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चूरू जिले में कांग्रेस-भाजपा में कांटे की टक्कर: कृष्ण पूनियां की राह आसान नहीं, इस हॉट सीट पर भी कड़ा मुकाबला, जानें कौन किस पर भारी?

locationचुरूPublished: Nov 24, 2023 11:55:59 am

Submitted by:

santosh Trivedi

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के लिए 25 नवम्बर को होने वाले मतदान के बीच अब कुछ ही घंटे शेष रहे हैं तो अभी गेंद मतदाताओं के पाले में हैं, जिसको लेकर कयास लगाएं जा रहे हैं कि कौन कहा से कितना भारी है। फिर भी आखिर में लोगों के मुख से यही निकल रहा है कि इस बार भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला कांटे का है।

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राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 25 नवम्बर को होने वाले मतदान के बीच अब कुछ ही घंटे शेष रहे हैं तो अभी गेंद मतदाताओं के पाले में हैं, जिसको लेकर कयास लगाएं जा रहे हैं कि कौन कहा से कितना भारी है। फिर भी आखिर में लोगों के मुख से यही निकल रहा है कि इस बार भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला कांटे का है। चूरू जिले में कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे चार विधायक और भाजपा से दो विधायक फिर विधानसभा में पहुंच पाएंगे या नहीं पर लोग तरह तरह के कयास लगा रहे हैं।


मण्डेलियां के लिए प्रतिष्ठा की सीट बनी चूरू विधानसभा

चूरू विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक हाजी मकबूल मण्डेलियां की राजनीतिक विरासत संभाल रहे कांग्रेस प्रत्याशी रफीक मण्डेलिया के लिए यह सीट प्रतिष्ठा की बन गई है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राजेन्द्र राठौड़ से चुनाव हारने वाले रफीक मण्डेलिया को कांग्रेस ने फिर टिकट दी है। इसलिए इस बार उनका विधानसभा में पहुंचने का सपना पूर्ण होता है कि नहीं यह तो आने वाला कल ही बताएगा लेकिन चुनाव प्रचार में मण्डेलियां ने विधानसभा पहुंचने के लिए पूरी जोर आजमाइश की है।


सहारण से अधिक राठौड़ की प्रतिष्ठा लगी दावं पर
चूरू विधानसभा से 6 बार विधायक बने नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने इस बार अपने खास हरलाल सहारण को प्रत्याशी बनाया है जिससे इस चुनाव में इस सीट पर राठौड़ की प्रतिष्ठा दावं पर लगी हुई है। सहारण 2008 में कांग्रेस के हाजी मकबूल मण्डेलिया के सामने चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन जीता नहीं इस बार एक बार फिर उनके पुत्र रफीक मण्डेलिया के सामने चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक दृष्टि से दोनों प्रत्याशी अनुभवी है लेकिन मतदाताओं के बीच कौन अपनी पकड़ मजबूत करेंगा यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे।

पिछले चुनाव में 77.88 प्रतिशत हुआ मतदान
चूरू विधानसभा में पिछली बार कुल मतदाता थे- 232011
भाजपा को मिले मत- 48.28 प्रतिशत
कांग्रेस को मिले मत- 47.25 प्रतिशत

चूरू विधानसभा चुनाव- 2023
कुल मतदाता - 255480
पुरुष- 131931, महिला - 123548


सादुलपुर में त्रिकोणीय मुकाबला
सादुलपुर विधानसभा में पिछली बार की तरह इस बार त्रिकोणीय मुकाबला हो रहा है। भाजपा ने अपना प्रत्याशी बदलकर कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए नंदलाल पूनियां की पुत्रवधु सुमित्रा चौधरी को टिकट दिया है। कांग्रेस की ओर से विधायक कृष्णा पूनियां तीसरी बार चुनाव मैदान में है तो बासपा के मनोज न्यांगली भी अपना भाग्य अजमा रहे हैं। मतदाताओं के बीच चल रहे कयासों में यहां मुकाबला त्रिकोणीय बताया जा रहा है।


कृष्ण पूनियां की राह नहीं है आसान
कांग्रेस की विधायक कृष्णा पूनियां जो ओलम्पिक खिलाड़ी है लेकिन चुनाव के मैदान में इस खिलाड़ी की राह आसान नहीं है। हालांकि विधायक के रूप में क्या-क्या विकास के काम किए यह पूनियां मतदाताओं के बीच में रख रही है। फिर भी मतदाताओं की माने तो इस बार कांटे की लड़ाई में कौन बाजी मारेगा यह कहना कठिन हैं।


चुनाव मैदान में फंस गया है हाथी

पूर्व विधायक मनोज न्यांगली तीसरी बार चुनाव मैदान में है। यहां के लोगों के कयासों के अनुसार इस बार एक फिर हाथी चुनाव मैदान में फंस गया है। राजनीति में सक्रिय और जिले में बसपा का झण्डा बुलंद करने वाले मनोज न्यांगली मतदाताओं के बीच निरंतर सक्रिय रहे हैं लेकिन मतदाता उनका कितना साथ देंगे यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा।


चुनाव की नई खिलाड़ी सुमित्रा चौधरी
भाजपा ने इस बार कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए नन्दलाल पूनियां की पुत्रवधु सुमित्रा चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा के सांसद राहुल कस्वां की प्रतिष्ठा इस चुनाव में दावं पर लगी हुई है। क्योंकि सुमित्रा चौधरी को टिकट दिलाने में उनकी व पूर्व सासंद रामसिंह कस्वां की बड़ी भूमिका रही हैं। त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी इस सीट पर कौन बाजी मारेगा यह कहना कठिन है।

पिछले चुनाव में 79.64 प्रतिशत हुआ मतदान
सादुलपुर विधानसभा में पिछली बार कुल मतदाता थे- 222865
कांग्रेस को मिले मत- 39.45 प्रतिशत
बसपा को मिले मत- 29.26 प्रतिशत
भाजपा को मिले मत- 28.45 प्रतिशत

सादुलपुर विधानसभा - 2023
कुल मतदाता - 248448
पुरुष- 128808, महिला - 119639


तारानगर हॉट सीट पर कांटे की टक्कर

तारानगर विधानसभा सीट राज्य की हॉट सीटों में से एक हैं जहां भाजपा प्रत्याशी राजेन्द्र राठौड़ दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि विधायक नरेन्द्र बुडानिया भी लगातार दूसरी बार यहां से विधानसभा चुनाव में अपना भाग्य अजमा रहे हैं। पूरे प्रदेश की इस सीट पर नजर बनी हुई है तो दोनों ही पर्टियों की ओर से पूरा जोर लगया जा रहा है। चुनावी कयास में लोगों का मानना है यहां भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर चल रही है।


प्रतिपक्ष नेता राजेन्द्र राठौड़ की प्रतिष्ठा दावं पर
प्रतिपक्ष नेता राजेन्द्र राठौड़ को भाजपा ने तारानगर विधानसभा से टिकट देकर इस विधानसभा को राज्य में एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया है। आम लोगों में जीत हार के गणित के साथ कयास लगाएं जा रहे हैं लेकिन मतदाता अंतिम फैसला किस के पक्ष में करते हैं यह तो आनेवाला कल ही बताएगा।


चुनाव में फंसे बुडानिया
भाजपा नेता राठौड़ का मुकाबला कर रहे विधायक नरेन्द्र बुडानियां इस बार चुनाव में फंस गए हैं। कांग्रेस ने बुडानियां पर दावं खेलकर भाजपा को चुनौती दी लेकिन आमजन की माने तो इस बार कांग्रेस की राह आसान नहीं है। यूं तो यह पूर्व मंत्री चंदनमल बैद का गढ़ रहा है लेकिन उनके पुत्र चन्द्रशेखर बैद के भाजपा में आने से यहां के समीकरण बदल से गए हैं यह मानना है यहां के लोगों का फिर भी बाजी कौन मारेगा यह कहना मुश्किल है।


पिछले चुनाव में 75.15 प्रतिशत हुआ मतदान

तारानगर विधानसभा में पिछली बार कुल मतदाता थे- 237250

कांग्रेस को मिले मत- 31.95 प्रतिशत

भाजपा को मिले मत- 24.91 प्रतिशत

निर्दलीय को मिले मत- 23.10. प्रतिशत

तारानगर विधानसभा - 2023

कुल मतदाता - 261625

पुरुष- 136990, महिला - 124633


कांग्रेस के बागी ने सरदारशहर में बना दिया त्रिकोणीय मुकाबला

सरदारशहर विधानसभा सीट पर कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ रहे निर्दलय प्रत्याशी राजकरण चौधरी ने यहां मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। वर्तमान पालिका अध्यक्ष राजकरण चौधरी को भाजपा से बागी हुए पूर्व विधायक अशोक पींचा व प्रधान के मिले सक्रिय समर्थन से यहां चुनाव रोमाँचक दौर में पहुंच गया है। पण्डित भंवरलाल शर्मा की राजनीतिक विरासत संभाल रहे विधायक अनिल शर्मा हालांकि उप चुनाव में विधायक बनें थे और कांग्रेस ने फिर उन पर दावं खेला है तो भाजपा ने प्रत्याशी बदलकर रतनगढ़ के पूर्व विधायक राजकुमार रिणवां को टिकट देकर नया बदलाव करने का प्रयास किया है। फिर लोगों के कयास के अनुसार यहां त्रिकोणीय मुकाबले में कौन बाजी मार जाए यह कहना मुश्किल है।


अनिल शर्मा के लिए प्रतिष्ठा का बना चुनाव

वर्तमान विधायक अनिल शर्मा के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का बन गया है। अपने पिता से मिली विरासत से चुनाव मैदान में उतरे शर्मा विकास और अपने पिता के नाम पर चुनाव मैदान में डटे हुए हैं। चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने वादे के अनुसार अनिल को टिकट भी दिया लेकिन लोगों की ओर से लगाए जा रहे कयासों के अनुसार अनिल इस बार भी त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हुए हैं।


बागी भाजपाई रिणवां की राह के कांटे

भाजपा के प्रत्याशी राजकुमार रिणवां को भाजपा ने एनवक्त पर टिकट दी, इस बीच भाजपा के पूर्व विधायक अशोक पींचा की अगुवाई में अलग से जमीन तैयार की जा चुकी थी और वे कांग्रेस के बागी राजकरण चौधरी के साथ जा मिले। हालांकि बागी भाजपाई उनकी राह में कांटे बने हुए हैं। फिर लोगों के कयास के अनुसार रिणवां चुनाव की लड़ाई में बनें हुए हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि यह चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले में फंस गया है।


किसके फेवर में रहेंगे बागी तेवर

कांग्रेस से बगावत कर और भाजपाइयों को साथ लेकर बतौर निर्दलीय प्रत्याशी बनकर चुनावी मैदान में ताल ठोकनेवाले राजकरण चौधरी ने यहां मुकाबला कड़ा बना दिया है। चुनाव परिणाम क्या होंगे यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन भाजपा व कांग्रेस के लिए यह निर्दलीय प्रत्याशी चुनौती बन गया है। लोगों की माने तो चुनाव परिणाम क्या होगा यह तो नहीं पता लेकिन यहा त्रिकोणीय मुकाबले में टक्कर जोरदार होने की संभावना हैं।


पिछले चुनाव में 76.39 प्रतिशत हुआ मतदान

सरदारशहर विधानसभा में पिछली बार कुल मतदाता थे- 269351

कांग्रेस को मिले मत- 46.31 प्रतिशत

भाजपा को मिले मत- 38.14 प्रतिशत

सरदाशहर विधानसभा - 2023

कुल मतदाता - 305332

पुरुष- 160416, महिला - 144913


चुनावी रण में फंस गई कांग्रेस

रतनगढ़ विधानसभा सीट यूं तो भाजपा का गढ़ रहा है फिर भी बीच बीच में कांग्रेस ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है लेकिन इस बार फिर यहां कांग्रेस फंस गई बताई जा रही है। भाजपा की ओर से विधायक अभिनेश महर्षि चुनाव मैदान में हैं तो कांग्रेस ने फिर टिकट बदलकर पिछली बार बागी चुनाव लड़े पुसाराम गोदारा पर दांव खेला है। यहां के लोगों के बीच चल रहे कयासों के दौर से यह भी निकल कर आया है इस बार भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला जोरदार होनेवाला है।

महर्षि की प्रतिष्ठा दावं पर

भाजपा के प्रत्याशी अभिनेश महर्षि यहां से भाजपा की ओर से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। लोगों की माने तो चुनाव प्रचार में भाजपा ने पूरा जोर लगाया है तो रुठों को भी मना लिया बताया जाता है फिर भी यहां भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला है। बाजी कौन मारेगा यह कहना कठिन हैं।

गोदारा के लिए राह नहीं है आसान

कांग्रेस ने पहली बार रतनगढ़ विधानसभा से पुसाराम गोदारा को टिकट दी है। सुजानगढ़ की राजनीति में सक्रिय रहे गोदारा ने वहां की पंचायत समिति में प्रतिनिधित्व भी किया है। पिछली बार कांग्रेस से बगावत कर चुनाव लडऩेवाले गोदारा दूसरे स्थान पर रहे। जिन पर इस बार कांग्रेस ने दांव खेला है लेकिन उनके लिए राह आसान नहीं है। यहां कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है तो अन्य प्रत्याशी यहां का गणित बिगाड़ सकते हैं।

पिछले चुनाव में 79.64 प्रतिशत हुआ मतदान

रतनगढ़ विधानसभा में पिछली बार कुल मतदाता थे- 247734

भाजपा को मिले मत- 38.56 प्रतिशत

निर्दलीय को मिले मत-32.13 प्रतिशत

कांग्रेस को मिले मत - 12.34 प्रतिशत

रतनगढ़ विधानसभा - 2023

कुल मतदाता - 27685

पुरुष- 144689, महिला - 132995

सुजानगढ़ में कांग्रेस भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला

जिले की एक मात्र सुरक्षित सीट सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला हो रहा हैं। पूर्व मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल की राजनीति विरासत संभाल रहे उनके पुत्र मनोज मेघवाल को कांग्रेस ने फिर टिकट दिया है। भाजपा ने यहां टिकट बदलकर प्रधान संतोष मेघवाल को पर दांव खेला हैं। यहां पर एक बार कांग्रेस तो दूसरी बार भाजपा के चुनाव जीतने का इतिहास रहा है। इस बार क्या नया इतिहास बनेगा को लेकर चल रहे कायासों में लोगों का मानना है इस बार दोनों के बीच मुकाबला कड़ा है। आरएलपी यहां किस पार्टी का गणित बिगाड़ती है इस पर लोगों खूब चर्चा कर रहे हैं।

जिला बनने के लाभ पर लगाए जा रहे कयास

सुरक्षित सीट सुजानगढ़ को कांग्रेस सरकार ने जिला बनाने की घोषणा तो करदी लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी मनोज मेघवाल को इसका लाभ मिलेगा या नहीं इस पर लोग संसय व्यक्त करते है तो कई इसे मनोज के लिए लाभदायक बता रहे हैं। अपने पिता के नाम और विकास को लेकर चुनाव मैदान में उतरे मनोज मेघवाल पिछले उप चुनाव में विधायक बने थे। वे दूसरी बार चुनाव मैदान में है इसलिए लोगों में कयास है कि आमने सामने की टक्कर में बाजी कौन मारेगा यह कहना कठिन है।

दूसरी बार भाजपा से चुनाव लड़ रही है संतोष मेघवाल

बीदासर पंचायत समिति की प्रधान संतोष मेघवाल को टिकट देकर भाजपा ने नए समीकरण बनाने के प्रयास किए हैं। पिछली बार डिस एंटिना के चुनाव चिन्ह पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ी संतोष मेघवाल को इस बार भाजपा ने पहली सूची में उन्हें टिकट देकर चौंकाया था। भाजपा के पूर्व विधायक खेमाराम टिकट कटने से नाराज थे लेकिन उनके कोई बागी तेवर सामने नहीं आए हैं इसलिए बताया जा रहा है कि यहां भाजपा व कांग्रेस के बीच टक्कर है।

पिछले चुनाव में 70.65 प्रतिशत हुआ मतदान

सुजानगढ़ विधानसभा में पिछली बार कुल मतदाता थे- 259485

कांग्रेस को मिले मत- 45.62 प्रतिशत

भाजपा को मिले मत- 24.48 प्रतिशत

सुजानगढ़ विधानसभा- - 2023

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