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रतनगढ़ विधानसभा क्षेत्र: मूल कांग्रेसी कुनबे के चार दावेदार, कौन होगा पार?

Rajasthan Election 2018- प्रदेश की सम्भवत: ऐसी एक मात्र सीट है जहां दोनों प्रमुख पार्टी के प्रत्याशी और इनको पटकनी देने पर अमादा दोनों निर्दलीय कांग्रेस की पाठशाला से निकले हैं।
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चूरू

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Santosh Trivedi

Dec 04, 2018

raj kumar rinwa

सिद्धार्थ भट्ट
रतनगढ़। Rajasthan Election 2018- प्रदेश की सम्भवत: ऐसी एक मात्र सीट है जहां दोनों प्रमुख पार्टी के प्रत्याशी और इनको पटकनी देने पर अमादा दोनों निर्दलीय कांग्रेस की पाठशाला से निकले हैं। कांग्रेस के भंवरलाल पुजारी, भाजपा के अभिनेष महर्षि, भाजपा के बागी पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा और कांग्रेस के बागी पूसाराम गोदारा ने ताल ठोक रखी है। महर्षि ने कांग्रेस, बसपा और अब भाजपा को घर बनाया है। गोदारा पिछला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर हार चुके हैं।


रतनगढ़ को ब्राह्मण बहुल सीट कहा जाता है। इस बार समय कांग्रेस के भंवरलाल पुजारी, भाजपा के अभिनेष महर्षि व भाजपा बागी निर्दलीय राजकुमार रिणवा ब्राह्मण हैं। गोदारा जाट समुदाय से है। भाजपा के बागी रिणवा और कांग्रेस के बागी गोदारा ने मजबूती से मैदान में हैं। कांग्रेस-भाजपा मतों के बिखराव को रोकने के लिये जी जान से जुटी हुई हैं।

कस्बे के लोगों का कहना है कि दोनों ही बागी पूर्व मे अपनी-अपनी पार्टी के योद्धाओं में शामिल रहे इसलिये भाजपा और कांग्रेस को इनसे पार पाना आग पर चलने के बराबर हो रहा हैं। कुल मिलाकर गोदारा कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे हैं। रिणवा भाजपा को नुकसान पहुंचा रहे हैैं।

कांग्रेस के समर्थक हरिओम प्रसाद का कहना था कि कांग्रेस का वोट बैंक एक जुट हैं। गोदारा से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भाजपा के समर्थक अजीत कुमार ने कहा कि भाजपा की जीत में रिणवा का कोई फेक्टर ज्यादा असर नहीं डालेगा। भाजपा का कार्यकत्र्ता और वोटर पार्टी के प्रति समर्पित है। वह उम्मीदवार नहीं कमल का फूल देखता है।


चतुष्कोणीय मुकाबला

अभिनेष महर्षि
ताकत: लोगों से निरंतर संपर्क, जातिगत समीकरण पक्ष में, स्थानीय निवासी, व्यवहार कुशल
कमजोरी: दलबदलू छवि, विश्वसनियता का अभाव, समर्थकों में नाराजगी, व्यवहार में दबंगई।

भंवरलाल पुजारी
ताकत: पार्टी में विरोध नहीं, कार्यकर्ताओं से सीधी पहचान, मृदुभाषी, सगंठनिक क्षमता
कमजोरी: जातीय समीकरण, स्थानीय निवासी नहीं, सरकार के खिलाफ कोई आंदोलन या बड़ा प्रदर्शन नहीं किया।

दोनों दलों को पसीने छुड़ा रहे निर्दलीय

राजकुमार रिणवा
ताकत: मंत्री रहते विकास के काम, आसानी से उपलब्ध
कमजोरी: भ्रष्टाचार का आरोप, विकास के काम को भुना पाना, विकास योजनाबद्ध नहीं।

पूसाराम गोदारा
ताकत: ग्रामीण मतदाताओं पर पकड़, आसानी से उपलब्ध
कमजोरी: साफ और सही कहने का नुकसान, शहरी क्षेत्र के मतदाताओं पर कम पकड़

रतनगढ़ क्षेत्र के ये हैं अहम मुद्दे
क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या बनी हुई है। यहां से युवा रोजगार के लिए पलायन को मजबूर हैं। खारा पानी दशकों से समस्या रहा है। कई गांवों में हालात गंभीर हैं। तमाम वादों के बावजूद बिजली की 24 घंटे आपूर्ति नहीं होती है। अस्पताल में डॉक्टरों की पर्याप्त संख्या में नियुक्ति नहीं। किसानों के मुद्दे भी अनसुलझे हैं।

दावेदारों का ये है समीकरण
भंवरलाल: भाजपा सरकार के विरोध का लाभ। अनुसूचित जाति जनजाति और मुस्लिम के परपरागत वोटो का लाभ भी कांग्रेस को मिलता नजर आ रहा है। भंवरलाल को ब्राह्मण वोटों की भी आस है।

अभिनेष महर्षि: पार्टी में विरोध के स्वर। परंपरागत वोटों में बिखराव की आशंका। अन्य पिछड़ा वर्ग राजपूत समुदाय के वोटों पर भाजपा को पूरा भरोसा है। मुस्लिम, अजा-जजा के वोटों में सेंध मुश्किल।

राजकुमार रिणवा: मंत्री के तौर पर कराए गए कार्यों से वोट बटोरने की आस। भाजपा पालिका अध्यक्ष इन्द्रकुमार का समर्थन। कुछ पार्षद भी समर्थन में हैं। ब्राह्मण वोटों के अलावा अन्य वोटों पर नजर।

पूसाराम गोदारा
अजा-जजा और किसानों के सहयोग से दावेदारी। गत दिनों हुए दलित आंदोलन में सक्रिय भागीदारी थी। टिकट कटने की सहानुभूति। मुस्लिम वोटों पर भी पकड़ बनाकर दावेदारी में दम।