरी

कम तनख्वाह की नौकरी से उनका महानगरों में गुजारा मुश्किल हो जाता है। इस समय युवाओं के नौकरी से वापस आने में यहीं वजह बार-बार सामने आ रही है।

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शहर और गांव में लगनेवाले रोजगार मेले में सिक्योरिटी गार्ड और सुपरवाइजर्स जैसे पद युवाओं को आकर्षित करते हैं लेकिन नौकरी लगने के बाद एक साल में उनका इस जॉब से मोहभंग हो जाता है। कम तनख्वाह की नौकरी से उनका महानगरों में गुजारा मुश्किल हो जाता है। इस समय युवाओं के नौकरी से वापस आने में यहीं वजह बार-बार सामने आ रही है।



रोजगार कार्यालय और ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से लगाए जा रहे रोजगार मेले में हर माह प्राइवेट कंपनियों की नौकरी ऑफर की जा रही है। इनमें सिक्योरिटी, मार्केटिंग, कस्टमर केयर, सेल्स, टेक्निशियन, फिटर, मैकेनिक जैसे जॉब युवाओं को ऑफर किए जाते हैं। सौ से ज्यादा नियुक्तियों में तनख्वाह 6 हजार से लेकर 12 हजार रुपए तक होती है। महानगरों में जॉब लगने पर कम से कम 60 फीसदी मामले में युवा एक माह की नौकरी मुश्किल से कर पाते हैं। दूसरे महीने मकान किराया देखकर ही तुरंत ही जॉब छोडकऱ घर वापस लौट आते हैं। बहुत अधिक मजबूरी में ही युवा नौकरी में टिक पा रहे हैं। इस समस्या को पहले भी उठाया गया लेकिन कोई भी इसे गंभीरता से नहीं ले पा रहा है।

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4 हजार से कम नहीं मकान का किराया

ऐसी नौकरी करनेवाले युवा बताते हैं कि सिक्योरिटी गार्ड, मार्केटिंग, सेल्स, इंश्योरेंस, कस्टमर केयर, मिल्स श्रमिक जैसे जॉब में जानेवाले लोग पहले माह मकान तलाशते हंै तो उन्हें न्यूनतम किराया 4 हजार रुपए बताया जाता है। इससे उनका हौसला टूट जाता है। इसके साथ ही उन्हें अकेले का भोजन भी महंगा पड़ता है।

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युवाओं में ज्यादा तनख्वाह की आस

सिवनी रोड से लगे ग्राम खुटिया झंझरिया की रहनेवाले शंकर उइके, सिंगोड़ी क्षेत्र के अखिलेश चंद्रवंशी बताते है कि उनके ग्राम समेत उमरिया, खुटिया, खापाभाट, रंगीनखापा और सिंगोड़ी, राजाखोह समेत आसपास के गांवों के युवा बड़े शहर की प्राइवेट कम्पनियों में पहुंचते हैं। महंगा मकान किराया, भोजन को देखकर लौट आते हैं। उन्हें अपने गांव-शहर में काम करना अच्छा


बड़ी कम्पनियों में स्किल्स और अनुभव

बड़ी कम्पनियों में स्किल्स और अनुभव के आधार पर जॉब ऑफर होते हैं। जिनमें 25 हजार रुपए से अधिक की तनख्वाह है। उनमें जिले के युवा प्रशिक्षित और स्किल्स के अभाव में चयनित नहीं हो पाते। रोजगार कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों की मानें तो पूरे जिले में यह स्थिति बन रही है।

इनका कहना है

रोजगार मेले के माध्यम से युवाओं को जॉब लेटर दिए जा रहे हैं। कुछ युवाओं के जॉब छोडऩ़े के पीछे कम तनख्वाह और गृह नगर का मोह हैं। हमारी कोशिश उनकी बेरोजगारी खत्म करने की है।
-माधुरी भलावी, जिला रोजगार अधिकारी।
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