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33 साल बाद राजस्थान लौटा भाप इंजन, बुजुर्गों की ताजा हुईं यादें, नई पीढ़ी कर पाएगी दीदार

ब्रिटिश काल में रेलनगरी के नाम से विख्यात राजस्थान का बांदीकुई एक बार फिर अपने अतीत से रूबरू हुआ है। तमिलनाडु के गोल्डन रॉक वर्कशॉप से स्टीम लोकोमोटिव बांदीकुई लाया गया है।
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दौसा

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Kamal Mishra

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Updated: 24 Feb 2026, 7:12 PM IST

Steam locomotive engine

नैरो गेज क्लास-बी स्टीम लोकोमोटिव (फोटो-पत्रिका)

दौसा। रेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखने वाली रेलनगरी बांदीकुई एक बार फिर अपने अतीत से रूबरू हुई है। करीब 33 वर्ष बाद भाप के इंजन की यादें ताजा हो गईं, जब दक्षिण रेलवे की गोल्डन रॉक वर्कशॉप, तिरूचिरापल्ली (तमिलनाडु) से नैरो गेज क्लास-बी का स्टीम लोकोमोटिव यहां पहुंचा। 11.43 टन वजनी इस इंजन को जीआरपी थाने के बाहर स्थापित किया गया है, जो अब शहर के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन गया है।

इंजन को ट्रेलर के जरिए तमिलनाडु से कई दिनों की यात्रा के बाद बांदीकुई लाया गया। दो क्रेनों की मदद से इसे विशेष रूप से तैयार फाउंडेशन पर स्थापित किया गया। इसके आसपास गार्डन और सौंदर्यीकरण कार्य भी किया जाएगा। रात में विशेष लाइटिंग से इसे और भव्य बनाया जाएगा। भाप इंजन को देखने के लिए लोगों में उत्साह है। बुजुर्ग अपने बचपन की रेल यात्राओं को याद कर रहे हैं, वहीं युवा पीढ़ी इतिहास से साक्षात्कार कर रही है।

152 वर्ष पुराना गौरव

प्रदेश की पहली ट्रेन 20 अप्रेल 1874 को आगरा से बांदीकुई के बीच चली थी। भाप के इंजनों की सीटी और धुएं के साथ शुरू हुआ यह सफर राजस्थान में रेलवे विस्तार की नींव बना। वर्ष 1993 तक भाप व डीजल इंजनों का संचालन होता रहा। बाद में आमान परिवर्तन और विद्युतीकरण के साथ तकनीक बदली, लेकिन भाप इंजन की स्मृतियां आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

विधायक भागचन्द सैनी टांकड़ा के प्रयास

रेल विरासत को सहेजने के लिए विधायक भागचन्द सैनी टांकड़ा ने रेलमंत्री और रेलवे अधिकारियों से कई दौर की वार्ता की। उन्होंने इंजन स्थापना और रेल म्यूजियम की मांग उठाई। उनका कहना है कि बांदीकुई के पुराने वैभव को लौटाने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

कभी गूंजती थी सीटी और हथौड़ों की आवाज

बांदीकुई केवल जंक्शन नहीं, बल्कि लोको शेड के कारण भी प्रसिद्ध रहा। यहां इंजनों की मरम्मत होती थी और बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी कार्यरत थे। वर्ष 1999 में लोको शेड बंद होने के साथ एक युग का अंत हो गया।

फैक्ट फाइल

1874 – आगरा-बांदीकुई के बीच प्रदेश की पहली ट्रेन
1993 – भाप इंजनों का संचालन लगभग समाप्त
1999 – लोको शेड बंद

इंजन की तकनीकी विशेषताएं

वजन: 11.43 टन
शक्ति: 335 हॉर्स पावर
पानी क्षमता: 1818 लीटर
कोयला क्षमता: 1.5 टन
लंबाई: 5878 मिमी
ऊंचाई: 2559 मिमी

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