
ग्रामीणों ने मनाया माटी तिहार (photo source- Patrika)
Mati Tihar: गीदम जिले के ग्रामीण अंचल में इन दिनों बीज पंडुम की धूम है। वैशाख कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से यह सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में गीदम ब्लॉक के रोंजे में ग्रामीण माटी तिहार की खुशियां मनाते हुए नजर आए। परंपरानुसार गीदम-बारसूर मुख्य मार्ग पर रोंजे की सरहद पर ग्रामीणों ने बाट छेकनी रस्म अदा कर राहगीरों से माटी मान लिया।
इस दौरान तोड़ी बजाकर राहगीरों को पर्व की बधाई दी और लोकनृत्य कर खुशी से झूमते नजर आए। ब्रह्म मुहूर्त में रोंजे के ग्रामीणों ने माटी देव की पूजा-अर्चना की। तत्पश्चात गायता और वड्डे की अनुमति लेकर ग्रामीणों की टोली गांव की सरहद पर पहुंची और बाट छेकनी रस्म अदा कर राहगीरों के साथ पर्व की खुशियां मनाई।
साप्ताहिक बाजार का दिन होने के कारण गीदम-बारसूर मार्ग पर नाकेबंदी से राहगीरों को थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन परंपरा को ध्यान में रखते हुए लोगों ने सहयोग किया।
बाट छेकनी रस्म से प्राप्त धनराशि एवं अन्य सामग्री को माटी पुजारी, वड्डे और गायता को भेंट कर दैवगुड़ी के पास सभी ने सामूहिक भोज का आनंद लिया।
माटी तिहार मनाने के पीछे आदिवासी समाज की मान्यता है कि इससे ग्राम व कुल देवता प्रसन्न होते हैं और आने वाले खरीफ सीजन की खेती में प्रकृति का भरपूर सहयोग मिलता है।
बारसूर निवासी थलेश ठाकुर ने बताया कि माटी मान आदिवासी संस्कृति और परंपरा का एक अहम हिस्सा है। इस पर्व के जरिए ग्रामीण ग्राम व माटी देव की पूजा कर खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार और खुशहाली की कामना करते हैं।
रोंजे निवासी सुदरू ने बताया कि माटी तिहार के दिन पलाश के पत्तों से बनी बीज की पोटली देवता को अर्पित की जाती है। साथ ही आम फल और चिरौंजी जैसे वनोपज को देवता को समर्पित कर आभार व्यक्त किया जाता है।
जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन की फसलें- धान, मक्का, कोदो-कुटकी और रागी के बीज देवता को अर्पित किए जाते हैं और उसी बीज से बुआई का शुभारंभ करने की परंपरा है। वहीं इस प्रचंड गर्मी में आम और चार जैसे फलों की उपलब्धता के लिए प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भी माटी तिहार और आमानवा खास अवसर माना जाता है।
Updated on:
11 Apr 2026 01:45 pm
Published on:
11 Apr 2026 01:44 pm
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