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फिटनेस पर विराट कोहली का बड़ा बयान, सोशल मीडिया बना रहा है लोगों को पंगू

फिटनेस पर एक बड़ी रिसर्च सामने आई है। जिसमें कई चौकानें वाले सच सामने आए है। इस शोध पर विराट कोहली ने भी बड़ा बयान दिया है।
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नई दिल्ली

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Prabhanshu Ranjan

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Updated: 7 May 2018, 6:09 PM IST

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को मौजुदा क्रिकेट जगत का सबसे फिट क्रिकेटर माना जाता है। करोड़ो लोग विराट जैसी फिटनेस पाना चाहते हैं। विराट के खाने-पीने से लेकर उनके रहन-सहन को फॉलो करते हुए लोग मजबूत शरीर के मालिक बनना चाहते है। लेकिन बहुत कम ही लोग है जो ऐसा कर पाते हैं। अब विराट ने फिटनेस को लेकर एक बड़ी बात कही है। फिटनेस के लिये जुनूनी भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली का मानना है कि सोशल मीडिया ने जीवन में इस कदर घुसपैठ कर ली है कि वह हमारी फिटनेस को खा रहा है।

रिसर्च में हुए कई बड़े खुलासे-

विराट ने स्पोर्टस वीयर ब्रांड प्यूमा के साथ किये गये एक राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षण में यह बात कही है। इस सर्वेक्षण में एक चिंताजनक बात निकलकर सामने आयी है कि पिछले एक साल में एक तिहाई भारतीयों ने एक बार भी शारीरिक गतिविधि नहीं की है। यहां शारीरिक गतिविधियों से तात्पर्य चलने, दौडऩे, जुम्बा, योग , तैराकी और क्रिकेट, फुटबाल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, बास्केटबॉल, वालीबॉल, हॉकी, स्क्वैश तथा स्थानीय खेल जैसे कबड्डी और खोखो से है।

विराट कोहली ने जताई चिंता -

सर्वेक्षण के तथ्यों पर विराट ने भी चिंता जाहिर करते हुये कहा कि यह बात चौंकाने वाली है कि पिछले एक साल में देश के एक तिहाई लोगों ने किसी तरह की कोई शारीरिक गतिविधि नहीं की है। जब आप शारीरिक रूप से फिट होते हैं तो आपके अंदर चुनौतियों का सामना करने का उत्साह होता है। इस बात को मैंने खुद भी महसूस किया है। इसलिये मैं सक्रिय जीवनशैली जीने में यकीन रखता हूं।

सोशल मीडिया पर ये बोले कोहली -

तकनीक और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर विराट ने चिंता व्यक्त की और कहा कि तकनीक और सोशल मीडिया को हमारे जीवन में स्वास्थ्य और फिटनेस पर प्राथमिकता मिल रही है। इस बात को बदले जाने की जरूरत है। खेलों को हमारे रोजाना के जीवन में आत्मसात किया जाना चाहिये। जब भी और कहीं पर भी मौका मिले हमें कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधि करते रहना चाहिये। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे बाहर निकलें और खेलें। इससे तनाव घटेगा और फिट रहने में मदद मिलेगी।

57 फीसदी लोगों ने नहीं खेला कोई गेम -

सर्वेक्षण में 57 फीसदी लोगों का कहना है कि उन्होंने पिछले एक साल में कोई खेल नहीं खेला है जबकि 58 फीसदी का कहना है कि वे समय की कमी के कारण कोई खेल नहीं खेल पाते हैं। लेकिन सर्वक्षण से पता चला है कि यही लोग चार से पांच घंटे सोशल मीडिया, टीवी देखने, फोन पर, निजी बातचीत करने और मैसेज करने पर गुजारते हैं। इस सर्वेक्षण में देश के 18 शहरों में पुरूष और महिला वर्ग में 18 से 40 वर्ष के 3924 लोगों से बातचीत की गयी थी और फिर यह निष्कर्ष निकाला गया है।