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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील का संकट, आधे से ज्यादा विद्यालयों में राशन-बजट खत्म; गहलोत ने उठाए सवाल

सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील योजना ठप होने की कगार पर है। जुलाई के बाद से कई स्कूलों में खाद्यान्न और कन्वर्जन राशि नहीं मिली है, जिससे लगभग 40 प्रतिशत स्कूलों में दोपहर का भोजन बनना बंद हो गया है। इसके साथ ही बच्चों के लिए 'पन्नाधाय योजना' का दूध वितरण भी सितंबर तक ही सीमित रहा।
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सीकर

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Arvind Rao

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Oct 14, 2026

rajasthan mid day meal crisis

सीकर के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल कुड़ली में खाली पड़े अनाज के ड्रम (पत्रिका फोटो)

Rajasthan Mid Day Meal Crisis: सरकारी स्कूलों के बच्चों का पोषण संकट में आ गया है। सीकर जिले के करीब 40 फीसदी स्कूलों में मिड-डे मील खत्म हो गया है। खाद्यान्न और कन्वर्जन राशि समय पर नहीं मिलने से ऐसा हुआ है। जानकारी के अनुसार, जिले के अलग-अलग स्कूलों को कहीं अप्रैल तो कहीं जुलाई के बाद से कन्वर्जन राशि नहीं मिली है। खाद्यान्न भी सितंबर तक का ही वितरित किया गया था। ऐसे में सैकड़ों स्कूलों में न तो अनाज बचा है और न ही धन। इससे वहां बच्चों के दोपहर के भोजन की व्यवस्था ठप हो गई है। यही नहीं, स्कूलों में भोजन पकाने वाली कुक कम हेल्पर को भी आठ-आठ महीने से मानदेय नहीं मिला है।

ऐसे में स्कूली बच्चों के साथ ही कुक कम हेल्पर के अपने बच्चों का पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। मामले में शिक्षक संगठनों ने सरकार से जल्द पोषाहार की व्यवस्था करने की मांग की है।

अप्रैल तो कहीं जुलाई तक का भुगतान

स्कूलों में सितंबर महीने तक का ही खाद्यान्न उपलब्ध करवाया गया था। बढ़े हुए नामांकन के आधार पर कई स्कूलों में तो यह अनाज पूरा सितंबर भी नहीं चल पाया। वहीं, भोजन में सब्जी, मसाले व अन्य सामग्री के लिए मिलने वाली कन्वर्जन राशि भी कई स्कूलों में अप्रैल तो कहीं जून-जुलाई तक ही पहुंची। ऐसे में कहीं अनाज थोड़ा-बहुत रह भी गया तो भोजन पकाने के लिए राशि नहीं बची।

पहले इधर-उधर से चलाया काम, अब बंद इंतजाम

सरकारी स्कूलों में खाद्यान्न खत्म होने पर पहले तो स्कूलों ने एक-दूसरे से अनाज लेकर काम चलाया। भामाशाहों के साथ शिक्षकों ने भी खुद सहयोग किया, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल पाई। अब यह इंतजाम भी ठप हो रहा है।

दूध वितरण योजना पर भी संकट

स्कूलों में बच्चों को दूध उपलब्ध कराने वाली पन्नाधाय बाल गोपाल योजना भी प्रभावित हो रही है। सूत्रों के अनुसार, स्कूलों को दूध पाउडर भी सितंबर महीने तक का ही मिला था। ऐसे में सैकड़ों स्कूलों में बच्चों को दूध मिलने पर भी संकट खड़ा हो गया है।

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने एक्स पर लिखा…

सीकर के करीब 40% सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील का राशन खत्म हो गया है। जुलाई के बाद न खाद्यान्न मिला, न राशि, और बच्चों का दूध भी सितंबर के बाद बंद है। शिक्षक और भामाशाह अपनी जेब से बच्चों का पेट भर रहे हैं। रसोइयों को 8 महीने से मानदेय नहीं मिला, और उनमें कई विधवा और तलाकशुदा महिलाएं हैं। भाजपा सरकार को बच्चों की थाली और रसोइयों के घर चलाने की कोई परवाह नहीं है, उसे सिर्फ अपनी सरकार का थोथा प्रचार करना है। मुख्यमंत्री जी जवाब दें: विज्ञापनों के लिए पैसा है, पर बच्चों के निवाले और रसोइयों के मानदेय के लिए क्यों नहीं?

कुक कम हेल्पर की बढ़ी समस्या

बजट के अभाव में कुक कम हेल्पर का मानदेय भी आठ-आठ महीने से अटका पड़ा है। चूंकि भोजन पकाने वाली कई हेल्पर विधवा और तलाकशुदा महिलाएं हैं, जिन पर अपने परिवार की जिम्मेदारियां भी हैं। ऐसे में मानदेय नहीं मिलने से वे भी घर का खर्च चलाने के लिए परेशान हो रही हैं।

नामांकन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा

यह सही है कि मिड-डे मील का खाद्यान्न और कन्वर्जन राशि नहीं मिलने से जिले के सैकड़ों स्कूलों में पोषाहार की व्यवस्था ठप हो गई है। मानदेय नहीं मिलने पर कुक कम हेल्पर भी बड़े आर्थिक संकट से गुजर रही हैं। सरकार को जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए, वरना इसका प्रतिकूल असर बच्चों की नियमित उपस्थिति और नामांकन पर भी पड़ेगा।
-विनोद पूनिया, जिलाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ, सीकर

प्रयास किए जा रहे हैं

स्कूलों में मिड-डे मील की समस्या दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में बैठक आयोजित की जा रही है। जल्द ही यह परेशानी खत्म हो जाएगी।
-किरण सैनी, कार्यवाहक सीडीईओ, सीकर