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Damoh By-Election Result : टिकाऊ और बिकाऊ के मुद्दे पर इस बार बिछी चुनावी बिसात, दोनों दलों के दिग्गजों की साख दाव पर

चुनाव सिर्फ एक सीट पर हुआ, लेकिन साख पूरे प्रदेश के भाजपा और कांग्रेस दल के दिग्गजों की दाव पर लगी है। देखना दिलचस्प होगा कि, आखिर जीत का सेहरा किसके सिर पर बंधेगा।
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दमोह

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Mohammad Faiz Mubarak

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Updated: 2 May 2021, 11:37 AM IST

Damoh By-Election Result

Damoh By-Election Result : टिकाऊ और बिकाऊ के मुद्दे पर इस बार बिछी चुनावी बिसात, दोनों दलों के दिग्गजों की साख दाव पर

दमोह/ ये बात तो हम सभी जानते हैं कि, मध्य प्रदेश के दमोह में हालही में संपन्न हुआ उपचुनाव टिकाऊ और बिकाऊ के मुख्य मुद्दे पर लड़ा गया। अब कुछ ही देर में ये स्पष्ट हो जाएगा कि, इस चुनावी दंगल में जनता ने जीत का सेहरा किसके सिर पर बांधा है। बहरहाल, चुनाव सिर्फ एक सीट पर हुआ, लेकिन साख पूरे प्रदेश के भाजपा और कांग्रेस दल के दिग्गजों की दाव पर लगी है। बता दें कि, दमोह उपचुनाव में भाजपा की ओर से राहुल सिंह लोधी को तो कांग्रेस की ओर से अजय टंडन को उम्मीदवार चुना गया है, जिनकी किस्मत का फैसला चंद घंटों के भीतर EVM के पिटारे से हो जाएगा।

26 राउंड में संपन्न होगी मतगणना

आखिरकार लंबे टालमटोल के बाद कोरोना के बीच ही संपन्न हुए दमोह विधानसभा सीट पर 17 अप्रैल को मतदान हुए थे। इसमें 2018 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 15 फीसदी कम कुल 59.81 फ़ीसदी मतदान हुआ। 2 लाख 39 हजार 808 मतदाताओं वाली इस विधानसभा सीट पर 359 मतदान केंद्रों पर ये वोट डाले गए, जिसकी मतगणना की जा रही है। मतगणना कुल 26 राउंड में संपन्न होगी। ये 14 टेबलों पर तीन कमरों की निगरानी में की जा रही है।

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दोनों पार्टियों के लिए बदल गए थे समीकरण

वोट काउंटिंग रविवार की सुबह 8 बजे से शुरू की जा चुकी है। बता दें कि, इस उपचुनाव में दो महिला प्रत्याशी समेत कुल 22 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, सीट पर मुख्य लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होगी।


ये है उपचुनाव की वजह

लोधी वोट बैंक की खासी दखल वाली इस विधानसभा सीट में 2018 के पहले पिछले 28 सालों से इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा, जिसमें मध्य प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया लगातार इस सीट पर जीत दर्ज कराते रहे। लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से ही मैदान में उतरे राहुल सिंह लोधी ने उन्हें शिकस्त दे दी। बहरहाल पिछले साल बदले समीकरण और कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए राहुल सिंह लोधी पर भाजपा ने एक बार फिर दांव खेला है। इस बीच भाजपा को इस उपचुनाव में खासी मशक्कत भी करनी पड़ी, क्योंकि जयंत मलैया और उनके बेटे पार्टी के इस फैसले से पहले तो नाखुश थे लेकिन बाद में उन्हें मना लिया गया। खास बात ये है कि, अब तक के इतिहास में हर बार विधानसभा चुनाव के परिणामों हार जीत में बेहद मामूली अंतर ही रहा है।

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टिकाऊ और बिकाऊ रहा उपचुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा

बहरहाल, दमोह उपचुना में हुए प्रचार का निचोड़ निकालें, तो ये मुख्य रूप से टिकाऊ और बिकाऊ के इर्द गिर्द ही घूमता नजर आया। क्योंकि, राहुल सिंह इसके पहले कांग्रेस से चुनाव लड़कर जीत चुके थे। लेकिन, कमलनाथ सरकार में किए गए मेडिकल कॉलेज के वादे को पूरा न करने पर उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शरण ले ली थी। हालांकि, टीकाऊ और बिकाऊ के बाद जिले में मेडिकल कॉलेज, बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे भी भाषणों में खासी जगह बनाते नजर आए थे।


दिग्गजों की साख की लड़ाई

ये बात तो सभी जानते हैं कि, पिछली बार हुए 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के दौरान प्रदेश पर शिवराज का जादू चला और भाजपा को मध्य प्रदेश में एक बार फिर सत्ता वापसी का मौका मिला था। लेकिन, अब देखना दिलचस्प होगा कि, इस बार भी क्या जनता का भरोसा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ है या नहीं इसका फैसला आज होने जा रहा है। जो भी हो ये उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की जीत के साथ साथ कब अचानक दोनों दलों के बड़े नेताओं की साख की लड़ाई बन गया पता ही नहीं चला। फिलहाल, जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा, चंद घंटों में ये स्पष्ट हो जाएगा।