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मियां का पुरा नरसंहार: गांव के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात, अवैध संबंध बना हत्याकांड का कारण

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Mian ka Pura dholpur

मियां का पुरा नरसंहार: गांव के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात, अवैध संबंध बना हत्याकांड का कारण

धौलपुर। क्षेत्र के गांव मियां का पुरा में गुरुवार को हुए हत्याकांड के बाद तनाव की स्थिति है। नरसंहार की घटना के दूसरे दिन भी लोग सहमे हुए हैं। घटना के बाद एक पक्ष के लोग ही गांव में मौजूद हैं। जबकि सरपंच परिवार के ज्यादातर घरों में ताले लगे हैं। गांव के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है।

इस बीच हत्याकांड के मामले में स्थानीय पुलिस की लापरवाही भी सामने आ रही है। तीन दिन पहले ही एक पक्ष ने थाना पुलिस को मारपीट का मामला दर्ज कराया था, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, नतीजा हत्याकांड के रूप में सामने आया। अगर पुलिस की ओर से दर्ज मामले पर तत्परता दिखाई जाती तो इतनी बड़ी घटना शायद ही नहीं घटित होती।

उल्लेखनीय है कि 24 सितंबर को सदर थाने में भिलगांव निवासी रामस्वरूप कुशवाह ने आरोपियों के खिलाफ जानलेवा हमले की नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। वहीं, प्रारंभिक पड़ताल में मामला अवैध संबंध से जुड़ा होना सामने आ रहा है। घटना के बाद से ही सरपंच के मकान सहित उनके समर्थकों के मकानों के पर ताले लगे हुए हैं। गुरुवार को चार शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जबकि शुक्रवार को सरपंच पति का अंतिम संस्कार कड़ी सुरक्षा में हुआ।

अवैध संबंध बना हत्याकांड का कारण
रामस्वरूप के पुत्र की शादी मनियां थाने के गांव निवासी एक युवती से हुई थी। रामस्वरूप का पुत्र फिलहाल बैंगलोर में मजदूरी का काम करता है और उसकी पत्नी गांव में रहती है। आरोप है कि गांव में रहने वाले भगत सिंह को विवाहिता के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया। इस दौरान आरोपी भगत को उसके परिजन रामरतन, राकेश, उत्तम जबरन छुड़ा कर ले गए।

तभी से आरोपी रामस्वरूप से रंजिश रखने लगा। 24 सितंबर को रामस्वरूप दुकान से दवा लेने के लिए आया, इस दौरान रास्ते में उसे रामरतन, राकेश, उत्तम, वीरेन्द्र आदि ने उसे रोक लिया और उस पर लाठी से हमला कर दिया। हमले में रामस्वरूप का हाथ टूट गया। हल्ला मचने पर गांव के बीरवल, पातीराम, रामलाल आए और जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इस संबंध में थाने में मामला दर्ज हुआ।

आरोपितों की तलाश में दबिशें शुरू
जानलेवा हमला करने का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले में गंभीरता से अनुसंधान शुरू नहीं किया और ना ही आरोपियों से इस बारे में पूछताछ की जहमत उठाई। इसी का नतीजा था कि आरोपी पक्ष ने पीडि़त रामस्वरूप तथा मामले में गवाह पातीराम व रामलाल के पुत्र दीपू को मौत के घाट उतार दिया।

वहीं, पुत्र को बचाने आए पातीराम के पिता अमर सिंह की भी हत्या कर दी। सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच विवाहिता के तलाक को लेकर भी चर्चाएं चल रही थी और इसे लेकर कई बार दोनों पक्षों में पहले भी कई बार झगड़ा हो चुका था। पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े आरोपितों की तलाश में शुक्रवार सुबह से ही गांव व आरोपितों के ठिकानों पर दबिशें देना शुरू कर दिया।