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इस्लाम हिंसा का कभी भी समर्थन नहीं करता
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इस्लाम हिंसा का कभी भी समर्थन नहीं करता

चित्तौडगढ़़. इस्लाम हिंसा का कभी भी समर्थन नहीं करता है किसी भी वजह से हिंसा का समर्थन नहीं किया जा सकता है, हिंसा हर हाल में गलत है और गलत ही रहेगी, हिंसा के रास्ते पर चलने वालों से हमारा कोई वास्ता नहीं है।
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चित्तौड़गढ़

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Avinash Chaturvedi

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Updated: 19 Jul 2022, 9:38 PM IST

चित्तौडगढ़़. इस्लाम हिंसा का कभी भी समर्थन नहीं करता है किसी भी वजह से हिंसा का समर्थन नहीं किया जा सकता है, हिंसा हर हाल में गलत है और गलत ही रहेगी, हिंसा के रास्ते पर चलने वालों से हमारा कोई वास्ता नहीं है।
यह बात ऑल इंडिया ओलमा मशाईख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अशरफ ी ने पत्रकारों से कही। सैय्यद सरदार अहमद अशरफी के तीन दिवसीय उर्स में सम्मिलित होने के लिए मंगलवार को चित्तौडगढ़़ पहुंचे। सैय्यद मोहम्मद अशरफ ने कुछ दिनों पूर्व उदयपुर में सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी के बाद एक व्यक्ति की हत्या पर उपजे हालात के संदर्भ में कहा कि सूफी व सूुन्नी मुसलमान कभी भी हिंसा को पसंद नहीं करता है, हमारा एक ही पैगाम है मोहब्बत सबके लिए और नफरत किसी के लिए नहीं। हम किसी भी समस्या के समाधान के लिए बातचीत में यकीन करते हैं हिंसा में नहीं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह भी गलत है कि किसी एक व्यक्ति के गलत कार्य को लेकर पूरे समुदाय या धर्म को जिम्मेदार ठहराया जाए। सैय्यद अशरफ ी ने कहा कि जो धर्म के नाम पर गलत कार्य करने वालों का कर्म ही बता देता है कि वह किसी धर्म से संबंधित नहीं है, जो किसी धर्म से जुड़ा होता है वह गलत कार्य कर ही नहीं सकता। धर्म का काम ही बुराइयों को दूर करना हैए जब हम धर्म से दूर है तो हमसे बुरे काम हो सकते हैंए लेकिन जब धर्म के करीब होते हैं तो बुरे कामों से दूर हो जाते हैं। हिसा से किसी समुदाय या धर्म का कोई लेना देना नहीं, यह व्यक्ति की अपनी सोच हैए जिसका हम पूरी तरह से खंडन करते हैं। उन्होने कहा कि गलत कार्य करने वाले व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया जाए उसके धर्म को नहीं, इंसाफ का तकाजा यह है कि जिस ने गलत किया है हम सब मिलकर उसे गलत कहें और नियमानुसार कार्रवाई हो। हम एक धर्मनिरपेक्ष देश में रहते हैं जहां ऐसे व्यक्तियों के लिए स्पष्ट नियम हैए जिसके तहत कानून अपना कार्य अवश्य करेगा। यदि कोई ऐसे कार्य का समर्थन करता है तो हम उसे भी गलत कहेंगे। उन्होंने कहा कि हिंसा करने वाले, नाहक किसी का खून करने वालों, जुल्म करने वालों का इस्लाम से संबंध हरगिज़ नहीं हो सकता। ऐसा व्यक्ति मुसलमान ही नहीं हो सकता जो ना इंसाफी करें। इस्लाम में ऐसी कोई तालीम नहीं है कि नाहक किसी का खून और हिंसा की जाए। ऐसे व्यक्ति सिर्फ इस्लाम को बदनाम करते हैं, हम इसका पूरी तरह खंडन करते हैं। देश के वर्तमान हालात को लेकर सैयद अशरफ ने कहा कि सवाल सत्तापक्ष से ही पूछे जाते हैं चाहे वह कानून व्यवस्था होए चाहे बेरोजगारी होए इसलिए जो भी सवाल हो रहे हैं वह विरोध की बुनियाद पर नहीं है। लेकिन किसी को कोई समस्या होगी तो सवाल भी सत्ता से ही किया जाएगाए यह एक जरूरत है। देश में सोशल मीडिया पर धर्म के प्रति अवांछित टिप्पणियों को लेकर उन्होंने कहा कि हमें संविधान ने विरोध का अधिकार दिया है, हम संविधान के दिए अधिकारों के अनुरूप ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध ज्ञापन देकर धरना प्रदर्शन कर कानून के दायरे में रहकर विरोध जताएंगे। उन्होंने कहा कि हमारे देश में है संविधान ने सभी को अपने अनुसार कानून के दायरे में रहकर जीवन जीने की आजादी दी है व्यक्ति को खाने.पीनेए पहनने का अपनी पसंद के अनुसार अधिकार दिया गया हैए हमें समझदारी से काम लेते हुए देश के दुश्मनों की साजिश नाकाम करनी चाहिए। हम अपने धर्म के सकारात्मक नारे आजादी के साथ लगा सकते सैय्यद मोहम्मद अशरफ उर्स के दौरान बुधवार को कुल की रस्म में सम्मिलित होंगे। इस दौरान सज्जादा नशीन मोहम्मद सलीम अशरफी, सज्जादानशीन युसूफ अशरफी, शहर काजी अब्दुल मुस्तफा, मुफ्ती उस्मान अशरफी आदि मौजूद रहे।