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कलेक्टर को नोटों की गड्डी लिए मिला वेंडर, दमोह पंजीयक कार्यालय में कमीशन का खेल उजागर

Registrar Office Commission Scam: रजिस्ट्री में कमशीन का खेल, कलेक्टर ने पंजीयक कार्यालय का किया औचक निरीक्षण, डेढ़ लाख रुपए लिए मिला वेंडर, ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद अलग रजिस्टर में हो रही थी एंट्री।
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damoh collector surprise inspection

collector surprise inspection registrar office, पंजीयक कार्यालय का औचक निरीक्षण करते कलेक्टर (Source-Patrika)

Damoh Registrar Office Commission Scam: मध्यप्रदेश के दमोह में जिला पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री शुल्क के नाम पर जमकर कमीशनबाजी का खेल चल रहा है। यहां 5 लाख से कम वाली रजिस्ट्री पर अधिकारियों को दो से ढाई हजार रुपए और 5 लाख से अधिक की रजिस्ट्री पर आधा परसेंट हिस्सा दिया जाता है। यह काम सीधे वेंडरों के जरिए होता है। यह राशि अधिकारियों को गुपचुप तरीके से दी जाती है। ऐसे ही मामले का पर्दाफाश कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के पंजीयक कार्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान सामने आया। दरअसल, कलेक्टर के पास कमीशन बाजी से जुड़ी शिकायतें लगातार मिल रही थीं।

कलेक्टर पहुंचे तो डेढ़ लाख रुपये लिए खड़ा था वेंडर

गुरुवार शाम जब कलेक्टर अचानक पंजीयक कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें देख अधिकारियों में हड़कंप मच गया। वे सीधे डिप्टी रजिस्ट्रार ज्योति पटेल के चैंबर पंहुचे, जहां पहले से ही डिप्टी रजिस्ट्रार बद्री प्रसाद साहू बैठे हुए थे। वहीं, कलेक्टर को एक व्यक्ति डेढ़ लाख रुपए की राशि लिए मिला। कलेक्टर ने जब उसके बारे में पूछा तो उसने अपना नाम संजय यादव बताया और कहा कि वह वेंडर हैं। उसने बताया कि उक्त राशि वह रजिस्ट्री अधिकारी को देने आया था। कलेक्टर ने जब दोनों अधिकारियों से सवाल किए तो उन्होंने इनकार करते हुए कहा कि उक्त राशि वेंडर की है। हालांकि रजिस्ट्रार के मौजूद न होने पर कलेक्टर ने आगे की कार्रवाई के लिए वेंडर और डिप्टी रजिस्ट्रार के बयान दर्ज कर नोटिस जारी करने की बात कही है।

कुर्सी-टेबिल लगाकर बैठा युवक ले रहा था 200-200 रुपये

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर यादव को उप पंजीयक कार्यालय के बाहर एक टेबिल कुर्सी दिखाई दी, जिसमें बैठा युवक रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों के नाम रजिस्टर पर दर्ज कर रहा था। कलेक्टर ने जब लोगों से बात की तो पता चला कि स्लॉट के आधार पर युवक क्रेता और विक्रेता को उप पंजीयक के पास भेजता है और बदले में दो-दो सौ रुपए लेता है। कलेक्टर यह जानकर हैरान हो गए और उन्होंने मामले की जांच के निर्देश दिए।

फर्जी रजिस्ट्री की मिल रही थीं शिकायतें

जनसुनवाई के दौरान कई मामलों में फर्जी रजिस्ट्री होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसी की जमीन है और कोई दूसरा आसानी से रजिस्ट्री करा रहा है। ऐसे ही मामले में कलेक्टर ने मौके पर मौजूद लोगों से बात की, जहां संदेह होने पर मामले को भी जांच में लिया है। कलेक्टर यादव का कहना है कि देखने में आ रहा है कि ऊर्फ शब्द लगाकर फर्जी रजिस्ट्री हो रही है। उदाहरण के तौर पर यदि रमेश की जमीन है और उसके आगे मुकेश ऊर्फ रमेश लिखकर फर्जी तरीके से जमीनें अपने नाम कराई जा रही हैं। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि मुझे फर्जी रजिस्ट्री और कमीशनबाजी के संबंध में शिकायतें मिल रही थीं। औचक निरीक्षण में काफी अनियमित्ताएं मिली हैं। संबंधितों के बयान लेने और उन्हें नोटिस दिए जाने के निर्देश दिए हैं। शासन के तय निर्देशों के अनुसार रजिस्ट्री होना चाहिए, इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।