
प्रखर समाजवादी चिंतक, विचारक, साहित्यकार, उपन्यासकार व मीसा बंदी रहे विश्वनाथ शर्मा 'प्रदीपÓ का सोमवार देर रात निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। हिंदी साहित्य संसद उदयपुर की ओर से उन्हें अमृत सम्मान दिया गया था।
प्रदीप चूरू रतन से भी सम्मानित थे। कवि जयशंकर प्रसाद, निराला आदि कवियों की रचनाओं का अध्यापन करवाकर अनेक शिष्यों को लाभान्वित किया। कन्हैयालाल ढंढ के घर जन्मे विश्वनाथ वर्ष 1948 से 1980 तक के समाजवादी आंदोलन में अग्रणी रहे। मीसाबंदी के रूप में 19 माह तक जेल में बंद रहे। 1964 में महंगाई विरोधी आंदोलन में गिरफ्तार हुए, अंत में सरकार को इन्हें बिना शर्त रिहा करना पड़ा था।
प्रदीप के दो बेटे व दो बेटियां है। इनकी पत्नी गीता देवी सेवानिवृत्त अध्यापिका है। साहित्यकार प्रदीप के निधन की सूचना मिलने पर अनेक सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, समाजसेवी आदि इनके घर पहुंच गए।
अंतिम संस्कार मंगलवार को दोपहर बाद होगा। उनके साथ मीसा बंदी रहे माधव शर्मा,साहित्यकार भंवर सिंह सामौर व समाजसेवी हनुमान कोठारी ने बताया,वे खरे इंसान, स्पष्ठवादी बेबाक टिप्पणीकार थे। शर्मा का हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, राजस्थानी, उर्दू भाषा पर समान अधिकार था। वे पूर्णानंद संस्कृत विद्यालय के लम्बे समय तक प्राचार्य रहे।
Published on:
29 Nov 2016, 6:10 PM IST
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