
RPSC RAS 2021: सादुलपुर। मेहनत मजदूरी ओर अखबार वितरण करने के साथ साथ विवाह शादियों में कॉफी की मशीन लगाकर मजदूरी कर पढ़ाई करने वाले वार्ड 36 के निवासी सुनील स्वामी ने आरएएस की परीक्षा पास की तो वह आज युवा के लिए प्रेरणास्पद बन गया।
सालों बाद सुनील के घर मे ऐसी खुशियों आई कि मां और दादी की आंखों से आंसू झलक उठे। सुनील स्वामी का आरएएस में चयन होने के बाद परिवार ही नहीं बल्कि मौहल्ला झूम उठा। सुनील ने एक श्रवण बनकर अभावों और अनेक समस्याओं के बीच संघर्ष किया है। पांच वर्ष की उम्र में पिता का साया सर से उठ जाने के बाद सुनील ने घर की ऐसी जिम्मेदारी संभाली की अपनी मां और दादी की सेवा करने के साथ-साथ आरएएस परीक्षा ही पास नहीं की बल्कि रेलवे जूनियर मैनेजर की परीक्षा की पूरी तैयारी कर रखी है। उसे विश्वास है कि 17 दिसंबर को होने वाली परीक्षा में वह निश्चित रूप से सफलता हासिल करेगा। सुनील स्वामी इसके अलावा इलेक्ट्रिकल में बीटेक करने के साथ-साथ कानपुर से पावर हाउस मैनेजमेंट में एम टेक भी किया है।
घर के हालत नहीं थे अच्छे
सुनील के पिता बलदेव स्वामी चाय का होटल खोलकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। जिनका वर्ष 2000 में निधन हो गया। उस वक्त सुनील की उम्र मात्र पांच वर्ष थी। मां ने अपने बच्चों को योग्य बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। समय बीतने के साथ ही सुनील के परिवार पर एक और पहाड़ टूटा और उसके बड़े भाई दीपक का अचानक 28 नवंबर 2022 को निधन हो गया। इस घटना के बाद सुनील सहित उसकी मां और दादी की हिम्मत टूट गई।
संघर्ष में ही है सफलता
सुनील स्वामी कहता है कि संघर्ष में ही सफलता है। इसी उद्देश्य को उसने कड़ी मेहनत की। कक्षा सातवीं में आते-आते कॉलेज तक की शिक्षा सुनील ने अखबार वितरण किया और जो पैसे मिलते थे उसी से शिक्षा प्राप्त की। कंपटीशन परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुनील को पैसे की आवश्यकता थी। तो सुनील ने निर्माण कार्यों पर मजदूरी करने के साथ-साथ फॉलोवर डीजे और डेकोरेशन कर पैसा कमाया। विवाह शादियों में कॉफी और चाय की मशीन लगाकर मजदूरी करने लगा यहां तक की पैसे के लिए सुनील ने हर वह मजदूरी की जिससे उसकी दो पैसे मिले। मेहनत के बलबूते पर सुनील ने वह मुकाम हासिल जिसका उसने लक्ष्य तय किया था।
4-5 घंटे अध्ययन
सुनील स्वामी दिन-रात मजदूरी करने के साथ-साथ अपने भविष्य के लिए जो भी भी समय मिला उसे पढ़ाई में बिताया। सुनील स्वामी ने कहा कि पढ़ाई के लिए उसके पास कोई निश्चित समय नहीं था। फिर भी जब भी समय मिलता 4-5 घंटे नियमित अपनी पढ़ाई करता। कड़ी मेहनत के साथ कंपटीशन परीक्षाओं की तैयारी करता।
गुरु व चाचा बने सहारा
सुनील स्वामी कहता है कि उसका एक ही उद्देश्य था सिर्फ अधिकारी बनना। उसके गुरु रवि यादव थे। जो वर्तमान में अमेरिका में रहते हैं। उन्होंने आर्थिक मदद की तथा पढ़ाई के लिए हर संभव सहयोग दिया। तो दूसरी तरफ उसके चाचा पूनम स्वामी पिता के बाद किसी मसीहा से काम नहीं थे। सुनील ने बताया कि उसके चाचा चाय का होटल चलाते हैं।
जिन्होंने उसको आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोगी नहीं बल्कि सबल प्रदान किया एक ताकत दी। आज जो कुछ हासिल किया उसकी सफलता में उसके चाचा की महत्वपूर्ण भूमिका है।15 दिसंबर 1996 को जन्मे सुनील स्वामी ने विभिन्न समस्याओं के बीच संघर्ष किया तथा अपने चाचा पूनम स्वामी के सहयोग से अपनी दो बहनों की शादी की है प्लाट खरीद तथा पुराना मकान बेचकर अपना एक छोटा सा आशियाना भी बनाया।
Published on:
21 Nov 2023 02:25 pm
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