
अंधविश्वास में लोग कैसे अंधे हो जाते हैं, इसका एक उदाहरण गुजरात के गिर सोमनाथ से सामने आया है। यहां भूत उतारने के लिए पिता और चाचा ने एक बच्ची को ऐसी-ऐसी यातनाएं दी कि उस मासूम की मौत हो गई। अंधविश्वास की आग में जली बच्ची की उम्र मात्र 14 वर्ष थी। धैर्य नामक इस बच्ची को उसके पिता और चाचा ने ही मिलकर मौत के घाट उतार दिया।
इस मामले में गिर सोमनाथ पुलिस ने धैर्य के पिता भावेश अकबरी और उसके भाई दिलीप को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के दोस्तों से पूछताछ के लिए राजकोट, अहमदाबाद और अन्य जगहों पर टीमें भेजी हैं। एसपी मनोहरसिंह जडेजा ने बताया, भावेश को शक था कि उसकी बेटी धैर्य किसी बुरी आत्मा के प्रभाव में है और इसलिए उसने अपने भाई दिलीप की मदद से लड़की की हत्या कर दी। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
हालांकि एसपी ने नरबलि की चर्चा का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि अब तक उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चलता हो कि परिवार की समृद्धि के लिए बच्ची की बलि दी गई हो। मालूम हो कि दो दिन पहले केरल में समृद्धि के लिए डॉक्टर दंपती द्वारा दो महिलाओं की बलि देने की बात सामने आई थी। जिसके बाद धैर्य के मामले में भी ऐसा शक जताया जा रहा था।
बताया जाता है कि धैर्य के चाचा दिलीप को तंत्र-मंत्र पर विश्वास था। उसे शक था कि बच्ची के शरीर में भूत प्रवेश कर गया है। जिसे भगाने के लिए उसने अपने भाई भावेश के साथ मिलकर 1 अक्टूबर को खेत ले गए और अंधविश्वास के चलते काला जादू उतारने की बात कहते हुए उसे गन्ने के खेत में बांध दिया। दो अक्टूबर को, दिलीप और भावेश ने उसे लाठी और लोहे के तार से पीटा, उसके बालों को एक छड़ी से बांध दिया और उसके बगल में दो कुर्सियां रख दीं। उसे चार से पांच दिनों तक बिना पानी और भोजन के रखा गया 7 अक्टूबर को उन्होंने बच्ची को मृत पाया।
बच्ची की मौत के बाद दोनों भाइयों ने परिजनों को बताए बिना बेटी का अंतिम संस्कार भी कर दिया। बाद में भावेश ने पत्नी को बेटी की मौत की बात बताई। पत्नी ने अपने पिता को बताया। जिसके बाद भावेश के ससुर वलजीभाई डोबरिया ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, और बताया कि दिलीप ने कहानी गढ़ी कि धैर्य को संक्रामक बीमारी हो गई थी, उसके शरीर पर छाले थे जिससे उसकी मौत हो गई। यह सुनिश्चित करने के लिए कि अन्य लोग संक्रमित न हों, उन्होंने अपने रिश्तेदारों को बताए बिना उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
वलजीभाई को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ, इसलिए वह और उनका बेटा बुधवार को धवा गांव लौट आए और दिलीप पर सच बोलने का दबाव डाला। बताया जा रहा है कि, दिलीप ने कहा कि धैर्या एक बुरी आत्मा से प्रभावित थी, इसलिए वह उसे खेत में बांधकर भूखा-प्यासा रखा था। इसी बीच उसकी मौत हो गई। जिसके बाद 8 अक्टूबर की सुबह, उन्होंने गांव के श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया।
Published on:
13 Oct 2022 08:16 pm
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