
आईएएस दिव्या मित्तल, PC- फोटो- Instagram/@divyamittal_IAS
IAS Divya Mittal Resignation: उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के अचानक प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के फैसले ने ब्यूरोक्रेसी से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल बढ़ा दी है। करीब 13 साल की सेवा के बाद उन्होंने रविवार को इस्तीफे का ऐलान किया। इसमें इस्तीफे का कोई कारण तो नहीं बताया है लेकिन कई तरह की चर्चाएं हैं।
हालांकि, उनके इस्तीफे के बाद अब मई 2026 की उनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट फिर चर्चा में आ गई है। देवरिया के डीएम पद से हटाए जाने के कुछ समय बाद लिखी गई इस पोस्ट में दिव्या मित्तल ने सफलता, मानसिक शांति और खुशी को लेकर कई सवाल उठाए थे। उनके करीबियों की मानें तो उस समय से ही वह प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बारे में गंभीरता से विचार करने लगी थीं।
दिव्या मित्तल को मई के पहले सप्ताह में देवरिया के जिलाधिकारी पद से हटाकर राजस्व परिषद में भेजा गया था। फील्ड पोस्टिंग से हटाकर शासन में भेजे जाने के बाद वह कथित तौर पर संतुष्ट नहीं थीं।उनके करीबियों का कहना है कि दिव्या मित्तल प्रशासनिक सेवा में आने के पीछे एक खास मकसद रखती थीं। उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र की नौकरी छोड़कर यूपीएससी का रास्ता इसलिए चुना था ताकि सीधे लोगों के बीच काम कर सकें। डीएम की जिम्मेदारी में उन्हें इसी तरह जनता से जुड़कर काम करने का मौका मिलता था।
करीबियों के मुताबिक, जिस समय वह फील्ड में रहकर काम करने की स्थिति में थीं, उसी दौरान उन्हें शासन की पोस्टिंग मिल गई। यही बात उन्हें खटक रही थी और इसके बाद से ही इस्तीफे को लेकर उनका मन बनने लगा था।
दिव्या मित्तल की मई में की गई सोशल मीडिया पोस्ट अब उनके इस्तीफे के फैसले से जोड़कर देखी जा रही है। उन्होंने अपनी शिक्षा और करियर का जिक्र करते हुए लिखा था कि देश के शीर्ष संस्थानों में पढ़ाई के दौरान उन्हें मुश्किल परीक्षाओं को पार करना और बड़ी जिम्मेदारियां संभालना तो सिखाया गया, लेकिन मानसिक शांति और अकेलेपन से निपटना नहीं सिखाया गया।
उन्होंने सवाल उठाया था कि आखिर स्कूलों और देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में बच्चों को खुश रहना और मानसिक शांति हासिल करना क्यों नहीं सिखाया जाता।
उन्होंने अपनी पोस्ट में शिक्षा व्यवस्था की उन 9 महत्वपूर्ण बातों का भी जिक्र किया था, जिन्हें वह मानती हैं कि सफल और खुशहाल जीवन के लिए जरूरी हैं।
दिव्या मित्तल का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी काफी मजबूत रहा है। वर्ष 2013 में आईएएस चुने जाने से पहले उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से पीजीडीएम किया था। 2015 में मसूरी में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पहली नियुक्ति मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के तौर पर हुई।
इसके बाद उन्होंने गोंडा में मई 2017 में मुख्य विकास अधिकारी के रूप में काम किया। कानपुर में यूपीएसआईडीसी की संयुक्त महाप्रबंधक और फिर बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।
इसके बाद वह संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रहीं। डीएम के तौर पर उनकी फील्ड पोस्टिंग के दौरान उनके काम करने के तरीके को लेकर भी चर्चा होती रही।
अब लेखन और शिक्षण की ओर बढ़ना चाहती हैं
रविवार को इस्तीफे की घोषणा करते हुए दिव्या मित्तल ने संकेत दिया कि अब वह अपने परिवार और बेटियों के साथ समय देने के अलावा लेखन और शिक्षण जैसे अपने पुराने पैशन पर ध्यान देना चाहती हैं।
उनके इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या मई में फील्ड पोस्टिंग से हटाया जाना उनके फैसले का तत्काल कारण बना या वह लंबे समय से प्रशासनिक सेवा से बाहर निकलने के बारे में सोच रही थीं। हालांकि, उनके सार्वजनिक बयान में इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और भविष्य की रुचियों को प्रमुख वजह बताया गया है।
फिलहाल दिव्या मित्तल का इस्तीफा यूपी की नौकरशाही में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और उनकी पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट को उनके इस फैसले की पृष्ठभूमि के तौर पर देखा जा रहा है।
Updated on:
02 Sept 2026 08:19 am
Published on:
02 Sept 2026 08:17 am
