14 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

चित्तौड़गढ़: 74 की उम्र, हर बार जमानत जब्त…फिर भी चुनावी मैदान में क्यों डटे हैं जोगेंद्र सिंह होड़ा?

चित्तौड़गढ़ में 74 वर्षीय जोगेंद्र सिंह होड़ा पंचायत चुनाव में निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं। दो बार लोकसभा और एक बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके होड़ा की जमानत हर बार जब्त हुई, लेकिन हौसला कायम है। पिता के नाम में गलती और वेतन अटकने को वे संघर्ष की वजह बताते हैं।
2 min read
Google source verification
jogendra singh hora

जोगेंद्र सिंह होड़ा (पत्रिका फोटो)

बस्सी (चित्तौड़गढ़): उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है। इस कहावत को चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति की गणेशपुरा ग्राम पंचायत निवासी जोगेंद्र सिंह होड़ा ने चरितार्थ कर दिया है। जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त 74 वर्षीय जोगेंद्र सिंह होड़ा का चुनाव लड़ने का जुनून आज भी बरकरार है। इस बार वे गणेशपुरा-रोलाहेड़ा वार्ड नंबर 7 से पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक रहे हैं।

लंबा रहा है चुनावी सफर

जोगेंद्र सिंह होड़ा का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। वे इससे पहले वर्ष 2013 और 2024 में दो बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं, वर्ष 2023 में उन्होंने अभिनव लोकतंत्र पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था।

वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान एक आंकड़ा खासा चर्चा में रहा। सादी ग्राम पंचायत के गोपालपुरा गांव स्थित बूथ नंबर 87 पर भाजपा के दिग्गज प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी को पांच वोट मिले थे, जबकि जोगेंद्र सिंह होड़ा को आठ मत हासिल हुए थे। उस चुनाव में होड़ा को कुल 1,537 वोट मिले थे, जो नोटा को मिले 1,527 मतों से भी अधिक थे। खास बात यह है कि अब तक लड़े गए चुनावों में उनकी जमानत जब्त होती रही है, लेकिन इससे उनका हौसला कम नहीं हुआ। 74 वर्ष की उम्र में भी चुनावी मैदान में उतरने का उनका जज्बा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

सिस्टम की खामी से शुरू हुई लड़ाई

आखिर इस उम्र में भी चुनाव लड़ने के पीछे उनकी मंशा क्या है? होड़ा के मुताबिक, उनकी लड़ाई व्यवस्था की खामियों को दूर करने के लिए है। वे बताते हैं कि जनगणना के दौरान सरकारी दस्तावेजों में उनके पिता बलवंत सिंह होड़ा का नाम गलती से बलदेव सिंह होड़ा दर्ज हो गया था। उनका कहना है कि इस गलती को आज तक सुधारा नहीं गया।

होड़ा के अनुसार, इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण मार्च 2001 से फरवरी 2024 के बीच उनका तीन साल का वेतन रुका रहा। व्यवस्था की इसी सुस्ती से नाराज होकर उन्होंने सिस्टम में सुधार की लड़ाई शुरू की। अब 74 साल की उम्र में भी वे चुनाव के जरिए अपनी आवाज उठाने और व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद के साथ मैदान में डटे हुए हैं।

बड़ी खबरें

View All

चित्तौड़गढ़

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग

राजस्थान पंचायत चुनाव 2026