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19 से शुरु होगा गणेश चतुर्थी उत्सव, 300 साल के बाद बन रहा ऐसा दुर्लभ योग, आप भी जानें

साल के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है गणेश चतुर्थी। शहर में भी गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।

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चित्तौड़गढ़। साल के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है गणेश चतुर्थी। शहर में भी गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। गणेश प्रतिमाएं तैयार कर ली गई हैं, पंडाल और लाइटें लगाने का काम जारी है। इस आयोजन को धूमधाम से मनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। गणेश चतुर्थी देवी पार्वती और भगवान शिव के पुत्र भगवान गणेश की जयंती का प्रतीक है। इस साल गणेश चतुर्थी का उत्सव 19 सितंबर को शुरू होगा और 28 सितंबर को विसर्जन के साथ सम्पन्न होगा। भक्त इस दौरान धन, समृद्धि और सफलता की कामना करते हुए अपने घरों में गणपति का स्वागत करते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, गणेश चतुर्थी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष में आती है, जो हर साल अगस्त या सितंबर के आसपास पड़ती है। इसे गणेशोत्सव भी कहा जाता है। यह 10 दिनों का त्योहार होता है। जिसका समापन अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन के साथ होता है।

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ये बन रहा दुर्लभ योग
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस साल जो गणेश चतुर्थी आ रही है, वो बहुत ही दुर्लभ संयोग बना रही है। इस बार 300 सालों बाद तीन योग बन रहे हैं। जिसमें से एक है ब्रह्म योग, दूसरा है शुक्ल योग और तीसरा है शुभ योग। ये तीनों ही योग लगभग 300 साल बाद मिलकर दुर्लभ योग बना रहे हैं।

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ब्रह्म योग: ज्योतिष आचार्य बताते हैं कि ब्रह्म योग में ब्रह्मा, विष्णु, और महेश तीनों शक्तियां वहां पर एक साथ साक्षात मौजूद रहती हैं।

शुक्ल योग: शुक्ल योग में जितने भी जातक गणेश चतुर्थी में शामिल होते हैं, गणेशजी की आरती पूजन करते हैं, उनके घर में शुभ ही शुभ होता है।

शुभ योग: शुभ योग यानी गणेशजी के भक्तों के घरों में भी शुभ लाभ की स्थापना हो जाती है। आमदनी में बरकत अधिक और हानि कम होती है। घर में जो भी रहते हैं स्वस्थ रहते हैं।