
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की सतर्कता के बावजूद उत्तर-पूर्वी दिल्ली जिले में खौफ का माहौल आज भी कायम है। तीन पहले भड़की हिंसा में 35 लोग मारे गए। पहली बार सोमवार से भड़की हिंसा ने कई घरों के चिराग बुझा दिए। दंगाइयों ने मंगलवार को भी कई लोगों की जिंदगी छीन ली। इन्हीं लोगों में से एक थे दीपक कुमार जो अब इस दुनिया में नहीं रहे।
दरअसल, दीपक मंगलवार को सुबह 10 बजे घर से दोस्त विक्की के साथ चांदनी चैक से कपड़े खरीदने के लिए निकले थे। बाहर निकलने के बाद जब इन्हें पता चला कि वहां बाजार बंद है तो दोनों ने सोचा कि जब निकले हैं तो घूमने चलते हैं।
इसके बाद चांदनी चैक से वापस लौटकर जब दीपक और विक्की गोकुलपुरी के पास कर्दमपुरी पुलिया पर पहुंचे तो वहां दीपक को दंगाइयों ने घेर लिया। विक्की ने मौके से भागकर अपनी जान बचाई। जब दंगाई वहां से चले गए तो विक्की ने दीपक को देखा और उसे लेकर जीटीबी अस्पताल पहुंचे। यहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने दीपक को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद विक्की ने दीपक के बड़े भाई अजय कुमार को फोन पर सूचना दी।
मौत की सूचना मिलते ही अजय कुमार अस्पताल की ओर दौड़े। अजय कुमार ने बताया कि उनका परिवार मूलरूप से बिहार के भोजपुर जिले के सलेमपुर गांव का रहने वाला है। वे करीब 25 साल से मंडोली में रहते हैं। दीपक और अजय दोनों भाई मजदूरी करते थे। दीपक अपने परिवार में अकेले कामकाजी व्यक्ति थे।
उनकी दो बेटी और एक बेटा हैं। तीनों बच्चे अभी छोटे हैं। उनकी मौत की खबर सुनते ही उनके घर में कोहराम मच गया और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। जबकि बच्चों को कुछ बताया नहीं गया था। देर शाम तक परिजन मोर्चरी पर शव मिलने का इंतजार करते रहे। वहीं पोस्टमार्टम न होने के कारण परिजनों को शव नहीं मिल सका।
बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के विरोध और समर्थन के दौरान जाफराबाद, मौजपुर, करावल नगर और चांद बाग में जमकर हिंसा हुई, जिसके बाद अब तक 35 लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में घायल 150 से अधिक लोगों को दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में उपचार जारी है।
Updated on:
27 Feb 2020 01:53 pm
Published on:
27 Feb 2020 01:50 pm
